ग़ज़ल – रोहित चौरसिया

हमारे मुल्क में धोखा नहीं है ,
सियासत है कोई सौदा नहीं है।
ख़रीदे खूब होंगे दौलतों से ,
यहाँ इमां कभी बिकता नहीं है।
चलेगी साँस जब तक उस बदन में ,
बतन का वीर भी झुकता नहीं है।
दिखाकर ख़्वाब में उसके सपन भी,
मुक़द्दर में मेरे लिखता नहीं है।
यहाँ तो इश्क भी करता वही है ,
कभी जो मौत से डरता नहीं है।
चलेंगे आख़िरी दम तक डगर में ,
सफ़र मैंने कभी छोड़ा नहीं है।
मुहब्बत करके भी रोहित खफ़ा हो ,
क़सम हमनें कभी तोड़ा नहीं है।
- रोहित चौरसिया
सतना मध्यप्रदेश ।

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