‘हुनर के बहाने योहन सदा साथ है’ : नीदरलैंड के आयक्स क्लब की एरिना से सलामी


आज कल यूरोप में फुटबॉल के चैंपियनशिप के लिए आधीरा त तक मैचों की धूम मची हुई है। आयक्स और बार्सिलोना क्लब के खिलाडियों द्वारा आकर्षक ढंग से गोल किये जा रहे है। नीदरलैंड के पुराने फुटबॉल क्लब के किशोरकल में योहन का शैशवकाल व्यतीत हुआ। दोनों एक दूसरे के साथ बड़े हुए और एक दूसरे को बड़ा किया। ३ अप्रैल को आयक्स एरिना में आयक्स क्लब का पहला मैच होना था इस से पूर्व अपराहन काल में आयक्स के पुराने स्टेडियम से क्लब के महत्वपूर्ण लोगों के नेतृत्व में जुलूस निकला। पोस्टर, बैनर के साथ जुलूस का काफिला योहन के जन्म स्थान से होता हुआ आयक्स एरिना पंहुचा। जहाँ दुनिया भर से आये आयक्स स्कूल के बुजुर्ग खिलाडी आगवानी के लिए पहले से ही उपस्थित थे।

चारों दिशाओं से समर्थकों और चहेतों की भीड़ का हुजूम उमड़ पड़ा था। योहन सदेह उपस्थित नहीं है लेकिन आयक्स स्टेडियम की देह में- नीदरलैंड देश के- स्पेन के और विश्व के खेल प्रेमियों की स्मृतियों में उनकी धड़कन बने हुए है। आयक्स स्टेडियम के नीचे भूमितल पर विशाल कार पार्किंग है और ऊपर स्टेडियम है जो प्रतिकूल मौसम में स्वचालित यंत्रों द्वारा धक जाता है और तब इंडोर फुटबॉल मैच होता है। लेकिन ३ अप्रैल को नील आकाश से नीलिमा झर रही थी। जैसे योहन की नीली आँखों का सुनील प्रकाश स्टेडियम में उतर रहा हो। ऐसे मैदान में १४ नंबर की दो टीशर्ट मैदान में बीछी हुई थी। एक सिन्दूरी रंग की जो राष्ट्रीय टीम की प्रतीक थी और दूसरी सफ़ेद तथा लाल रंग में जो आयक्स क्लब के घर के खिलाडियों की अपनी डिज़ाइन की शर्ट है। जिसे पहन कर वे देश के भीतर अन्य फुटबॉल खिलाडियों से खेलते है। दूसरे बार्सिलोना क्लब के डिज़ाइनर नंबर की शर्ट थी कुकी वो इसी नंबर से क्लब का प्रतिनिधत्व करते थे। और आज फुटबॉल की दुनिया में स्पेन के बार्सिलोना क्लब की जो प्रतिष्ठा है उसका परचम योहन के द्वारा ही फहराया गया है।

आयक्स एरिना के फुटबॉल स्टेडियम में १४ नवंबर योहन के सपने की तरह छाया हुआ था। स्टेडियम के विशाल डिस्प्ले टेलीविज़न के बोर्ड पर १४ नवंबर लिखा हुआ था और खेल होते समय मैदान के चरों तरफ जहाँ सहयोगी फाइनेंसिंग कंपनियों के विज्ञापन तर – ऊपर चढ़ते उतरते रहते थे वहां भी १४ नवंबर की तकदीर खुली हुई थी। योहन के फुटबॉल कौशल ने १४ नवंबर को विज्ञापन के कर रख दिया है। बीच बीच में बदकंत काउफ़ ( डच भाषा में धन्यवाद ) ग्रासिया काउफ़ (स्पेनिश भाषा में धन्यवाद) रह रह कर उमड़कर आता था।

खेल शुरू होने के पूर्व दर्शकों की सीट पर कहीं सफ़ेद, कहीं लाल और कहीं सफ़ेद सीट के बराबर के आकार के पेपर सीट रखे हुए थे। खेल शुरू होने से पूर्व दर्शकों ने हाथों से उठकर उसे अपने चहरे के सामने कर लिया जिससे लिख गया था; डच भाषा में- अनुवाद- धन्वाद काउफ़, योहन काउफ़ तुम हमेशा रहोगे। १४ की संख्या सरे नंबरों में सबसे बड़ी, ऊँची, और महान संख्या है। डच की लीजेंड छवि योहन क्राउफ़ के लिए हज़ारो की कतारों द्वारा सलामी दी गयी। मार्च किया गया।

३ अप्रैल को ३ गोल बनाकर आयक्स क्लब के खिलाडियों ने अदभुत खेल का प्रदर्शन किया। खिलाडियों ने अपने नंबर के शर्ट पहले ही पहन रखे थे लेकिन ३ अप्रैल को उनकी शर्ट की छाती पर १४ नंबर लिखा हुआ था और योहन क्राउफ़ की छवि बनी हुई थी और बाँह में काले रंग का (बैंड) फीता बांध रखा था। दुःख से गला ……. हुआ था लेकिन योहन को सलामी देने के लिए सांसे उल्लास बनकर धड़क रही थी। पाँव में तूफान जैसी गति और जोश था। ….. , अमीन, बशर, मिलिक, डेविड क्लासेन सब मिलकर अपने पाँवों से फुटबाल को कुछ ऐसे घुमाते थे कि प्रतिपक्षी खिलाड़ी नाचते रह जाते थे। कीपर यास्पर सिलेसन जिनकी एक सप्ताह पूर्व नाक पर गहरी चोट लगी हुई थी वे भी प्लास्टर और पट्टियों से चहरे को रक्षा के लिए छुपाए हुए आँखों से अपना घर गोल होने से बचने में लगे हुए थे। आयक्स टीम के कोच फौंक द बूर जिनके एक सप्ताह पूर्व ही अभ्यास के दौरान दाहिने पैर के टखने में गहरी चोट लग गयी थी, फिर भी प्लॉस्टर लगे हुए पैर से बैसखियों के सहारे बीच बीच में खड़े होकर खिलाडियों को निर्देश दे रहे थे। फुटबॉल खेल में जीवन से बड़ा होता है- खेल का जूनून। चोट आ जाने और घायल होने पर, तुरंत मैदान में ही टांका लगवाकर खिलाड़ी खेलते हैं- खेल। लेकिन ३ अप्रैल को कोच और कीपर सप्ताह पूर्व पहले से ही दुर्घटना का शिकार होने के बावजूद डेट हुए थे। यह डेट रहना ही फुटबॉल खिलड़ियों के जीवन का प्रमुख लक्ष्य और जीवन दर्शन रहता है। यही योहन की सीखावनी रही है।

 

३ अप्रैल के फुटबॉल खेल के १४वे मिनट पर योहन को सलामी देने के लिए खेल रुका। दर्शकों ने खड़े होकर खिलाड़ियों के सतह एक मिनट तक तालियां बजाकर अभिनन्दन किया। ऐसे ही ६८वे मिनट में उनके ६८ वर्ष के अभिवादन में खेल रका और उनके प्रेमियों समर्थकों ने खड़े होकर पुनः तालियाँ बजायी। दर्शक दीर्घा में सम्पूर्ण विश्व के आयक्स स्कूल के मिशाल बने हुए खिलाड़ी उपस्थित थे। आँखे नाम थी। कपोलों पर आंसू ठिठके हुए थे- जैसे देह के भीतर मन। और लगा- निश्छल व्यक्तित्व में ही विश्व व्यापी होने की शक्ति होती है।

२०१५-२०१६ आयक्स टीम के कप्तान डेविड कलासेन ने ३ अप्रैल को ३ गोल से फुटबॉल मैच जीतने के बाद प्रेस को साक्षात्कार देते हुए बताया-कि -”२०१३ में जब मुझे पाँव में गहरी चोट लगी हुई थी और योहन को पता चला तो वो मुझे अपने साथ स्पेन ले गये और वहां के योग्य चिकित्सकों से मेरा इलाज करवाया। वे अपने घर भी ले गए और डिनर करवाया। बताते हुए क्लासेन की आँखें भर भरा आयी थी और साँसे सिसक उठी थी फिर भी यह कहने से नहीं चुके कि यदि इस वर्ष आयक्स क्लब चैंपियन होता है तो यह शील्ड और उपलब्धि आयक्स टीम की ओर से उन्हें ही समर्पित रहेगी। योहन का खिलाडी पुत्र योर्डी क्राउफ़ रट रट बीच में कह उठता है- पापा, हम सब तुम्हे पागलों की तरह मिस करेंगे क्योंकि तुम मेरे ही नहीं फुटबॉल खेल और खिलाडियों के भी पिता हो।

व्यापक है कि योहन के निधन के बाद दूसरे दिन हुए जर्मन से दोस्ताना मैच में आयक्स एरिना में ही हार गयी थी और दूसरी और बार्सिलोना टीम भी अपने घर में. …….. मैडरीड टीम से हार चुकी थी सिर्फ आयक्स एरिना में आयक्स क्लब की टीम ही ३ गोयल से विजयी हुई जैसे वे ही योहन के असली उत्तराधिकारी संतान हो और उन्हें ही योहन क्राउफ़ की वास्तविक विरासत और लेगसी हासिल हुई है। आयक्स क्लब ने योहन को पाला पोसा और बड़ा किया और बड़े होने पर योहन ने आयक्स क्लब को विख्याति दिलायी। पैक ज्वालेह टीम के साथ खेलते हुए आयक्स खिलाड़ियों ने चमत्कृत कर देने वाले खेल का प्रदर्शन किया था जैसे योहन के यौवन ने उनमे अवतार ले लिया हो। खिलाड़ियों को लग रहा था- जैसे योहन आज भी अपनी सीट पर बैठ कर उनका मैच देख रहे हो। और यह खिलाड़ियों को हमेशा लगता रहेगा कि वे उनका खेल- जहाँ भी हैं वहा से देख रहे हैं क्योंकि वो अपनी आत्मा की शक्ति से खेलते थे और आत्मायें अपना चरित्र नहीं बदलती।


स्ट्राइकर योहन की फुटबॉल उपलब्धियाँ- फुटबॉल जगत की शिक्षा, हुनर,कला, कौशल, तकनीक का प्रतीक बनकर हमेशा मार्गनिर्देशन करती रहेगी। योहन ने अपने समर्पण से फुटबॉल को वैश्विक ध्वनि प्रदान की है और आज फुटबॉल की वही वैश्विक ध्वनि उन्हें वैश्विकता प्रदान कर रही है। स्ट्राइकर योहन को जो स्ट्राइक करता था वाही वे करते थे फिर चाहे वो फुटबॉल खेल हो या क्लब की व्यवस्था का दायित्व उनका मानना था की फुटबॉल क्लब के मैनेजमेंट में फुटबॉल खिलदियोब को ही मैनेजर के रूप में होना चाहिए जो उन्हें ठीक नहीं लगता था वह उनकी निगाह में नहीं ठहरता था। वो जितने खेल के धूनी और उसूलों के पक्के थे, उतने ही फुटबॉल क्लब के व्यवस्था के सन्दर्भ में भी।
उनके अंतिम समय में आयक्स क्लब ने उनसे विशेष बात चीत की जिसे आयक्स क्लब के द्वारा उनके समर्थकों और चहेतों को ईमेल पर भेजा गया और वेबसाइट पर भी लोड किया गया। जिसमे योहन ने बहुत ही खुलकर अपने बचपन की स्मृतियों को जीवन्तता से। ……. करते हुए बताए – मेरा घर पुराने आयक्स क्लब से १ किमी की भी काम दूरी पर था। मई ५ वर्ष की उम्र में वहां खेलने जाने लगा था या यूँ कहे सुबह होने के साथ ही मैं वहां खेल शुरू होने की बात जोहने लग जाया करता था। मेरे पिता की पास में ही फल और सब्जी की दुकान थी। लेकिन मेरे बचपन में ही उनका निधन हो गया था। बचपन में मेरे बीमार होने पर आयक्स क्लब के ‘रीनुस मिखल्स्’ मुझे इलाज के लिए चिकित्सक के पास ले जया करते थे। १० वर्ष की उम्र से ही मैं आयक्स क्लब का सदस्य हो गया था। इस तरह अमूमन योहन क्लब की संतान हो गए थे।

रह रह कर व्याकुल और संतप्त मन से अब सबको यही लगता है कि योहन यदि दो पैकेट अर्थात चालीस सिगरेट रोज़ नहीं पीते तो इस दारुण दिन का सामना फुटबॉल की दुनिया को नहीं करना पड़ता।

 

 

- प्रो पुष्पिता अवस्थी

जन्म : १४ जनवरी ,कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश में 

शिक्षा : जे. कृष्णमूर्ति फाउंडेशन, राजघाट, वाराणसी में शिक्षा ग्रहण की।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य और आलोचना मएं डाक्टरेट की डिग्री हासिल की। संस्कृत, अंग्रेज़ी और बाँग्ला भाषा के अतिरिक्त योग्यता है। आयुर्वेद और योग का विश्वविद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त किया है

सम्प्रति : वर्ष 2006 से नीदरलैंड स्थित हिंदी युनिवर्स फाउंडेशन की निदेशक हैं।
वंसत महिला महाविद्यालय, जे. कृष्णमूर्ति फाउंडेशन (काशी हिंदु विश्वविद्यालय से संबद्ध) राजघाट, वाराणसी, उत्तरप्रदेश में  १९८४  से २००१ तक हिंदी भाषा एवं साहित्य विभाग की अध्यक्ष रहीं। वर्ष २००१  से २००५  तक भारतीय सांस्कृतिक केंद्र और भारतीय दूतावास, पारामारिबो, सूरीनाम में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, विदेश मंत्रालय की ओर से हिंदी प्रोफेसर और प्रथम सचिव रहीं। वर्ष २००६ से नीदरलैंड स्थित हिंदी युनिवर्स फाउंडेशन की निदेशक हैं।

प्रकाशित कृतियाँ : 

विशेष पुस्तक परिचय कृतियाँ, व्यक्ति के चित्त और चेतन की वास्तविक प्रतिकृति होती हैं। सातवें हिंदी विश्व सम्मलेन के संयोजकत्व के दौरान सूरीनाम के हिन्दुस्तानियों का सृजनात्मक हिंदी साहित्य – कथा सूरीनाम कविता सूरीनाम, सूरीनाम पुस्तक के रूप में हिंदी भाषा में २००३ में पहली बार उजागर हुआ। जिसका सघन स्वरुप २०१२ में साहित्य अकादमी से ‘ सूरीनाम का सृजनात्मक साहित्य ‘ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। सूरीनाम के सांस्कृतिक इतिहास की दस्तावेनी पुस्तक का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट से २००९ में ‘ सूरीनाम ‘ शीर्षक से प्रकाशित हुआ तो नीदरलैंड देश पर केंद्रित पुस्तक २०१४ में आधारशिला से प्रकाशित हुई।

‘गोखरू’ शीर्षक से कथा संग्रह में भारतीय जीवन के संघर्ष की गाथाएं है तो ‘जन्म ‘ कहानी संग्रह में विदेशी जीवन के संघर्ष के अंर्तसूत्र हैं। ‘ छिन्नमूल ‘ उपन्न्यास में सूरीनाम और नीदरलैंड के अपनी संस्कृति से उच्छिन्न होने की पीड़ा अनुक्यूत है। ‘ प्रेम ‘ मानव जीवन का प्राण तत्व है फिर वह किसी भी मूल का हो। अक्षत , हृदय की हथेली, तुम हो मुझमें , रस गगन गुफा में अझर झरे, भोजपत्र , देववृक्ष काव्य संग्रह इसके उदाहरण है। मानव अधिकारों के प्रति सचेत पर्यावरण और प्रकृति की पहरुझा पुष्पिता की कविताओं के ईश्वराशीष, शब्दों में रहती है वह, अंर्तध्वनी, गर्भ की उतरन जैसे मार्मिक और संवेदनशील काव्य संग्रह हैं।
भारतवंशी भाषा एवं संस्कृति ‘ विश्व के भारतवंशियों की ‘किताबघर’ से प्रकाशित (२०१५) दस्तावेजी एतिहासिक हिंदी भाषा में प्रथम पुस्तक है तो हिंदी साहित्य में काव्यालोचना के सौ वर्ष का शिखर शोध २००५ से राधा कृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित है जिसके कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं।

अन्य प्रकाशित कृतियाँ : शब्द बन कर रहती हैं ऋतुएँ, कथ्यरूप प्रकाशन, इलाहाबाद ,ईश्वराशीष, हृदय की हथेली (काव्य संग्रह), राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली ,दोस्ती की चाह- जीत नराइन (अनुवाद), कैरीबियाई देशों में हिंदी शिक्षा का इतिहास (शोध पुस्तक), दिल्ली एवं सांस्कृतिक आलोक से संवाद, भारतीय ज्ञानपीठ, दिल्ली से प्रकाशित आदि।

 

संपादन : सह-संपादक – परिसंवाद, विश्व दार्शनिक जे. कृष्णमूर्ति की वार्ता आधारित त्रैमासिक पत्रिका, राजघाट वाराणसी उत्तरप्रदेश

संस्थापक संपादक, हिंदीनामा त्रैमासिक और त्रिभाषी पत्रिका, पारामारिबो, शब्द शक्ति पत्रिका

दूरदर्शन वृत्त
चित्र निर्माण : कैरीबियाई देशों, सूरीनाम की प्रकृति और संस्कृति पर दो-दो घंटे की छह फिल्में।
विश्व हिंदी कार्यकर्ताओं पर वृत चित्र-सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन प्रदर्शित
कथाकार शिवप्रसाद सिंह और श्रीलाल शुक्ल के कृतित्व और वयक्तित्व पर दूरदर्शन के लिए विशेष फिल्म

सम्मान : 

अंतरराष्ट्रीय अज्ञेय साहित्य सम्मान, २००२ रूपाम्बरा भारत
कैरीबियाई हिंदी सेवा सम्मान, २००४ गयाना
राष्ट्रीय़ हिंदी सेवा सम्मान, २००३ सूरीनाम
डॉ. एल. एम. सिंघवी अंतर्राष्ट्रीय कविता सम्मान, २००४ , लंदन
सूरीनाम हिंदी सेवा सम्मान, २००५ , सूरीनाम हिंदी परिषद
राष्ट्रीय हिंदी सेवा पुरस्कार , २००५ , आर्य प्रान्तिक सभा , सूरीनाम
रूपाम्बरा, भारत राष्ट्रीय साहित्य सम्मान, २००७ भारत
शमशेर सम्मान , २००८ , भारत
किरण महिला उपलब्धि पुरस्कार ,२०१३
कविता के लिए ,वातायन सम्मान , २०१३ , लंदन

संयोजन : सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन, पारामारिबो, २००३

संबद्धता : संस्थापक अध्यक्ष – कैरीबियाई हिंदी संस्थान, पारामारिबो
संस्थापक अध्यक्ष – साहित्य मित्र संस्थान, सूरीनाम
संस्थापक निदेशक – राष्ट्रीय हिंदी एकेडेमी , नीदरलैंड, यूरोप के लिए विशेष सलाहकार – हिंदी प्रचार संस्था (एचपीएसएन) नीदरलैंड्स, यूरोप, अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, रूस, भारत और कैरीबियाइ देशों की पत्रिकाओं और संस्थाओं में मानद सदस्य।

 संपर्क: अलकमार , नीदरलैंड्स 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>