सुयश की बदली आदत

सुयश एक प्यारा लड़का था,रोज स्कूल जाता था और ध्यान लगा कर पढ़ता था लेकिन उसकी एक ही बुरी आदत थी, वह झूठ बहुत बोलता था. इस आदत से उसके माँ-पापा और दोस्त परेशान रहते थे. उसे हमेशा समझाते थे कि इस आदत के कारण किसी दिन तुम बहुत मुसीबत में पड़ जाओगे लेकिन सुयश इस सलाह पर कभी ध्यान नहीं देता था और कहता ‘अभी तक कुछ नहीं हुआ है तो आगे भी नहीं होगा.’

एक दिन सुयश के दोस्त मनु ने कहा “मैं तैराकी सीखने जाता हूं, तुम भी चलो वहाँ बहुत मजा आता है.” सुयश ने आदत के मुताबिक तुरंत झूठ बोला “मनु मुझे तो तैराकी आती है और मैंने तो तैराकी की कई प्रतियोगितायें जीती है.”

कुछ दिनों बाद सुयश नए साल में अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने हलाली डेम गया. डेम में पहले से ही चहल पहल थी, इतवार होने के कारण लोग अपने परिवार के साथ वहाँ आये हुए थे. डेम के चारों तरफ पार्क था जिसमें फिसलपट्टी,सीसा झूला लगे थे. डेम के केयर टेकर ने इन बच्चों को अकेले आते हुए देखा तो कहा “बच्चों तुम लोगों के परिवार से कोई बड़ा व्यक्ति नही आया है.” “नहीं अंकल ”. “तुम लोग पार्क में ही खेलना पानी की तरफ मत जाना, डेम बहुत गहरा है डूबने का खतरा है”. ये चेतावनी देकर केयर टेकर चला गया. पार्क में सब ने बहुत मजे किये. सुयश के दोस्त पंकज ने लोगों को पानी के पास जाते देख कर कहा “देखो सभी लोग तो पानी के पास जा रहे हैं, चलो न हम भी चलते हैं.” सभी बच्चे पानी के पास चले गए. वहाँ एक नाव रखी थी, सभी बच्चे उस पर चढ़ कर खेलने लगे. तभी नाव जिस रस्सी से बंधा था वो खुल जाता है और नाव तेजी से पानी की तरफ बहने लगती है. बच्चे घबरा गए और जोर जोर से बचाओ-बचाओ चिल्लाने लगे. तब मनु सुयश से कहता है “तुम तो तैराकी के चैम्पियन हो, जल्दी से तैर कर किनारे जाओ और लोगों से मदद लेकर हमें बचाओ.” तब सुयश घबरा जाता है और उसके आंख से आंसू बहने लगते हैं. वो मनु से कहता है  “मुझे माफ़ कर दो दोस्त, मुझे तो तैरना नहीं आता है, उस दिन मैंने तुमसे झूठ बोला था. मैं कान पकड़ता हूँ कि आगे से कभी झूठ नहीं बोलुगां.” तभी नाव डगमगाने लगती है, डर के मारे बच्चे रोने लगते हैं और किनारे पर खड़े लोगों को जोर से आवाज देने लगते हैं.

किनारे पर खड़े लोगों ने बच्चों को चिल्लाते और नाव को डगमगाते देखा, 3-4 लोग तुरंत उन्हें बचाने पानी में कूद पड़ते हैं और नाव की रस्सी को खीचते हुए उसे किनारे ले आते हैं. सभी बच्चे सदमे में होते हैं. तब तक डेम के केयर टेकर भी आ जाते हैं. वो कहते हैं “मैंने तुम लोगों पानी के पास जाने को मना किया था.” बच्चों ने केयर टेकर से माफ़ी मांगी. सुयश को भी झूठ बोलने का सबक मिल गया था.

 

- उपासना बेहार

लेखिका के बारे में - लेखिका सामाजिक कार्यकर्त्ता हैं जो बच्चों के लिए बाल कहानिया और समसामयिक मुद्दों पर लेखन का काम करती हैं. इनकी अभी तक लगभग ३० बाल कहानियाँ विभिन्न पेपर,पत्रिका,वेब पत्रिका,ब्लॉग में प्रकाशित हो चुकी हैं.

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