सिंहस्थ-२०१६ : एक वैश्विक आयोजन की मेजबानी

बारह वर्षों के बाद उज्जैन में एक बार फिर सिंहस्थ महापर्व आने वाला है| आस्था और विश्वास के प्रतीक इस महापर्व में कोई ५ करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है| इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधों और अन्य व्यवस्थाओं के लिए आधुनिकतम साधनों और सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। वाकई में यह काम शासन – प्रशासन के लिए चुनौती है। इस वैश्विक आयोजन के पहले ही उज्जैन स्मार्ट सिटी के रूप में तैयार हो जाएगा। कोशिश है कि उज्जैन आने वाले किसी भी श्रद्धालु को कोई कष्ट न हो और किसी चीज की कमी न रहे। आगामी २२ अप्रैल २०१६ से एक माह तक चलने वाले इस महापर्व के लिए शासन-प्रशासन की सभी स्तरों पर तैयारियाँ ज़ोरों से जारी है|

एक ओर जहाँ यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिंहस्थ महापर्व के सभी स्नान और अन्य गतिविधियाँ मान्य परम्पराओं, मूल्यों, विधि-विधान और साधु-संतों की प्रचलित मान्यताओं और भावनाओं के अनुरूप हो, वहीँ सिंहस्थ में आधुनिकतम तकनीकों का प्रयोग कर श्रद्धालुओं को यह आश्वस्त किया गया है कि वे बेहिचक पधारें – महाकाल के दर्शन करें और क्षिप्रा में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करें। जाते-जाते वे सिंहस्थ और मध्यप्रदेश की अच्छी यादें संजोकर ले जाएँ।

सिंहस्थ-२०१६ के आयोजन में आईटी की महती भूमिका रहेगी। सम्पूर्ण सिंहस्थ क्षेत्र वाई-फाई होगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र में आते ही श्रद्धालुओं के मोबाइल पर वेलकम मैसेज मिलेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सिंहस्थ का एक विशेष मोबाइल एप भी तैयार कराया जा रहा है। इससे यात्रियों को सिंहस्थ क्षेत्र के प्रमुख पड़ावों, मंदिरों व होटलों तक पहुंचने में आसानी होगी। इस एप में सम्पूर्ण मेला क्षेत्र की प्रतिदिन, प्रति सप्ताह व पूरे माह की गतिविधियाँ भी दर्शाई जाएगी, जिससे श्रद्धालु अपने वांछित स्थान पर जाकर प्रवचनों व अन्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। मोबाइल एप में सिंहस्थ पर्व स्नानों, अखाड़ों और दर्शनीय स्थलों की जानकारी के साथ ही उनके नक्शे आदि भी रहेंगे|

जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआइएस) तकनीक के माध्यम से स्मार्ट सिंहस्थ की प्लानिंग की जा रही है| कहाँ से रोड निकलेंगे, कहाँ ड्रेनेज होगा, कहाँ से पीने के पानी की पाइप लाइन गुजरेगी व इलेक्ट्रिक लाइन कहाँ रहेगी, यह सब मल्टीलेयर में मेप पर उपलब्ध रहेगा| जीआइएस मेप में एक क्लिक पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि पार्किंग स्लॉट झोन में किस स्थान पर है, फ्लैग स्टेशनों पर क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं| इसी तरह ट्रैफिक प्लान, होल्डअप, घाट होल्डअप, एप्रोच रोड, पेशवाई मार्ग,बिजली सप्लाई, ड्रेनेज, हेल्प काउंटर्स, एटीएम, वाटर सप्लाई आदि के बारे में भी जानकारी तुरंत झोन और सेक्टरवार स्क्रीन पर आ जाएगी। यही नहीं, सर्विस प्रोवाइडरों और कांट्रेक्टरों, प्रभारी शासकीय अधिकारी-कर्मचारी आदि के मोबाइल नंबर भी नक्शे के साथ-साथ अटैच किये जाएँगे, जिससे जिस सेक्टर में भी किसी भी सेवा की कमी पाई जाती है तो तुरंत उसका निदान किया जा सकेगा।

अनुमान है कि प्रमुख शाही स्नानों के दिन 1 करोड़ और सिंहस्थ के दौरान २० लाख लोग स्थायी रूप से रहेंगे। इनमें अनेक अनिवासी भारतीय और विदेशी भी होंगे। अनिवासी भारतीयों के लिए सिंहस्थ में आना आसान माना जा सकता है, क्योंकि भारत में उनकी जड़ें होती है और उनमें से अधिकतर को भाषा संबंधी कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन विदेशी श्रद्धालुओं को भाषाई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सिंहस्थ के मौके पर दुभाषियों की व्यवस्था करने की योजना है।

 

सिंहस्थ का पोर्टल भी बनाया जा रहा है| यह पोर्टल डेस्कटॉप, लेपटॉप एवँ मोबाइल पर भी चलेगा| इस पोर्टल के माध्यम से सिंहस्थ में तैनात किए जाने वाले लगभग एक लाख कर्मचारियों का मैनेजमेंट किया जाएगा| पोर्टल में किस सेक्टर में कौन व्यक्ति कार्यरत है व उसके दायित्व क्या है आदि जानकारी प्रबंध करने वाले अधिकारियों को एक क्लिक पर उपलब्ध होगी| पोर्टल के माध्यम से कार्यरत अधिकारियों को दिशा-निर्देश, आदेश आदि प्रसारित किए जाते रहेंगे और रिपोर्टिंग की मॉनिटरिंग भी होती रहेगी|

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर तीसरी आँख की नज़र रहेगी| मेला क्षेत्र में १२५ पॉइंट पर कुल ४८१ सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएँगे जो रात-दिन सिंहस्थ क्षेत्र की गतिविधियों पर नज़र रखेंगे| घाटों पर स्नान के दौरान 11 स्थानों पर विशेष निगरानी हेतु कैमरे लगाए जा रहे हैं| सीसीटीवी कैमरों से जहाँ एक ओर सड़कों से आ रहे ट्रैफिक पर नज़र रहेगी वहीँ सेटेलाइट टाउनों में कितने वाहन व भीड़ इकट्ठी हो रही है, इसकी पल-पल की जानकारी भी कंट्रोल रूम को प्राप्त होगी। मेला क्षेत्र के ११ प्रवेश-द्वारों से सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की गणना भी की जा सकेगी।

सिंहस्थ के दौरान विद्युत् वितरण कंपनी सिंहस्थ क्षेत्र में लगने वाले अखाड़ों एवँ आश्रमों को विद्युत कनेक्शन देने के साथ ऐसे उपकरण लगाएगी, जिससे क्षमता से अधिक बिजली ड्रा करने पर ऑटोमेटिक बिजली कनेक्शन ट्रिप हो जाए| इससे ओवर लोडिंग, शॉर्ट सर्किट आदि की समस्या से सुरक्षा मिलेगी| सिंहस्थ मेला क्षेत्र में अस्थायी रूप से २ हजार विद्युत् पोल लगाए जाएँगे एवँ मेला क्षेत्र में खुली केबल के स्थान पर एलटी केबल का उपयोग किया जाएगा|

 

सिंहस्थ २०१६ का मेला क्षेत्र गत सिंहस्थ की तुलना में व्यापक होगा। इस बार सिंहस्थ के लिए ३ हजार ४१३ हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई है जो पिछले सिंहस्थ की तुलना में एक हजार २५९ हेक्टेयर अधिक है| इसमें से उज्जैन कस्बा एवँ आसपास के ग्रामों के पटवारी हलकों की कुल ३०६१ हेक्टेयर ज़मीन पड़ाव क्षेत्र और ३५२ हेक्टेयर सेटेलाइट टाउन के लिए अधिसूचित की गई है| मेला क्षेत्र एवँ शहर को कुल छह झोन एवँ २२ सेक्टर में विभक्त किया गया है| प्रत्येक सेक्टर में सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी|

सिंहस्थ-२०१६ के लिए राज्य सरकार ने खजाने के द्वार खोल दिए हैं। जहाँ इस सिंहस्थ में कोई ढाई हजार करोड़ रुपए के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए वहीँ सिंहस्थ-२०१६ में मात्र २६२ करोड़ के| पिछली बार स्थायी प्रकृति के गिने चुने काम हुए थे, वहीँ इस बार अनेक काम ऐसे ही हो रहे हैं जो नगर की दिशा और दशा बदल देंगे| कस्बानुमा उज्जैन शहर अब महानगर की तर्ज पर विकसित हो रहा है| जो लोग लम्बे समय बाद उज्जैन को देखेंगे, वे इसके परिवर्तित रूप से चकित हो जाएँगे|

आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु उज्जैन में प्रमुख मंदिरों का जीर्णोद्धार व कायाकल्प किया जा रहा है| इन मंदिरों के परिसरों को आकर्षक और सुंदर बनाकर श्रद्धालुओं के लिए नई सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं| पंचक्रोशी मार्ग का उन्नयन भी किया जा रहा है। इसके लिए ६३ करोड़ ६० लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं|

सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में आईटी बेस्ड हेल्प सेंटर खोले जाएँगे| इस सेंटर से आमजन को उसकी जरूरत की सूचनाएँ प्राप्त होंगी| इस हेल्प सेंटर से पानी, बिजली, दूध आदि की आपूर्ति के सम्बन्ध में शिकायतें भी दर्ज होंगी और उनका निराकरण भी त्वरित किया जाएगा|
मेले में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का दुर्घटना बीमा कराया जाएगा| यह बीमा २ लाख रुपए का होगा| इसी तरह मेला क्षेत्र में सेवा देने वाले शासकीय कर्मियों का ५ लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कराया जाएगा| उज्जैन शहर के स्थायी निवासियों को भी दुर्घटना बीमा के कवरेज में शामिल किया गया है| दुर्घटना बीमा की समयावधि ८ अप्रैल से ६ जून २०१६ तक रहेगी|

 

विभिन्न निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने एवँ आम आदमी को इसकी जानकारी देने के लिए सभी निर्माण कार्यों के स्थलों पर सूचना-पटल लगाकर निर्माण कार्यों की स्वीकृति, पूर्ण होने की तिथि, लागत, एजेंसी का नाम आदि का डिस्प्ले अनिवार्य किया गया है| इसी के साथ सेल्फ डिस्क्लोजर करते हुए सभी विभाग निर्माण कार्यों के होने वाले प्रत्येक भुगतान की जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं| निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के लिए थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की व्यवस्था भी की गई है| साथ ही सभी निर्माण कार्यों का परीक्षण प्रदेश के मुख्य तकनीकी परीक्षक द्वारा किया जा रहा है| पर्यावरण, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण, धार्मिक एकता, पारस्परिक सौहार्द बढ़ाने और समसामयिक वैश्विक सरोकारों से जोड़ने की कोशिश भी इस सिंहस्थ में की जा रही है। कोशिश है कि सिंहस्थ २०१६ पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का संदेश देने वाला मंच बने।

इस प्रकार इस वैश्विक आयोजन की मेजबानी के लिए उज्जैन तैयार हो रहा है| इसमें मध्यप्रदेश शासन के साथ ही स्थानीय निवासियों की भागीदारी भी निश्चित तौर पर रहेगी|

 

 - सुरेश तिवारी 

मीडिया सलाहकार , सिंहस्थ २०१६,
सेवानिवृत डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन ,
मध्य प्रदेश सरकार

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