सारा जग जीत गईली मित रे घरवे में हार होगईल

इहा कऊनो एल्बम के गाना नइखे लिखल जात,इ एगो साच कथन मनोज तिवारी जी के एल्बम से लिहल गईल बा.

भोजपुरी जवन पूरा दुनिया में आपन अस्तित्व के ताल ठोक रहल बा, उहे भोजपुरी के जनम स्थान में हार होगईल बा .जहा भोजपुरी के बिदेश में मॉरिशस के राष्ट्रीय भासा बना दिहल गईल उहे आज आपन जनम स्थान में उपेक्षा हो रहल बा. ८वि अनुशुची में शामिल करे खाती कई साल से कोशिस कईल जाता .बाकिर राजनिति के दावपेच में अझुरा गईल बा. अब हमनी के उ प्रदेश के बतकही कईल जाई जहा के मूल भासा ह भोजपुरी.

झारखण्ड ,यूपी ,बिहार माने भोजपुरी भासा भासी परदेस , एहा भोजपुरी आ भोजपुरी से सम्बंधित भासा उपयोग होला,भोजपुरी सबके एक साथे मिला के चलेला .हमनी के अक्सर न्यूज़ में सुनी ले जे सबसे पिछड़ा अऊर अशिक्षित राज्य में भोजपुरी प्रदेश के नाव आवेला , राजस्थान एमपी छतीसगढ़ उतराखंड जइसन प्रदेश येही सूचि में बा.

सबसे बड बात इ बाकि एह के लोग आपन मईभासा के महत्व न देला लो, एहा के लोग हिंदी के मातृभासा के दर्जा देला लो.बाकिर हिंदी कऊनो क्षेत्र के भासा ना ह इ पूरा देस के भासा ह, एही पर पूरा देस के बराबर के हक बा.

भोजपुरी भास भासी परदेस में लो भोजपुरी के बुर्बक के भासा बुझेला लो आ कहे ला लोग की ८वि अनुसूची में  एकरा के नइखे शामिल कईल गईल .एही पर लोग गवार वाला काम कर जला लो,हम पूछा तानी रऊआ लोग से की आपन माई के माई कहे खातिर सरकार से पूछे के पड़ी. भासा हमनी के माई हा आ हमनी के एकरा के छाती तान के लिखे पढ़े आ बोले बतिआवे के चाही.पढ़ल लिखल हो चाहे अनपढ़ जादा तर लोग भोजपुरी बोले पढ़े में कतराला.

झारखण्ड,यूपी,बिहार एतना बड आबादी वाला परदेस बा एकरा बावजूदो एहा के राजनितज्ञ आ नेता लो भोजपुरी के आगे बढ़ावे के बारे में ना सोचे ला लोग. आपने देस के दोसर परदेस से सीखे के चाही की बंगाली, पंजाबी,गुजरती मराठी चाहे द्रविड़ भासा के लोग आपन भासा के पाहिले महत्व देला लोग बाद में हिंदी आ इंग्लिस के. तबे त एहा के लोग शिक्षित आ बिकास के राह पर बा लो. भोजपुरी, हिंदी बंगाली जइसन आधुनिक भासा से भी पुरान भासा हा. एगो वेबसाइट के मध्यम से जानकारी मिलल की भोजपुरी के छोट बहिन मगही से ही बंगाली के अस्तित्व बनल बा. येही से त भोजपुरी ,मगही,मैथली आ बंगाली के शब्द मिलत जुलत लागे ला. महिला समाज के आउरो जागे के पड़ी कहे से की महिला से आपन समाज पूरा होला, माई आपन बच्चा के गोदी से जवन सिखाई उहे बच्चा सिखी , अगर माई जगरूप होई तबे बच्चा जगरूप होई अऊर तबे समाज जगरूप होई. मिला जुला के इहे बात सामने आवता की

हमनी के आपन भासा अऊर अस्तित्व के बचावे के पड़ी, तबे के खुद पहचान बनी. पुरान में भिखारी ठाकुर आ महेंद्र मिसिर जइसन लोग भोजपुरी के बारे में सोचले त आज के दिन में मनोज तिवारी आ भरत शर्मा जइसन लोग भोजपुरी के नया मजबूती वाला खामा  देबे में लागल बालो.सायद इ कहल बऊर न होई की हमनी के भोजपुरी के लिपी जवन १९०० इसवी सुरु होखे से पाहिले ओरा गईल रहे , ओकरा के फेर से उजागर करे के पड़ी. आज काल के नया नया लईका लईकी भोजपुरी बोले बतिआवे में लाज़ाला लो आ इ सबसे जादे यूपी,एमपी,बिहार,राजस्थान,हरियाणा,झारखण्ड,उतराखंड,छतीसगढ़ जईसन राज्य के लोग आपन मईभासा चाहे उ कऊनो भासा हो (अपवाद हिंदी ) लिखे बोले में संकोच करेला लो. हिंदी आ उर्दू जात आ धर्म के नाव प बता सकेला  बाकिर  कऊनो प्रदेश के मईभासा जात धर्म के नाव प ना बटाला. हिंदी आ उर्दू कऊनो जात धर्म के लोग क मातृभासा नइखे हो सकत , भारत देस में हिंदी हिन्दू खातिर आ उर्दू मुस्लिम खातिर देस के धरोहर बनल बा. चाहे उ कौनो राज्य के हिन्दू आ मुस्लमान होखस उ हिंदी आ उर्दू के सम्मान करिहे . बाकिर मातृभासा ये सब से ऊपर होला  ,मूल महारास्ट्र के हिन्दू होखस चाहे मुस्लमान उनकर मातृभासा मराठी ही होई इ सबसे बड साच बा. मईभासा अइसन भासा होला जवन जात धर्र्म के नाव प् न बाते ला इ सबके एक सघे लेके चले ला. भोजपुरी भासा परिवार एक सघे कईगो राज्य के आपना भीतर समईले बा. १८० बारिस पाहिले जब भोजपुरी भासी परदेस के लोग (गरीब बर्ग) बहकावा में आके बिदेस में गईल लो , उहा उ मजदूरी करेलागल लो आज उहे लो भोजपुरी अस्तित्व के दुनिया के २०गो से जादे देस में फईला रहल बा लो. सबसे अहम् बात की उहे लोग के चलते कई गो देस में भोजपुरी के उपभासा बा, एह के लोग आपन भोजपुरी के सान से उपयोग करेले , बाकि जहा से जनमल बा भोजपुरी उहे देस आ राज्य में पाछे के रोटी खाता.

- प्रिंस रितुराज

ये रचनाकार के रूप में अपना हुनर दिखाना चाहते हैं।
दिल्ली से छपने वाली भोजपुरी/हिंदी पत्रिकाओं में इनकी रचना प्रकाशित होती रहती है।
वर्तमान में ये भारत में हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>