समाधान

हर तरफ से बस यही शोर उठ रहा था- ” क्या हो गया है इस शहर को ?”
“पहले जाति- धर्म के नाम पर लोगों का बँटवारा, फिर उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय में फूट डालकर  वोट बटोरने की साजिश, फिर आतंकवादी हमला, फिर…..।”
भीड़ भरी इस गली में एक महिला को इस तरह बड़बड़ाती देखकर दूसरी महिला ने आतुरता से पूछा-
” आखिर आपको हो क्या गया है? इस शहर पर आप इतना झुंझला क्यों रही हैं?”
महिला आक्रोश भरे स्वर में बोली- “आप पूछ रही हैं,। हो क्या गया है ? अरे ! जिसके पड़ोस की एकमात्र संतान को जानवर उठा ले जाये उसे कुछ होगा नहीं ? वह यूँ ही चुपचाप बैठी रहे। आज पड़ोस में यह हादसा हुआ है, कल हमारे घर में भी तो हो सकता है।”

अपने घर का नाम होठों पर आते ही वह काँप गई, पर अपने आप को संभालकर बोली -
“आज तक क्या इतनी आश्चर्यजनक बात हुई है भला कि इतने बड़े व शोर-शराबे वाले शहर से एक बच्चे को जंगल में छुपकर रहनेवाला अदना-सा तेंदुआ उठा ले जाये। हाँ गांव में ज़रूर सुना था कि गरमियों में घर से बाहर सोनेवालों को जानवर उठा ले जाया करते थे। लोग कहते ज़रूर थे कि जानवर उठा ले गया लेकिन कानाफूसी भी की जाती थी कि यह किसी दुश्मन की ही करतूत है, क्योंकि जानवर को किसी ने गाँव में घुसते कभी नहीं देखा था।” और वह उखड़ी उखड़ी साँसें लेने लगी।
दूसरी महिला बोली-” तो हो सकता है यहाँ भी  जंगली पशु के नाम पर किसी ने रंजिश निकाली हो ?”
” हो क्यों नहीं सकता? बच्चे की माँ का शुबहा तो दो घरों को छोड़कर तीसरे घर पर गया भी था। दो दिन पहले ही दोनों परिवारों के बच्चों के बीच लड़ाई हुई थी, जो बाद में बड़ों की बन गई थी। बस दोनों घरों में आज कपार-फुटौवल होने ही वाली थी कि किसी ने सी सी टीवी चेक कर लिया।”
दूसरी महिला ने असमंजस भरे स्वर में पूछा-
” यह सीसी टीवी क्या होता है?”
पहली महिला ने समझाते हुए कहा-” इसमें सब कुछ पता चल जाता है कि कौन, कब, क्यों और कितने बजे आया था। अरे इसे तो चोर उचक्कों को पकड़ने के लिए फिट किया गया था, पर किसे पता था कि ये जंगली जानवर जो खूंखार कहे तो जाते हैं मगर सर्कसों में मनुष्य के इशारों पर नाचते हैं, उसी मनुष्य पर हमला करना शुरू कर देंगे। सीसी टीवी का नज़ारा देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।”
दूसरी महिला ने सिर पीटते हुए कहा-
” हे भगवान! अब तू ही बचा सकता है मनुष्य जाति को। आखिर वह किस-किससे बचता फिरे !”
पहली- ” इस मोहल्ले के लोग बौखलाए हुए हैं। उन्होंने पुलिस चौकी का घेराव किया तो किसी ने कहा, पुलिस इसमें कसूरवार नहीं है। बिल्डर को पकड़ो। बिल्डर के पास जब लोग पहुंचे तो वह गायब था। पता चला कि नेता जी की शरण में गया है। किसी ने राय दी कि इस समस्या का समाधान सिर्फ नेता जी ही कर सकते हैं क्योंकि बिल्डर नामक समस्या वहीं चिपकी हुई है। नेता जी के घर का घेराव किया गया, जब वह बाहर नहीं निकले तो उनके कांच के दरवाज़े , खिड़कियों को तोड़ा जाने लगा। बेचारे नेता जी त्राहिमाम- त्राहिमाम का शोर मचाते हुए बाहर निकले। अब बस थोड़ी देर में यहाँ पधारने ही वाले हैं।”

तभी लाल बत्ती की पीपी- पोंपों सुनकर दोनों महिलाएं चुप हो गई।
नेता जी सफ़ेद जगमगाते कपड़े में अपनी सफ़ेद चमचमाती कार से  नीचे उतरे। बिल्डर महोदय उनका पदानुगमन कर रहे थे। नेता जी दोनों हाथ जोड़कर आगे बढे मानो वोट माँगने आये हों।

उन्होंने विनम्र स्वर में कहना शुरू किया-
” प्यारे भाइयों और बहनो! आज की इस घटना से मैं ही नहीं बल्कि मेरी आत्मा तक लहू-लुहान है। उस माँ पर क्या बीत रही होगी जिसका लाल जानवर का निवाला बन गया। मैं शर्मिंदा हूँ जानवर की इस हरकत पर। मनुष्य होता तो उसे सज़ा दी जाती, काल कोठरी में रखा जाता, डंडे से खाल उधेड़ ली जाती। मगर जानवर के साथ क्या किया जाये ? ऐसा आप लोग सोच रहे होंगे।  किन्तु मैंने सोच लिया है। यह समस्या क्यों उत्पन्न हुई ? और इसका समाधान क्या है ? तो मेरे प्यारे वोटरों ! आप सब मुझे बहुत अज़ीज़, बहुत प्यारे हैं। मैं इस समस्या की जड़ तक पहुँच गया हूँ व हल भी ढूंढकर लाया हूँ। इस समस्या का मुख्य कारण यह है कि यहाँ पर जंगल है और इसका एकमात्र समाधान यह है कि जंगल को काटकर यहाँ बिल्डिंगों का निर्माण कर दिया जाये। फिर जंगली जानवर अपने आप ही यहाँ से गायब हो जायेंगे।”
नेता जी के साथ आये सदस्यों ने तालियों से उनकी बात का अनुमोदन किया और बिल्डर महोदय उनके चरणों में गिर पड़े।

“नेता जी की जय” से गली का कोना- कोना गूँज उठा।

- डॉ. प्रमिला शर्मा

2 thoughts on “समाधान

  1. बहुत धारदार व्यंग्य । लेख का अंत तो नेताओं बिल्डरों की साजिश का पर्दाफाश करता है।
    लेखिका डॉ प्रमिला शर्मा और संपादक अमित सिंह दोनों बधाई के पात्र हैं !

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