संगीता बहादुर की उपन्यास ‘विकराल’ का विमोचन

 

6 जून 2015, वातायन कविता संस्था और सोएज़-लंदन विश्वविद्यालय के तत्वाधान में, संगीता बहादुर की पुस्तक काल त्रयी द्वितीय, ‘विकराल’ (मैकमिलन, 2015) का विमोचन किया गया जिसमें शाहीना खान, ने पुस्तक समीक्षा, सीमा आनंद के साथ लेखिका, की बातचीत, लेखक तेजेन्द्र शर्मा और संगीता बहादुर द्वारा कुछ दृश्यों का नाटकीय पाठ एवं कुचीपुडी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार द्वारा अभिनय प्रदर्शन किया गया.

 

वैदिक युग के बाद के भारत की याद ताज़ा करता हुआ उपन्यास, विकराल,  एक काल्पनिक ब्रह्मांड में  स्थापित किया गया है, जिसका मुख्य नायक अरिहंत एक सुपर-हीरो है जो सुपर शक्तियों के साथ ही कुछ प्यारे मानवीय गुणों से भी युक्त है. उसका मुख्य काम माया देव युशिज को ख़त्म करना है, जिसकी अपनी समस्या यह है कि उसे सदियों पहले अपने ही भाई-बहनों द्वारा सपनों की जेल में कैद कर दिया गया है.  पुस्तक का मूल विषय स्वयं की खोज है कि मैं कौन हूँ, मैं क्या रहा हूँ और मैं क्यों कर रहा हूँ. संगीता स्वयं को खोजने के लिए इस खोज के अपने संस्करण देतीं हैं.

 

एशियो-यूरोपीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान सोसायटी (ACES) के अध्यक्ष, मुहम्मद अहमद, द्वारा एक संक्षिप्त स्वागत-भाषण के बाद, कार्यक्रम की बागडोर वातायन की संस्थापक अध्यक्ष दिव्या माथुर ने संभाली।

 

कार्यक्रम डॉ निखिल कौशिक, कवि, रेडियो-प्रस्तोता और पेशे से एक नेत्र सर्जन द्वारा एक ग़ज़ल ‘हम आपके ही कहलाते हैं’ के सस्वर पाठ के साथ शुरू हुआ। तत्पश्चात अंतरराष्ट्रीय शिक्षाविद् और सांस्कृतिक विशेषज्ञ के रूप में जाने जानी वाली और श्रुति फाउंडेशन और भारतीय कल्याण परिषद की संस्थापक, अध्यक्ष, ज्ञान प्रणालियों और कल्याण विज्ञान की वैश्विक प्रतिपादक, सुश्री श्रुति नादा पोद्दार, को संगीता बहादुर की पुस्तक विकराल का विमोचन करने के लिए आमंत्रित किया गया.

 

इसके बाद संगीता बहादुर के साथ एक बहुत ही रोचक और मनोरंजक बातचीत में एक भावुक और प्रेरणादायक किस्सागो, सीमा आनंद ने कुछ मार्मिक सवाल पूछे।  उपन्यास की दिलचस्प घटनाओं को संगीता बहादुर के साथ कथा यूके के महासचिव तेजिंदर शर्मा द्वारा नाटकीय पाठ  के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. तेजेन्द्र शर्मा एक पुरस्कृत एवं स्थापित कथाकार हैं जिन्होंने मशहूर टीवी धारावाहिक ‘शांति’ के एपिसोड लिखे हैं और टीवी धारावाहिकों में अभिनय भी किया है. पुस्तक समीक्षा, लंदन का दौरा कर रही शाहीना खान द्वारा प्रस्तुत की गई, जो एक जानी-मानी कवियत्री हैं, संचार और मीडिया की प्रोफेसर एवं PSRS एकेडेमी की संस्थापक अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा कि यह किताब आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी हुई है, इसके लिए पूरी तरह से तल्लीन होने वाले पाठक की आवश्यकता है.

अगला आकर्षण अपनी पीढ़ी की प्रमुख कुचिपुडी नर्तकों और कोरियोग्राफरों में से एक अरुणिमा कुमार  द्वारा ‘विकराल’ पर आधारित अभिनय-नृत्य था, जो उन्होंने लेखिका के साथ प्रस्तुत किया.

अतिथियों में प्रख्यात लेखक, विद्वान, मीडियाकर्मी, कवि और कलाकार बड़ी संख्या शामिल थे.

 

 

- वातायन-लन्दन
दिव्या माथुर

 

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