शुभ-मंगल नया साल हो…!

हर दिन-पलछिन, साल सुनो,
जाते-जाते कुछ कहता है,
रेत के मानिंद मुठ्टी से,
ये हर दम रिसता रहता है,
जी लो जी भरकर इसको,
फिर ना कोई मलाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो…

लंबे-लंबे हैं रास्ते,
पुकारें हमें उल्लासते,
 जीवन पतंग चले उड़ती,
 बाँधे ड़ोरी उमंगों की,
कँटीली राहों पर चलते,
थक ना जाना निढ़ाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो

सीमाओं पर पहरे हैं,
दुश्मन हमको घेरे हैं,
वीरों के बलिदानों से ही,
सजते ये जीवन- मेले हैं,
रहे सदैव उन्नत-गर्वीला,
भारत माँ का भाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो,

शौर्य -एकता शक्ति से,
अतुलित देशभक्ति से,
कर जाएँ विफल सभी,
साजिशें गद्दारों की,
और शत्रु की हर चाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो,

ज्ञान प्रकाश फैले चहुँ ओर,
खुशहाली बनी रहे सब ठौर,
तोड़ कुप्रथा लिंग-भेद की,
नारी- मान रखें  सब लोग,
धर्म- समाज ना हो संकुचित ,
दृष्टिकोण सबका विशाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो,

नव पीढ़ी के विहानों पर,
पाश्चात्य संस्कृति करे असर,
धर्म- संस्कृति मर्यादा से,
ना हो विमुख इनकी ड़गर,
इनके जीवन सोपानों पर,
शुभाशीषों की छाँह रहे,
 अनुशासन की ढ़ाल हो,
शुभ-मंगल ये नया साल हो…!!

 

- अर्पणा शर्मा

पिता - (स्व.) श्री रघुवीर प्रसाद जी शर्मा,
माता- श्रीमती ऊषा शर्मा
जन्मदिनाँक – 10 जून, जन्म स्थान – भोपाल (मध्य प्रदेश) भारत.
शिक्षा - एम.सी.ए., कंप्यूटर डिप्लोमा तथा कंप्यूटर तकनीकी संबंधी अन्य सर्टिफिकेट कोर्स.
अध्यावसाय - मार्च सन् 2007 से देना बैंक में अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी के पद पर भोपाल में कार्यरत. इसके पूर्व दो वर्षों तक भारतीय न्यायायिक अकादमी , भोपाल तथा करीब डेढ़ वर्षों तक लक्ष्मी नारायण तकनीकी कॉलेज , भोपाल में कार्यरत रहीं.
रूचि – अध्ययन/पाठन, लेखन, पेंटिंग, कढाई, सिलाई, पाककला, विभिन्न हस्तशिल्प, ड्राइविंग,पर्यटन, तकनीकी के नए आयामों का अध्ययन,  ध्यान-योग के माध्यम से व्यक्तित्व विकास, स्वैच्छिक समाज सेवा, बागवानी।
लेखन की विधा - कविता, कहानी, लघुकथा, छंद, हाइकू आदि विधाओं में प्रयासरत.  उपन्यास लेखन में भी प्रयास।
सदस्यता – म.प्र.हिंदी लेखिका संघ , विश्व मैत्री मंच , ओपन बुक्स ऑनलाइन तथा भोपाल की आजीवन सदस्य, म.प्र. राष्ट्रभाषा प्रचार समिति से संबद्ध ।
सम्मान- म.प्र.हिंदी लेखिका संघ , भोपाल द्वारा “भाव्या” के लिए “नवोदित लेखिका सम्मान”, राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा “शब्द शक्ति सम्मान”, जे.एम.डी. प्रकाशन दिल्ली द्वारा “अमृत सम्मान”, ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा “साहित्य रत्न सम्मान ” तथा ” साहित्यश्री” सम्मान ,  विश्व मैत्री मंच के माॅस्को (रूस) में आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय रचनाकार सम्मेलन में सहभागिता हेतु प्रशस्ति पत्र, नियोक्ता बैंक द्वारा महिला दिवस पर लेखन और सूचना प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित. विभिन्न अंत:बैंक प्रतियोगिताओ में विजेता एवं पुरुस्कृत. 
 
प्रकाशन –  एकल कविता संग्रह “भाव्या” एवं “भाविनी”।  सम्मिलित पुस्तकें –  “क्षितिज” (लघुकथा संग्रह), ” सहोदरी”   (लघुकथा संग्रह), “व्यंग्य के विविध रंग” (व्यंग्य रचना संग्रह) “भारत के प्रतिभाशाली हिंदी रचनाकार”, “सृजन –शब्द से शक्ति का”, “अमृत काव्य” (कविता संग्रह),  विभिन्न ई-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों – पत्रिकाओं में रचनाओं का समय-समय पर प्रकाशन.
“ओपन बुक्स ऑनलाइन”, “स्टोरी मिरर डॉट कॉम” तथा “प्रतिलिपि डॉट कॉम” वेब पोर्टल पर स्वयं के पृष्ठ पर नियमित रचना (ब्लाग) लेखन.
बैंक की पत्रिका तथा बैंक नगर भाषा पत्रिका में बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी लेखों तथा कविताओं का प्रकाशन.
विभिन्न काव्य गोष्ठियों, साहित्य सम्मेलनों में नियमित सहभागिता एवं काव्य-पाठन.
अन्य उपलब्धियाँ - सन् 1994 में “मिस भोपाल ” में प्रतिभागी तथा सन् 1999 में “मिस एमपी” सौंदर्य प्रतियोगिता में रनर अप रहीं ।
सुश्री अर्पणा बचपन से मध्य कर्ण के संक्रमण से ग्रस्त थीं जो कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद बहुत विकट होगया और वे किशोरवय में अपनी श्रवण शक्ति पूर्णतः खो बैठीं. स्वाध्याय और कठोर परिश्रम से ही उच्च शिक्षा पूर्ण की और बैंक सेवा में चयनित हुईं. कंम्प्यूटर ड़िप्लोमा और संभागीय माध्यमिक परीक्षा में मेरिट में चयनित हुईं ।
पूर्णतः बधिर होते हुए भी सदैव स्वावलंबी होने को प्राथमिकता देती हैं ।

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