वैदिक धर्म -एक संक्षिप्त परिचय

वैदिक-धर्म का आधार चार वेद (ऋग्वेद,यजुर्वेद,सामवेद,अथर्वेद) है | इनमे मनोपयोगी समस्त ज्ञान विज्ञान मूलरूप मे विद्यमान है | इनके अतिरिक्त वेदो की व्याख्या के ऋषिकृत ग्रंथ उपवेद,ब्राह्मण,आरण्क,उपनिष्त,दर्शन और वैदांग भी वैदिक धर्म का विस्तार से परिचय कराते है |

 

१ .वैदिक धर्म संसार के सब मतो और सम्प्रदायों से अधिक प्राचीन है |यह सृष्टी के प्रारंभ से अर्थात १९६०८५३०९७ वर्ष से है |

२ .संसार भर के अन्य मत,पन्थ किसी पीर,पैगम्बर,मसीहा,गुरू,महात्मा आदि के द्वारा चलाये हुये है,किन्तु वैदिक धर्म ईश्वरीय है,किसी मनुष्य का चलाया हुआ नही है |

३ .वैदिक धर्म मे एक,निराकार,सर्वज्ञ,सर्वव्यापक,न्यायकारी,
ईश्वर को ही पूज्य-उपास्य माना जाता है,उसी की उपासना की जाती है |

४ .ईश्वर अवतार नही लेता अर्थात कभी भी शरीर धारण नही करता |

५ .जीव और ईश्वर (ब्रह्म)एक नही है,बल्कि दोनो अलग-अलग है और प्रकृती इन दोनो से अलग तीसरी वस्तु है | ये तीनो अनादि है |

६ .वैदिक-धर्म के सब सिद्धान्त सृष्टी क्रम के नियमो के अनुकूल तथा वैज्ञानिक है | जबकि अन्य मतो के बहुत से सिद्धान्त विज्ञान की कसौटी पर खरे नही उतरते |

७ .हरिद्वार,काशी,मथुरा आदि तीर्थ नही है,तीर्थ तो विद्या का अध्यन,यम नियमो का पालन,योगाभ्यास,सत्संग आदि है,जिससे मनुष्य दु:ख से तैर जाता है |

८ .भूत,प्रेत,डाकिन आदि के प्रचलित स्वरूप को वैदिक-धर्म मे स्वीकार नही किया जाता है,यह सब कल्पना मात्र तथा मिथ्या है |

९ .स्वर्ग व नरक किसी स्थान विशेष मे नही होते है,जहा सुख है वहा स्वर्ग और जहाँ दु:ख है वहाँ नरक है |

१० .स्वर्ग के कोई अलग से देवता नही होते | माता,पिता,गुरू,विद्वान तथा पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु,आदि ही स्वर्ग के देवता होते है |

११ .राम,कृष्ण,शिव,ब्रह्मा,विष्णु आदि महापुरूष थे | न ईश्वर थे,न ईश्वर के अवतार थे |

१२ .जो मनुष्य जैसा शुभ या अशुभ कर्म करता है,उसको वैसा ही सुख या दु:ख रूप फल अवश्य मिलता है | ईश्वर किसी भी मनुष्य के पाप को किसी परिस्थिति मे क्षमा नही करता है |

१३ .मनुष्य मात्र को वेद पढने का अधिकार है,चाहे स्त्री हो या शुद्र |

१४ .कर्म के आधार पर मानव समाज को चार भागो मे बांटा जाता है जिन्हे चार वर्ण भी कहते है |

१.ब्राह्मण २.क्षत्रिय ३.वेश्य ४.शुद्र |

१५ .व्यक्तिगत जीवन को भी चार भागो मे बांटा गया है,इन्हे चार आश्रम भी कहते है | २५ वर्ष की अवस्था तक ब्रह्मचर्याश्रम,५० वर्ष की अवस्था तक गृहस्थाश्रम,७५ वर्ष की अवस्था तक वानप्रस्थाश्रम और इसके आगे संन्यासाश्रम माना गया है |

१६ .जन्म से कोई भी व्यक्ति,ब्राह्मण,क्षत्रिय,वेश्य,शुद्र नही होता | अपने अपने गुण,कर्म,स्वभाव से ब्राह्मण आदि कहलाते है | चाहे वे किसी के घर में उत्पन्न हुआ हों |

१७ .भंगी,चमार आदि कोई भी मनुष्य जाति या जन्म के कारण अछूत नही होता | जो गंदा है वह अछूत है,चाहे वह जन्म से ब्राह्मण हो या भंगी या अन्य कोई |

१८ .वैदिक-धर्म पुनर्जन्म को मानता है | अच्छे कर्म अधिक करने पर अगले जन्म में मनुष्य का जन्म शरीर और बुरे कर्म अधिक करने पर पशु पक्षी,कीट,पतंग आदि का शरीर मिलता है |

१९ .गंगा-यमुना आदि नदियो मे स्नान करने से पाप नही छूटते | वेद के अनुसार उत्तम कर्म करने से व्यक्ति भविष्य मे पाप करने से बच सकता है किन्तु किये हुए पापो से नही बच सकता |

२० .पंच महायज्ञ करना प्रत्येक वैदिकधर्मी के लिए आवश्यक है -१.ब्रह्म(ईश्वर)की उपासना करना २.देवयज्ञ(हवन करना) ३.पितृयज्ञ(माता-पिता,सास-ससुर आदि की सेवा करना) ४.बलिवैश्यज्ञ(गाय,कुत्ता,चिड़िया,चींटी आदि तथा विधवा,अनाथ,विकलांग आदि को भोजन देना) ५.अतिथियज्ञ(विद्वान,सन्यासी,उपदेशक आदि से उपदेश ग्रहण करना और उनकी सेवा सत्कार आदि करना) |

२१ .जीवित माता-पिता,गुरू,विद्वान् आदि की सेवा करना ही श्राद्ध कहलाता है | मृत पितरो के नाम पर ब्राह्मणो को दिया हुआ भोजन,वस्त्र,धनादि मृत पितरो को नही मिलता |

२२ .मनुष्य के शरीर,मन तथा आत्मा को सुसंस्कारी(उत्तम) बनाने के लिए नामकरण,यज्ञोपवीत,इत्यादि १६ संस्कारो का करना कर्तव्य है |

२३ .मूर्तिपूजा,छूआछूत,जाति-पाँति,जादू-टोना,डोरा-धागा,ताबीज,शकुन,जन्मपत्री,फलित ज्योतिष,हस्थरेखा,नवग्रहपूजा,अन्धविश्वास,बलिप्रथा,सतीप्रथा,मांसाहार,मद्यपीन,बहु विवाह आदि बातो का वैदिक धर्म मे निषेध है |

२४ .वेद के अनुसार जब मनुष्य सत्य ज्ञान को प्राप्त करके निष्काम भाव से शुभ कर्मो को करता है और शुद्ध उपासना से ईश्वर के साथ सम्बंध जोड लेता है,तब उसकी विद्या (राग-द्वेष आदि की वासनाएं)समाप्त हो जाती है,तभी जीवन की मुक्ति होती है | मुक्ति मे दीव ३१ नील ,१० खरब,४० अरब वर्ष तक सब दु:खो से छूटकर केवल आन्नद का ही भोग करके फिर लौट कर मनुष्य जन्म लेता है |

२५ .वैदिक-धर्मी मिलने पर परस्पर ‘नमस्ते’ शब्द बोलकर अभिवादन करते है |

२६ .वेद मे परमेश्वर के अनेक नामो का निर्देश किया गया है जिनमे मुख्य नाम ‘ ओ३म् ‘ है |

 

- देवेन्द्र कुमार रे

 हेड ऑफ़ ऑपरेशन , पी आई इंडस्ट्रीज , 

अंकलेश्वर , गुजरात

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