मैं कौन हूँ

यदि यह मैं कौन हूँ का सवाल मिल जाता है तो इंसान बुद्धा हो जाता है ..और नहीं मिलता तो तलाश जारी रहती है ..इसी तलाश में जारी है मेरी एक कोशिश भी ..

 

सुबह की उजली ओस
और गुनगुनाती भोर से
मैंने चुपके से ..
एक किरण चुरा ली है
बंद कर लिया है इस किरण को
अपनी बंद मुट्ठी में ,
इसकी गुनगुनी गर्माहट से
पिघल रहा है धीरे धीरे
“मेरा “जमा हुआ अस्तित्व
और छंट रहा है ..
मेरे अन्दर का
जमा हुआ अँधेरा
उमड़ रहे है कई जज्बात,
जो क़ैद है कई बरसों से
इस दिल के किसी कोने में
भटकता हुआ सा
मेरा बावरा मन..
पाने लगा है अब एक राह
लगता है अब इस बार
तलाश कर लूंगी “मैं “ख़ुद को
युगों से गुम है ,
मेरा अलसाया सा अस्तित्व
अब इसकी मंजिल
“मैं “ख़ुद ही बनूंगी !!

 

- रंजू भाटिया

जन्म :१४ अप्रैल

अनुभव :१२ साल तक प्राइमरी स्कूल में अध्यापन दो वर्ष तक दिल्ली के मधुबन पब्लिशर में काम जहाँ प्रेमचन्द के उपन्यासों और प्राइमरी हिंदी की पुस्तकों पर काम किया सम्राट प्रेमचंद के उपन्यासों की प्रूफ़-रीडिंग और एडीटिंग का अनुभव प्राप्त हुआ। प्रकाशन — . दो निजी काव्य संग्रह “कुछ मेरी कलम से ( हिन्द युग्म प्रकाशन ) साया ( अयन प्रकाशन ) साझे काव्य संग्रह पगडण्डीयाँ (का संपादन ) पुष्प पांखुरी। स्त्री हो कर सवाल करती है ,नारी विमर्श ,काव्य संग्रह गुलमोहर ( हिन्द युग्म प्रकाशन ) सिर्फ तुम (आगमन )आदि हैं
दैनिक जागरण ,अमर उजाला ,नवभारत टाइम्स ऑनलाइन भाटिया प्रकाश मासिक पत्रिका, हरी भूमि ,जन्संदेश लखनऊ आदि में लेख कविताओं का प्रकाशन ,हिंदी मिडिया ऑनलाइन ब्लॉग समीक्षा

सम्मान …..उपलब्धियां :
2007 तरकश स्वर्ण कलम विजेता
२००९ में वर्ष की सर्व श्रेष्ठ ब्लागर एसोसेशन अर्वार्ड २०११ में हिंद युग्म शमशेर अहमद खान बाल साहित्यकार सम्मान २०१२ में तस्लीम परिकल्पना सम्मान चर्चित महिला ब्लागर

 

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