मेच फिक्सिंग

“सबूतों और गवाहों के बयानों से यह सिद्ध हो चुका है कि वादी द्वारा की गयी ‘मेच फिक्सिंग’ की शिकायत सत्य है, फिर भी यदि प्रतिवादी अपने पक्ष में कुछ कहना चाहता है तो न्यायालय उसे अपनी बात रखने का अधिकार देता है।” न्यायाधीश ने अंतिम पंक्ति को जोर देते हुए कहा।
“मैं कुछ दिखाना चाहता हूँ।” प्रतिवादी ने कहा
“क्या?”
उसने कुछ चित्र और एक समाचार पत्र न्यायाधीश के सम्मुख रख दिये।
पहला चित्र एक छोटे बच्चे का था, जो अपने माता-पिता के साथ हँस रहा था।
दूसरे चित्र में वो छोटा बच्चा थोड़ा बड़ा हो गया था, और एक विशेष खेल को खेल रहा था।
तीसरे चित्र में वो राष्ट्र के लिए खेल रहा था, और सबसे आगे था।
चौथे चित्र में वो देश के प्रधानमंत्री से सम्मानित हो रहा था।
पांचवे चित्र में उसी के कारण उसके खेल को राष्ट्रीय खेल घोषित किया जा रहा था।
और अंतिम चित्र में वो बहुत बीमार था, उसके आसपास कोई दवाई नहीं थी केवल कई पदक थे।
इसके बाद उसने देश के सबसे बड़े समाचार पत्र का बहुत पुराना अंक प्रस्तुत किया, जिसका मुख्य समाचार था, “दवाइयां न खरीद पाने के कारण हॉकी का जादूगर नहीं रहा।”
न्यायाधीश के हृदय में करुणा जागी लेकिन जैसे ही उसने कानून की देवी की मूर्ती की तरफ देखा, स्वयं की आँखें भी बंद कर ली।

- चंद्रेश कुमार छतलानी

आजीविका  : सहायक आचार्य (कंप्यूटर विज्ञान) ,जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर (राजस्थान)

पता -  प्रभात नगर, सेक्टर – 5, हिरण मगरी, उदयपुर (राजस्थान) – 313002

 लेखन - लघुकथा, पद्य, कविता, ग़ज़ल, गीत, कहानियाँ, लेख

प्रकाशन - मधुमति (राजस्थान साहित्य अकादमी की मासिक पत्रिका), शब्द व्यंजना, रचनाकार, अमेजिंग यात्रा, निर्झर टाइम्स, राष्ट्रदूत, जागरूक टाइम्स, Royal Harbinger, दैनिक नवज्योति, एबेकार पत्रिका, नव-अनवरत, वी विटनेस, हिंदीकुञ्ज, laghukatha.com, अटूट बंधन, किस्सा-कृति, जय-विजय, वेब दुनिया, कथाक्रम पत्रिका, लघुकथा अनवरत (लघुकथा संग्रह), आदि में रचनाएँ प्रकाशित

2 thoughts on “मेच फिक्सिंग

  1. मैच फिक्सिंग पर बहुत ही सुंदर और सार्थक लघुकथा कही है आदरणीय चंद्रेश कुमार छतलानी जी ने। हार्दिक बधाई ।

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