मृत्यु प्रेम

प्रेम पीड़ा है
या पीड़ा प्रेम है ?
पीड़ा का अभिप्राय विछोह या प्रतीक्षा ?
अचिर विछोह या चिर प्रतीक्षा
क्या प्रतीक्षा प्रेम है ?
प्रतीक्षा उस आभासी रेखा पर मिलन की ….
दो श्वासों का एक ही ध्वनि
में परिवर्तित हो जाना
क्या उस मिलन की प्रतीक्षा प्रेम है ?
दैहिक प्रेम तो तुच्छ हुआ
जिस तरह जन्मेगा , उसकी मृत्यु भी निश्चित होगी
क्या प्रेम अलौकिक है ?
प्रत्येक अणु का
सर्वत्र व्याप्त आत्मा में
विलीन हो जाना
आत्मा से परमात्मा का मिलन प्रेम है ?
गर यह प्रेम की परिभाषा है
क्या प्रेमी ही इष्ट है ?
या इष्ट प्रेमी है ?
यह शरीर ही अवरोधक हुआ मिलन का
क्या मृत्यु प्रेम है ?
हाँ ….मृत्यु सत्य है
प्रेम भी सत्य है
अर्थात प्रेम मृत्यु है ?
- सारिका पारीक ‘ जुवि ‘

मुझे याद नही मैंने लिखना कब से शुरू किया था । मन का लिखती हूँ , स्वयं के लिए लिखती हूँ, वास्तविक नाम सारिका पारीक है।और निवास स्थान मुंबई से हूँ । सारिका को लिखने का मौका नही मिला इसलिए ‘ जुवि ‘ लिखती हैं। *जुवि* मेरा उपनाम है जिसे तखल्लुस भी कहा जाता है। मेरी रचना  दैनिक अखबार ‘युगपक्ष ‘ , युग प्रवर्तक , मासिक पत्रिका सरस्वती सुमन और अंतरराष्ट्रीय पत्रिका सेतु में प्रकाशित हो चुकी हैं ।
कविता और संवाद में मेरी खास रुचि है । कविता मेरे मन के भाव है ,मेरे अंतस की पुकार है ,जो मैं पन्नों पर उतारती हूँ।कविता जब तक पूरी नही होती जब तक उसका हर शब्द बोलने न लगें ।कितनी ही कल्पनाएँ मन में प्रस्फूटित होती है , कितनी पीड़ा ये समाज , ये जीवन हमें देता है , तब कही एक कविता जन्म लेती है । बस इन्हीं अधपके ख्यालों के साथ जुवि लिख रही है और लिखती रहेंगी।

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