माहिया: रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

जब ध्यान लगाया है

सपनों तक में भी

केवल तू आया है ।

हर रोज़ सज़ा देना

मेरे अपनों को

मत दर्द खुदा देना ।

अँधियारे छलते हैं

दीपक यादों के

बुझते कब, जलते हैं।

जिस दर पे जाएँगे

तुमको खोकरके

हम चैन न पाएँगे ।

जब शीश झुकाया है

दिल के शीशे में

तुमको ही पाया है ।

पाहन का दौर चला

पूजा था जिसको

उसने हर बार छला ।

क्यों इतनी दूर गए

मिलने की आशा

कर चकनाचूर गए ।

हमको हर बार मिली

घर के आँगन में

ऊँची दीवार मिली ।

कब प्यार उसे भाया

जिसके बागों में

नफ़रत का हो साया ।
१०

चिट्ठी जब खोली थी

आखर की चुप्पी

रह -रहकर बोली थी।
११

बाज़ार तुम्हारा है

सब कुछ बेच रहे,

क्या काम हमारा है ।
१२

दिन-रात हमें काटा

दर्द हमें देकर

सुख गैरों को बाँटा ।

 

 

- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

 

जन्म: 19 मार्च

शिक्षा : एम ए-हिन्दी (मेरठ विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में) , बी0 एड्0 ।

प्रकाशित रचनाएँ :‘माटी,पानी और हवा’,’अंजुरी भर आसीस’,’कुकडूँ कूँ’,’हुआ सवेरा’)(कविता संग्रह),मेरे सात जनम (हाइकु -संग्रह), मिले किनारे (ताँका और चोका संग्रह संयुक्त रूप से डॉ हरदीप सन्धु के साथ), झरे हरसिंगार(ताँका-संग्रह)’धरती के आँसू’,’दीपा’,’दूसरा सवेरा’ (लघु उपन्यास),’असभ्य नगर’(लघुकथा संग्रह),खूँटी पर टँगी आत्मा( व्यंग्य –संग्रह),भाषा-चन्दिका (व्याकरण ) ,रूम टू रीड इण्डिया से  मुनिया और फुलिया (बालकथा हिन्दी और अंग्रेज़ी), झरना ,सोनमछरिया, कुआँ(पोस्टर कविता छोटे बच्चों के लिए ) , रोचक बाल कथाएँ प्रकाशित  ,अनेक संकलनों में लघुकथाएँ संकलित तथा गुजराती,पंजाबी,उर्दू ,अंग्रेज़ी एवं नेपाली में अनूदित। देश -विदेश की विभिन्न -पत्र-पत्रिकाओं में विगत 43 वर्षों से रचनाएँ प्रकाशित ।लोकल कवि का चक्कर (आकाशवाणी  जबलपुर से  नाटक का प्रसारण ) । मुनिया और फुलिया (बालकथा – अंग्रेज़ी) इटली के बाल पुस्तक मेले के लिए भारत  से दो बार चयनित ।

सम्पादन:आयोजन(बरेली लघुकथा सम्मेलन 1989),नैतिक कथाएँ(पाँच भाग), भाषा-मंजरी (आठ भाग),चन्दनमन (18 रचनाकारों का प्रतिनिधि हाइकु संकलन),गीत सरिता(बालगीत-3भाग),बालमनोवैज्ञानिक लघुकथाएँ ,मानव मूल्यों की लघुकथाएँ एवं लघुकथाएँ-मेरी पसन्द  (श्री सुकेश साहनी के  साथ), ‘एक दुनिया इनकी भी ( बालकथा-संग्रह 2 भाग), भावकलश(29 कवियों का  ताँका -संग्रह-डॉ भावना कुँअर के साथ) , यादों के पाखी ,(हाइकु-संग्रह), अलसाई चाँदनी ( सेदोका -संग्रह)का प्रकाशन ।

www.laghukatha.com ( 40 देशों में देखी जाने वाली लघुकथा की एकमात्र वेब साइट), http://patang-ki-udan.blogspot.com/ (बच्चों के लिए ब्लॉगर), 88 देशों में प्रसारित  हिन्दी हाइकु (आस्त्ट्रेलिया)wwwhindihaiku.net के तथा त्रिवेणी  http://trivenni.blogspot.com ( हिन्दी का तांका ,हाइगा और चोका-जापानी छन्द का एक मात्र ब्लॉग) के डॉ हरदीप कौर सन्धु के साथ सहयोगी सम्पादक;हिन्दी चेतना (हिन्दी प्रचारिणी सभा कनाडा की  विश्व भर में प्रसारित त्रैमासिक) के सह -सम्पादक ।

वेब साइट पर प्रकाशन:रचनाकार ,अनुभूति, अभिव्यक्ति,हिन्दी नेस्ट,साहित्य -कुंज ,लेखनी,इन्द्र- धनुष ,उदन्ती ,कर्मभूमि, हिन्दी गौरव ,गर्भनाल आदि ।

प्रसारण –आकाशवाणी गुवाहाटी ,रामपुर, नज़ीबाबाद ,अम्बिकापुर एवं जबलपुर से ।

निर्देशन: केन्द्रीय विद्यालय संगठन में हिन्दी कार्यशालाओं में विभिन्न स्तरों पर संसाधक(छह बार) ,निदेशक (छह बार) एवं  केन्द्रीय विद्यालय संगठन के ओरियण्टेशन के फ़ैकल्टी मेम्बर के रूप में कार्य; एन बी टी द्वारा सर्जनात्मक लेखन की कार्यशाला (चण्डीगढ़), पठन अभिरुचि के प्रोत्साहन हेतु कार्यशाला ( ऊना हिमाचल) , बी एड शिक्षकों के लिए  शिक्षण की परिचर्चा ( गिरडीह)के लिए संसाधक रूप में प्रतिनियुक्त ।

सेवा :  7 वर्षों तक उत्तरप्रदेश के विद्यालयों तथा 32 वर्षों तक केन्द्रीय विद्यालय संगठन में कार्य ।  केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य पद ( 19 फ़रवरी1994- 31 अगस्त 2008) से सेवा निवृत्ति।

सम्प्रति: स्वतन्त्र लेखन ।

सम्पर्क:-  नई दिल्ली-110085

4 thoughts on “माहिया: रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

  1. चिट्ठी जब खोली थी

    आखर की चुप्पी

    रह -रहकर बोली थी।

    Sabhi mahiyan ne man moh liya apnepan,sneh se bhare ye mahiya kisi ka bhi dil aasani se moh lenge aapko meri hardik badhai…

  2. सारे मर्मस्पर्शी माहिया के बीच ये माहिया जाने कितने दिलों का अनकहा दर्द बयान कर गया…| सबसे बड़ा दर्द तो अपनों का अपने से दूर रहना ही होता है…उस पर जब यूँ अक्षर भी चुप रहें तब तो अंतरात्मा तक वो दर्द महसूस होता है…|
    चिट्ठी जब खोली थी

    आखर की चुप्पी

    रह -रहकर बोली थी।
    आदरणीय काम्बोज जी की लेखनी को नमन…|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>