माँ का प्रतिरूप

आज नवेली रूपल का रसोई में पहला दिन है। सभी ने अपने – अपने पसन्दीदा व्यंजन की लंबी लिस्ट उसे थाम दी । यूँ ससुराल में उसके पढ़े लिखे होने की तारीफ तो सभी ने दिल खोलकर की मगर रसोई…वह तो हमेशा बचती रही है रसोई से । सब्जी वगैरह तो फिर भी वह नेट से देखकर कभी -कभार शौकिया बना लेती थी मगर रोटी..! दादी हमेशा माँ से कहती -

अरी कृष्णा! चाहे कितना ही पढ़ा ले बेटी को मगर बनाना तो उसे रोटी ही है।  कभी रसोई के दर्शन भी करादे कर।

वक्त आएगा तो सीख लेगी मांजी ।

कभी दादी चेलेंज करती – ,

चल री रूपल आज मैं तेरे हाथ की ही रोटी खाऊँगी, देखूं कैसी बनाती है ।’

रूपल कितनी कोशिश करती मगर गोल की जगह कोई न कोई नक्शा ही बनता , जब थक जाती तो माँ धीरे से आकर उसके हाथ पर हाथ रख बेलन चलाती और गोल रोटी तैयार हो जाती। मगर आज वह क्या करेगी ? उसने दाल- चावल, खीर, पनीर कोफ्ता, सब नेट की सहायता से बना लिए मगर रोटी की बारी …वही वह बार- बार लोई बनाती , बेलती फिर तोड़ती होंसला छोड़ रही थी माँ की याद कर आँखों में आंसू भर आये।

अचानक रूपल ने अपने दोनों हाथों पर किसी का स्पर्श महसूस किया  और उसके हाथ चकोटे बेलन पर गोल- गोल घूमने लगे। सब कह उठे,
‘ वाह! बहू  ने तो बिलकुल चाँद सी गोल रोटी बनाई है।’

रूपल आँखों में खुशी के आंसू लिए सासु माँ को निहार रही थी।

 

 

- डॉ लता अग्रवाल

शिक्षा  - एम  ए  अर्थशास्त्र. एम  ए  हिन्दी, एम एड. पी एच डी  हिन्दी.

जन्म – शोलापुर महाराष्ट्र

प्रकाशन - शिक्षा. एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं में 50 से अधिक पुस्तकों  का  प्रकाशन| पिछले 9 वर्षों से आकाशवाणी एवं दूरदर्शन   पर  संचालन, कहानी तथा कविताओं का प्रसारण  पिछले 22 वर्षों से निजी महाविद्यालय में प्राध्यापक एवं प्राचार्य का कार्यानुभव ।

सम्मान –

१. अंतराष्ट्रीय सम्मान

Ø  प्रथम पुस्तक ‘मैं बरगद’ का ‘गोल्डन बुक ऑफ़ वार्ड रिकार्ड’ में चयन

Ø  विश्व मैत्री मंच द्वारा ‘राधा अवधेश स्मृति सम्मान |

Ø  ” साहित्य रत्न” मॉरीशस हिंदी साहित्य अकादमी ।

२. राष्ट्रीय सम्मान –

अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा “शब्द शिल्पी सम्मान” । अग्रवाल युवा चेतना मंच द्वारा “सशक्त नारी सम्मान”।साहित्य पीडिया द्वारा बेटी कविताओं पर प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कविता चयनित ।बाल लघुकथा संग्रह ’तितली फिर आएगी’ को “स्व. मोहिनी रिजवानी स्मृति सम्मान” । कथाबिम्ब द्वारा “कमलेश्वर स्मृति सम्मान”  कहानी ’सिग्नल  के पार’। समीर दस्तक की ओर से “राष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान”। राष्ट्रीय बाल कहानी प्रतियोगिता में परशुराम शुक्ल पुरस्कार कहानी “कबीट वाली नानी”। लघुकथा “सांझा दुख” को  सितंबर में ’स्वर्गीय मंगत राम चौधरी स्मृति पुरस्कार’ ।”शिक्षाविद” के रूप में नागरिक कल्याण समिति भोपाल द्वारा सम्मानित ।शीर्षक साहित्य परिषद द्वारा ’लघुकथा रत्न सम्मान”। अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता अजमेर में राष्ट्रीय शब्द्निष्ठा सम्मान, समीर दस्तक चित्तौड़ से साहित्य गौरव सम्मान,स्वतंत्रता सेनानी ओंकारलाल शास्त्री पुरस्कार सलूम्बर , महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान,  बेटियों पर  राष्ट्रीय कविता प्रतियोगिता सविता चड्ढा स्मृति सम्मान ।उद्गार मंच द्वारा कविता “किताबों का कफ़न ओढ़े”, “बरसोदया”,”मनभावन चरित्र” , “गुड़ गोबर”,’चयन’   श्रेष्ठ रचना  ।राजस्थान नाथद्वारा साहित्य मंडल द्वारा मानद उपाधि से सम्मानित। शिलांग ,श्रीमती सुषमा तिवारी सम्मान,भोपाल,  प्रेमचंद साहित्य सम्मान,रायपुर छत्तीसगढ़ , श्रीमती सुशीला देवी भार्गव सम्मान आगरा, कमलेश्वर स्मृति कथा सम्मान, मुंबई ,श्रीमती सुमन चतुर्वेदी श्रेष्ठ साधना सम्मान ,भोपाल ,श्रीमती मथुरा देवी सम्मान , सन्त बलि शोध संस्थान , उज्जैन, तुलसी सम्मान ,भोपाल ,डा उमा  गौतम  सम्मान , बाल शोध संस्थान, भोपाल , कौशल्या गांधी पुरस्कार, समीरा भोपाल, विवेकानंद सम्मान , इटारसी, शिक्षा रश्मि सम्मान, होशंगाबाद, अग्रवाल महासभा प्रतिभा सम्मान, भोपाल ,”माहेश्वरी सम्मान ,भोपाल ,सारस्वत सम्मान ,आगरा, स्वर्ण पदक राष्ट्रीय समता मंच दिल्ली, मनस्वी सम्मान , अन्य कई सम्मान एवं प्रशस्ति पत्र।

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