भोजपुरी भाषा

उत्तर भारत में बोलल जाये वाला हमरा देश के सबसे बड़ छेत्रिय भाषा भोजपुरी
भाषाई के साथ-साथ साहित्यिक रूप से भी काफी समृद्ध मानल जाला ।भोजपुरिया
पट्टी के लोग एकरा के खाली एगो भाषा ही ना बल्कि अपना संस्कार भी
मानेला।भोजपुरी समृद्ध भाषा के समृद्धता में एह भाषा के साहित्यिक भरमार
के भी महत्वपूर्ण भूमिका बा।भोजपुरी भाषा में महाकाव्य, खंडकाब्य,
मुक्तक काब्य, उपन्यास, एकांकी, कहानी, निबंध, आलोचना आदि विविध विधा सब
में साहित्य उपलब्ध बा. एकर आपन व्याकरण भी बा।
१९८० में भोजपुरी अकादमी के कार्यसमिति के एगो महत्वपूर्ण बईठक में अनेक
वरिस्ट भोजपुरी साहित्यकार लोग के देखरेख आ आचार्य डॉ राम देव त्रिपाठी
त्रिपाठी के नेत्रित्व में अथक प्रयास के बाद भोजपुरी अकादमी द्वारा “”
भोजपुरी व्याकरण “” के प्रकाशन भईल ! अभी भी भारत में ई सबसे मानक ,
प्रमाणिक अऊर भोजपुरी व्याकरण के मूलाधार मानल जाला !

भोजपुरी व्याकरण पर दुसरका एगो महानतम कार्य बिहार के रोहतास जिला मानिक
परासी गाँव के रहे वाला आ बिहार भोजपुरी अकादमी के सबसे पहिला निदेशक
आचार्य हवलदार त्रिपाठी ‘ सहृदय ‘ जी द्वारा ” व्युत्पत्ति मूलक भोजपुरी
की धातु और क्रियाएं ” नामक किताब के रचना कर के कइल गइल जवन आजो एगो
भोजपुरी ब्याकरण के बहुमूल्य कृति मानल जाला। इहाँ के लगभग ८००
व्युत्पतिमूलक भोजपुरी के धातु और क्रिया के शब्द प्रदान करके भोजपुरी
व्याकरण के समृद्ध बनवले बानी ! जईसे –घिस , घिसिआव , घींच , घुदूका ,
घुटुक , घुन , घुरघुर ,घुमड़ , घुसुक , घोघियावल , घोंप ,घिचपिच , घिग्घी
,घीन ई सब घ से बनल शब्द बा जवान भोजपुरी में ज्यादा उपयोग होखेला !
दुसरका अगर हम बात करीं भोजपुरिया साहित्य आउर साहित्यकार के त आजो एकर
जोड़ अउरी कहीं ना मिल पाई।भोजपुरी भासा के बनावट कईसन होखे के चाहि ; एह
बात पर आजू से सताईस बारिस पहिले भोजपुरी के विद्वान लोग खूब मंथन कईल
लोग।” भोजपुरी काव्य साहित्य के इतिहास ” नामक पुस्तक के लेखक श्री
महेश्वराचार्य जी भी भोजपुरी साहित्य के नामी – गिरामी विद्वानन में गिनल
जाइला ! एह किताब के पहिलका खण्ड में वेद रामायण से ले के प्राकृत आ
अपभ्रंस साहित्य में लोक भाषा के प्रयोग के रेखांकित कईल गईल बा ! ” तनी
बोल हो मैना ” भोजपुरी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री गिरिजा शंकर राय ‘
गिरिजेश’ जी के चर्चित कहानी संग्रह ह !! ” मोर पिया भईल अब त प्रधान
सजनी ” , माह्तारी के मन , मलिकार , सरकस , ” किरिन माँग संवारलस ” साध
के किला . झूरी चाचा , हांथी के दांत .., भिन्जे न कजरा , जिला बदर ,
कैकेयी के पराछित , डेढ़ लाख टकिया सिपाही सहित पच्चीस गो कहानी एह
संग्रह में समाहित बा !
बिहार के रोहतास जिला निवासी भोजपुरी भाषा के एगो अनमोल नगीना रामेश्वर
सिंह कश्यप आज भी भोजपुरिया भाषी लोग के दिल पर एकछत्र राज करे लन।पटना
विश्वविद्यालय के बी .एन कालेज में प्राध्यापक आ एस .पी जैन कालेज
सासाराम में प्रिंसिपल पद से रिटायर भइल एह महान विभूति के भी हिंदी अउर
भोजपुरी दूनो भाषा में कहानी, कविता, निबंध अउर नाटक आदि महत्वपूर्ण
रचना प्रकाशित भइल बा।1962 में जब चीन से लड़ाई भइल ओही घड़ी उहां के
रेडियो धारावाहिक ‘लोहा सिंह’ लिखनीं. नाटक अतना हिट रहल कि उनकर नामे
लोहा सिंह हो गइल. एकर मुख्यपात्र लोहा सिंह रिटायर्ड फौजी रहे. ओकर भासा
अंग्रेजी हिंदी आ भोजपुरी के खिचड़ी रहे जे आपन पत्नी के ‘खदेरन को मदर’
कहत रहे आ रोब जमावे खातिर ‘मैं काबुल के मोर्चा पर 58 रायफल का लड़ा
जवान हूं’ कहत रहे.
भोजपुरी साहित्य के विकास में रामेश्वर सिंह कश्यप “लोहा सिह”के बाद एगो
सबसे बड नाम आवेला स्वर्गीय भिखारी ठाकुर के
हमरा देश में भिखारी ठाकुर के “भोजपुरी के शेक्सपियर “के उपाधि से नवाजल
गइल बा।आ उ एकर पूरा तरह से हकदार भी रहन। बिहार के सारण जिला के
कुतुबपुर (दियारा) गांव में एगो नाई परिवार बाबूजी के नाम दल सिंगार
ठाकुर आ माई के नाम शिवकली देवी के घरे पैदा भइल भिखारी ठाकुर के बचपन
काफी संघर्षमय रहल बा।गरीब परिवार में पैदा होखला के वजह से कम उम्र में
ही जीविकोपार्जन खातिर उनका गाँव छोड़ देबे के परल रहे।ऊ गांव छोड़ के
खडग़पुर चल गइले, ओहिजा ऊ बहुत पइसा कमइले बाकिर ऊ आपन काम से संतुष्ट ना
रहन। रामलीला में उनकर मन बस गइल रहे. एकरा बाद ऊ जगन्नाथ पुरी चल गइले.
आपन गांव आ के ऊ एगो नृत्य मण्डली बनवले अउर रामलीला खेले लगले. एकरा
साथे ऊ गाना गावत आ सामाजिक कार्य से भी जुड़ले. एकरा साथे ऊ नाटक, गीत आ
पुस्तको लिखल शुरू क दिहले. उनकर पुस्तक के भाषा बहुत सरल रहे जेकरा से
लोग बहुत आकृष्ट भइले. उनकर लिखिल किताब वाराणसी, हावड़ा आ छपरा से
प्रकाशित भइल.चौरासी साल के आयु में उनकर निधन हो गइल. उनकर मुख्य कृति
में लोकनाटक बिदेशिया भाई-विरोध, बेटी-वियोग या बेटि-बेचवा, कलयुग-प्रेम,
गबर घिचोर, गंगा नहान (स्नान) विधवा-बिलाप, पुत्रबध, ननद-भौजाई, बहरा
बहार, राधेश्याम-बहार, बिरहा-बहार, नक़ल भांड अ नेटुआ, शिव विवाह, भजन
कीर्तन-राम, रामलीला गान, भजन कीर्तन- कृष्ण, माता भक्ति, आरती, बुढशाला
के बयां, चौवर्ण पदवी, नाइ बहार, शंका समाधान शामिल बा।भिखारी ठाकुर
भोजपुरी गीत आ नाटक के रचना अउर आपन सामाजिक कार्य खातिर प्रसिद्ध बाडऩ.
ऊ एगो महान लोक कलाकार रहन। भिखारी ठाकुर भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार,
रंगकर्मी लोक जागरण के सन्देश वाहक, नारी विमर्श आ दलित विमर्श के
उद्घोषक, लोक गीत आ भजन कीर्तन के अनन्य साधक रहन. भिखारी ठाकुर बहु
आयामी प्रतिभा के व्यक्ति रहन। ऊ एके साथे कवि, गीतकार, नाटककार, नाट्य
निर्देशक, लोक संगीतकार आ अभिनेता भी रहन। भिखारी ठाकुर के मातृभाषा
भोजपुरी रहे आ ऊ भोजपुरिये के आपन काव्य आ नाटक के भाषा बनवले।
 - आदर्श तिवारी


लेखक बिहार के रोहतास जिला अंतर्गत सावन डिहरी गाँव का रहने वाले हैं।वर्तमान में एक निजी कंपनी थर्मेक्स लिमिटेड में कार्यरत हैं ।पूर्व में सासाराम (बिहार) में दैनिक जागरण समाचार पत्र में संवाददाता के रूप में कार्यरत थे।

3 thoughts on “भोजपुरी भाषा

  1. आदर्श तिवारी जी ; रऊरा एह बड अंतररास्ट्रीय उपलब्धि पर हमनी के सीना चाकर हो गईल बा ! बहुत – बहुत बधाई !
    THANKS TO AMSTEL GANGA EDITORIAL TEAM FOR PUBLISHING ARTICLE ON BHOJPURU ….

  2. बहुत-बहुत धन्यवाद सर रौवा के ……….राउर आशीष हमरा के संबल प्रदान करेला

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