भारत और संस्कृत का पौराणिक संबंध : एक विश्लेषण

शोधसार
 
जिसके अंदर ही “संस्कार” और “संस्कृति”  दोनों ही निहित हों, वह संस्कृत देवभाषा, सभी भाषाओं की जननी, कैसे अहितकर हो सकती है। आज जबकि पूरा विश्व संस्कृत की उपयोगिता, उसकी उपादेयता को स्वीकार करने लग गया है। विदेशों में हिंदी और संस्कृत पढ़ी और पढ़ाई जा रही है, वह भी अनिवार्य और वैकल्पिक दोनों ही स्तरों पर ,और हमारे भारतवर्ष में हिंदी को जहां प्राथमिक स्तर पर ही खत्म किया जा रहा है। वहां संस्कृत भाषा की  हालत इससे भी अधिक दयनीय है। तभी हमारा देश, हमारा युवा वर्ग अपने संस्कार, अपनी भारतीयता, अपने सामाजिक नैतिक मूल्यों, परंपराएं और रीति-रिवाज आदि सबको भूलता जा रहा है क्योंकि शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कारों का लोप होता जा रहा है, जो संस्कृत के साथ होता था,जो संस्कृत में ही समाहित होता था । तभी हमारा युवा वर्ग पश्चिमीकरण की अंधी दौड़ में शामिल होता जा रहा है, और विडंबना देखिए कि पश्चिम वाले भारतीयता को, भारतीय मूल्यों को, भारतीय परिधानों को, भारतीय सभ्यता संस्कृति को, संस्कृत भाषा को अपनाते जा रहे हैं। वह हमारे धार्मिक ग्रंथों पर शोध कर रहे हैं और उन ग्रंथों की प्रामाणिकता, उनकी विलक्षणता, उनकी गुणवत्ता को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। और हमारे भारतवासी पश्चिमी विद्वानों द्वारा प्रदान किए गए सिद्धांतों का गुणगान करते हैं। जबकि सच यह है कि जो सिद्धांत हमें पश्चिमी विद्वानों ने दिए है वही सिद्धांत हमारे ऋषि-मुनियों ने  सैकड़ो वर्ष पहले ही प्रदान कर दिए थे जिनका लिखित प्रमाण हमारे पास है। फिर इतनी अमूल्य धरोहर की रक्षक, प्राण संवाहक, संस्कृत भाषा को क्यों  हमारी शिक्षा प्रणाली से दूर किया जा रहा है? जबकि हमें हमारी युवा पीढ़ी को पुनः भारत में, उसकी संस्कृति में वापिस लाना है तो हमें तो इनके प्रचार-प्रसार पर  और अधिक ध्यान देना चाहिए ।
संस्कृत : कुछ आश्चर्यजनक तथ्य
संस्कृत भाषा के विषय में कुछ विलक्षण तथ्य हैं जो मैं प्रस्तुत करना चाहती हूं, जो इसकी उपादेयता को, इसकी महत्ता को, इसकी विशेषज्ञता को, इसकी विशेषता को सिद्ध करते हैं । ये ऐसी दुर्लभ विशेषताएं हैं जो विश्व की किसी अन्य भाषा में प्राप्य  हो ही नहीं सकती।
हमारे भारतवर्ष में  जितनी भी सर्वोच्च संस्थाएं हैं ,उन सभी के उक्ति वाक्य संस्कृत से  ही उद्धृत हैं जैसे सर्वोच्च न्यायालय, एनसीईआरटी, सेनाओं के मुख्य मोटो आदि।यह इस बात का प्रमाण है कि संस्कृत सदैव हमारे मूल्यों की रक्षक है और सैदेव सभी का उचित मार्गदर्शन ही प्रदान करती है।इसके मूल्य सार्वकालिक हैं यानी समय के साथ इनकी विशिष्टता और उपादेयता और बढती ही चली जा रही है ।(ये बात अलग है कि सार्वजनिक रूप से हम ये स्वीकार नहीं करते हैं)
इसके सूत्र और उक्तियाँ युग-युगांतर से ऐसे ही चले आ रहे हैं और भविष्य में भी ऐसे ही चलते रहेंगे।
जैसे –
(प्रमुख उक्तियां)
1.अहिंसा परमो धर्म: …।
2.सत्यमेव जयते….।
3.असतो माँ सदगमय….।
4.तत त्वं पूषन अपावृणु….।
5.सर्वे भवन्तु सुखिन: ….।
6. कर्मन्येवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचन…..।
7.जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गाSपि गरीयसी……।
8.ॐ सह नावतु ,  सह ना भुनक्तु ……..।
9.योगेक्षेमम वाहम्हम ….।
10.कर्मासु कौशलम …।
11.सर्वतो जायम इच्छतामि ….।
12.अतिथि देवो भव: …..।
13.धर्मे सर्वं प्रतिष्ठितम ….।
14.धर्मो रक्षति रक्षित: ….।
(उनके स्तोत्र ग्रंथ)
1.महाभारत (आदि पर्व)।
2.मुंडको उपनिषद।
3.तैतेर्ये उपनिषद।
4.वाल्मीकि रामायण।
5 आदि शंकराचार्य  (प्रार्थना)।
6.श्री मदभगवतगीता।
7 सुभाषितम
8.कठयो उपनिषद।
9.श्रीमदभगवतगीता।
10.श्री मदभगवतगीता।
11.सुभाषितम।
12.तैतेर्ये उपनिषद।
13.विष्णु पुराण।
14.तैतेर्ये उपनिषद।
 परन्तु आज वो कौन सी बातें हुई हैं कि हम अपने ही भारतीय मूल्यों को भूलते जा रहें हैं और पश्चिमी सभ्यता का गुणगान करते जा रहें हैं।
हमारी युवा पीढ़ी अपने संस्कारों से, अपनी मान्यताओं से, अपनी धार्मिक परम्पराओं से इतनी दूर चली गई है कि उन्हें अपने संस्कार बुरे तथा दक़ियाननुसी लगने लगे हैं। ये पीढ़ी उसके बारे में बात करना भी नहीं चाहती। ऐसा नहीं है कि पश्चिमी सभ्यता कोई बुरी चीज है। परन्तु वो उनके लिए, देशकाल, वातावरण, उनके परिवेश के लिए सही है। परन्तु हमारी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति, हमारे मानवीय मूल्यों के आगे कोई भी सभ्यता कहीं भी नहीं ठहरती। इन सब बातों का प्रमाण है मेरे पास तथा मैं इन प्रमाणों की सहायता से यह सिद्ध कर दूँगी कि भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति हमेशा से ही अग्रगण्य रही है जिनका आधार संस्कृत भाषा ही रही है।
1.  शिक्षा के क्षेत्र में – नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों का प्रमाण।
2.  चिकित्सा के क्षेत्र में – आचार्य सुश्रुत, चरक, पाणिनी, भैषज्य रत्नावली आदि ने विश्व भर को यह ज्ञान दिया।
3.  विज्ञान तथा प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में – आर्यभट्ट, भास्कर, महावीर, वाराहमिहिर, श्रीनिवासा रामानुजन, सी.आर.राव आदि कई ऐसे विद्वान हैं जो हर क्षेत्र में हर लिहाज़ से पूरे विश्व में पूजनीय हैं।
4.  साहित्य के क्षेत्र में -भारतीय साहित्य में जितने वेद पुराण, उपनिषद, ग्रंथ नीतियाँ आदि हैं वो दुनिया के किसी भी देश में हो ही नहीं सकती। हमारी केवल श्रीमदभगवतगीता ही पूरे विश्व का मार्गदर्शन के लिए काफी है। और कई सभ्यताएं  इसका अनुकरण कर भी रहीं हैं।
5.  भाषाओं के क्षेत्र में – अकेले भारत में जितनी बोलियाँ, भाषाएँ बोली जाती हैं तथा जितनी विभिन्नता इसके हर प्रांत की विशेषता है उतनी किसी भी देश में नहीं है। संस्कृत सबसे प्राचीन भाषा है और सब भाषों की जननी है।
6.  संगीत, कला के क्षेत्र में –भारतीय क्लासीकल संगीत, संगीत का जन्मदाता है। बैजू बावरा, तानसेन आदि ऐसे गायक हुए हैं जो अपने राग से, अपने संगीत से दीपक जला सकते थे, बादलों से बारिश करवा सकते थे। जितनी विविधता भारत के प्रत्येक प्रांत और उसके लोकसंगीत की खुशबू और उसकी मिठास में है वो विश्व भर में कहीं भी नहीं।
भारतीय संस्कृति ,संस्कृत भाषा के बारे में दिन प्रतिदिन नए–नए शोध हो रहे हैं तथा इसके बहुत अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। इसमें से कुछ हैं –
1.  बेहतर अंक दिला सकते हैं वैदिक मंत्र – BITs पिलानी के हैदराबाद कैम्पस में यह दावा किया गया है। रिसर्च में हिस्सा ले रहे छात्रों ने गायत्री मंत्र, विश्व सहस्त्रनाम, ललिता सहस्त्रनाम, पुरुष सूक्तम आदि मंत्रों का उच्चारण किया। डा. अरुणा लोला ने कहा है कि शोध के बाद छात्रों का टैस्ट किया गया जिससे उनकी दिमागी स्पष्टता एवं खुशहाली  बढ़ी है ।2.  नासा ने सूर्य की आवाज़ को रिकॉर्ड किया –नासा द्वारा सूर्य की आवाज़ को रिकॉर्ड करने पर पता चला है कि वहाँ “ऊं” शब्द का गुंजन विद्यमान है।

3.  हिन्दुत्व का विज्ञान नासा से आगे –हनुमान चालीसा का एक श्लोक है –

“ जुग सहस्त्र जोजन पर भानू ,
लील्हो ताहि मधुर फल जानू”।
अर्थात हनुमान जी ने एक युग सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित भानू अर्थात सूर्य को मीठा  फल समझकर खा लिया था।
1(जुग) युग = 12000 वर्ष
1 सहस्त्र =  1000
1(जोजन) योजन = 8 मील
युग x सहस्त्र x योजन x = पर भानू
12000 x 1000 x 8 मील = 96000000 मील
1मील = 1. 6 KM
96000000 x 1.6 = 1536000000 KM
अर्थात हनुमान चालीसा के अनुसार सूर्य पृथ्वी से 1536000000 KM की दूरी पर है। NASA के अनुसार भी सूर्य पृथ्वी से बिलकुल इतनी ही दूरी पर है। यानि हमारे मनीषियों ने यह सब कितने हजारों साल पहले ही ज्ञात कर लिया था।
4.  NASA संस्कृत को अपनी भाषा बनाएगा- फोर्ब्स FORBS पत्रिका के अनुसार संस्कृत सबसे प्रयोगिक,  सरल भाषा है तथा कम्प्यूटर  के लिए सबसे उपयोगी भाषा संस्कृत ही है। इस भाषा में भेजे गए संदेश, शब्दों के उल्टा-सीधा  होने पर भी सम्पूर्ण वाक्य का अर्थ नहीं बदलते। आगे भी नासा भारतीय ग्रन्थों पर बहुत शोध कार्य कर रहा है तथा भारतीय ज्ञान, विज्ञान का कायल हो चुका है। नासा के पास भारतीय पौराणिक ग्रन्थों से संबन्धित 60000 ताड़ के पत्तों की पांडुलिपियाँ हैं जिन पर वह गहन शोध कर रहा है।नासा के अनुसार संस्कृत वह भाषा है जो अपनी पुस्तकों वेद, उपनिषद, श्रुतियों, स्मृतियों, पुराणों आदि में सबसे उन्नत प्रोद्योगिकी (Technology) रखती है। पुष्पक विमान ( वाल्मीकि रामायण में वर्णित) जिसे आवश्यकतानुसार छोटा या बड़ा किया जा सकता था। इस विमान में मन की गति से चलने की क्षमता थी। शिल्पाचार्य “विश्वकर्मा” ने ब्रह्मदेव के लिए इस दिव्य पुष्पक विमान की रचना की थी। ये सब दुर्लभ तकनीकी का प्रामाणिक उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त ऋषि भारद्वाज द्वारा रचित “विमान शास्त्र”  एक ऐसी  दुर्लभ पुस्तक है जिसमें अनेकों तरह के विमान बनाने की तकनीक बाकायदा पूरी चित्र प्रणाली के द्वारा समझाई गई है। यह एक ऐसा हिन्दू ग्रंथ है जो  भारतीय तकनीकी की मिसाल है और जो संस्कृत में है।

5.  सबसे अच्छा हिन्दू कैलंडर – जर्मन स्टेट university के अनुसार सबसे अच्छे प्रकार का कैलंडर जो हर जगह इस्तेमाल किया जा रहा है वह है हिन्दू कैलंडर। जिसमें साल ,  सौर प्रणाली के भू वैज्ञानिक परिवर्तन के साथ आरम्भ होता है जो है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।आज से हजारों वर्ष पूर्व जब संचार के कोई आधुनिक साधन नहीं थे तब भी हमारे ऋषि मुनि गणना करके कितने समय पहले ही सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, ग्रहण किस विशेष क्षेत्र में और कितने समय के लिए लगना है, कब ये आरम्भ होगा  ,कब चरम पर होगा तथा कब इसका मोक्ष होगा और ये आंशिक होगा या पूर्ण होगा आदि इन सब के बारे में  बिलकुल सटीक भविष्य वाणी किया करते थे।

6.  6 वीं और 7 वीं पीढ़ी के सुपर कम्प्युटर संस्कृत पर आधारित होंगे- नासा द्वारा एक वैज्ञानिक रिपोर्ट है की समय सीमा 2025 (6वीं पीढ़ी के लिए) और 2034 (7वीं पीढ़ी के लिए) सुपर कम्प्युटर संस्कृत भाषा पर आधारित होंगे। क्योंकि यह भाषा सबसे वैज्ञानिक भाषा है ।
7.  ब्रिटेन की रक्षा प्रणाली हमारे महाभारतकालीन सुरक्षा चक्र पर आधारित करने की दिशा में शोध कार्य जारी- ब्रिटेन की रक्षा प्रणाली हमारे महाभारत कालीन विश्वप्रसिद्ध चक्रव्यूह रचना पर आधारित करने की दिशा में गहन शोध कार्य चल रहा है। ये व्यूह रचना अलग-अलग प्रकार से 6 सिद्धांतों पर आधारित है जो सुरक्षा की दृष्टि  से  बहुत ही प्रभावशाली है।8.  संस्कृत भाषा फोटोग्राफी तकनीक में शामिल- वर्तमान में “उन्नत कार्लियन फोटोग्राफी” तकनीक में संस्कृत भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा संस्कृत भाषा बोलने से वाणी में शुद्धता आती है तथा कितनी ही प्रकार की बीमारियों से बचा जा सकता है। ये सब विभिन्न प्रकार के शोधों एवं प्रयोगों से सिद्ध हो चुका है।

हमारे चारों वेद सभी प्रकार के ज्ञान  का  उद्गम स्थल—
इसके अतिरिक्त एक बात और हमारे चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद  जो सभी प्रकार की शिक्षाओं का ,सभी प्रकार के ज्ञान का उद्गम स्थल कहे जा सकते हैं वो भी संस्कृत भाषा में ही हैं। इन चारों वेदों में  संसार का ऐसा कोई विषय नही है जो इनमे अप्राप्त हो।
इन सबका सार यह है कि जो संस्कार, जो नैतिकता, जो मानवीयता ,जो समाजिकता हम अपने हिन्दी और संस्कृत साहित्य के माध्यम से प्रदान कर सकते हैं वैसी किसी और के द्वारा नहीं।
संस्कृत साहित्य में हर विषय पर ग्रंथ लिखे गए हैं। कोई भी ऐसा विषय नहीं है जो हमारे साहित्य में न हो। ये बड़े अचरज की बात है कि हम भारतीय होते हुए भी पश्चिमी संस्कृति के रंग में रंगते जा रहे हैं और पश्चिमी सभ्यता के लोग हमारे ग्रन्थों का अनुवाद करके उन्हें आत्मसात करके अपने जीवन में   ,अपने आचरण में लाकर अपने चरित्र को ऊंचा उठा रहे हैं।
संस्कृत भाषा वर्तमान में उपयोगिता—
वर्तमान युग में यदि सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाषा है यो वो ह संस्कृत।प्रस्तुत शोधपत्र में विभिन्न प्रकार की  शोध  रिपोर्ट के द्वारा यह सिद्ध हो जायेगा कि आने वाले समय में संस्कृत भाषा से उपयोगी और प्रायोगिक कोई भाषा है ही  नही ।
भारतेन्दु हरीशचन्द्र जी ने भी कहा है कि
“निज भाषा उन्नति अहै सब उन्नति को मूल”।
यानि अपनी ही भाषा सब प्रकार के विकास के लिए आवश्यक है।  संस्कृत भाषा की उपयोगिता तथा नासा के द्वारा इसको अत्यधिक महत्ता प्रदान किए जाने का कारण है कि यह वैज्ञानिक भाषा है। नासा के द्वारा सूर्य की ध्वनि को रिकॉर्ड किया गया जो निरन्तर “ॐ”  का उच्चारण कर रही है और भारतीय सनातन धर्म में “ॐ” का स्थान सर्वोपरि है। और इसमें रचित समस्त साहित्य भी वैज्ञानिक और प्रामाणिक हैं। इसलिए यदि भावी पीढ़ी को समय रहते संस्कार देने हैं तो संस्कृत का ज्ञान अवश्य देना पड़ेगा।
The Sanskrit is key of the Computer study.
इसमें पौराणिक भारतीय संस्कृति तथा पुष्पक विमान का प्रमाणिक रूप मिलता है। इस पर निरन्तर शोध कार्य किया जा रहा है। आधुनिक समय में भारत में भी भिन्न-भिन्न स्थानों पर संस्कृत तथा उसके साहित्य के प्रति जागरूकता आने लगी है। वर्तमान मोदी सरकार द्वारा नदियों को “माँ” का दर्जा दिया जाना तथा उन्हें सजीव मानना इसका प्रमाण है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में योगी अदित्यनाथ की सरकार ने भारतीयता को एक नई पहचान दी है तथा प्रत्येक भारतवासी के दिल में यह उम्मीद जगाई है कि भारत पुनः विश्व गुरु बनने के पथ पर सार्थक रूप से अग्रसर हो रहा है।
इसका एक और प्रमाण है कि रिकॉर्ड 18473 विद्यार्थियों ने एक साथ गीता पाठ किया। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के सबसे बड़े गीतमय युवा चेतना ने विश्व रिकॉर्ड World Record बनाने की तरफ अपना कदम बढ़ाया है। कुरूक्षेत्र के थीम पार्क में पहली बार 18473 छात्रों ने गीता के 18 अध्यायों के 18 श्लोकों का सामूहिक उच्चारण कर इतिहास रचा। संस्कृत के बारे में तथा विदेशों में इसकी साख के बारे में यह तथ्य प्रस्तुत है। आधुनिक समय में पश्चिमी सभ्यता हमारी संस्कृत भाषा तथा उसकी उपयोगिता पर निरन्तर शोध कर रही है। हो सकता है कि  यदि विदेशियों द्वारा संस्कृत भाषा तथा भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति तथा उसके मूल्यों को अपनाया जाएगा तथा वे जब इसे प्रमाणिक रूप से स्वीकार कर लेंगे तब हमारे भारतीय इसे इज्ज़त की नज़र से देखना आरम्भ कर देंगे। अभी हम भारतीय , अँग्रेजी भाषा के ज्ञान को ही विद्वता का प्रमाण मानते हैं जबकि
“ English is just a Language not a measure of Intelligence”
यानि अँग्रेजी सिर्फ एक भाषा है न की  विद्वता का प्रमाण।  और अंत में मैं सिर्फ यही कहना चाहती हूँ कि भावी पीढ़ी को संस्कार  ,सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों को प्रदान करने का सरल एवं सुदृढ़ साधन है संस्कृत और हिन्दी साहित्य जिसमें पंचतंत्र  ,हितोपदेश   ,विदुर नीति   ,चाणक्य नीति   ,नीतिशतक आदि सरलता तथा गूढ़ ज्ञान से भरे हुए ग्रंथ हैं जो खेल-खेल में ही बच्चों के चारित्रिक विकास करने की क्षमता रखते हैं।भारतीय इतिहास में “अहिंसा” तथा वर्तमान में गांधी जी का बहुत महत्व है। हमारी भारतीय मुद्रा में गांधी जी अंकित हैं। परन्तु हमने इस बात पर कभी ध्यान नहीं दिया कि गांधी जी द्वारा अपनाया गया “अहिंसा”  हमारी  संस्कृत भाषा
“अहिंसा परमोधर्म” की ही देन है। गांधी जी को जगत प्रसिद्ध बनाने का श्रेय ‘अहिंसा’ को तथा परोक्ष रूप से संस्कृत भाषा को ही जाता है।

क्या इतने प्रमाण काफी नहीं है संस्कृत की उपादेयता सिद्ध करने के लिए?
भारत से संस्कृत का संबंध पौराणिक होने के साथ-साथ उसकी प्राणवायु के समान है। भारत की प्रगति, उसकी नीतियां, विज्ञान, तकनीकी, प्रौद्योगिकी, रीति रिवाज, परंपराएं, हमारे  सामाजिक, नैतिक, आर्थिक,मानवीय मूल्य हमारी पहचान ,भारतीयता की पहचान के परोक्ष में,उसके आधार(जड़ों) मे, उसकी रगों में संस्कृत है ,यदि यह कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। संस्कृत एक ऐसी संपूर्ण उर्वरक धरा है जिस पर भारतवर्ष सैकड़ों वर्षो से वैश्विक परिदृश्य में  समृद्धि की, कौशल की, गुणवत्ता की, सफलता की ,खुशहाली की, गौरव की, स्वाभिमान की,मौलिकता की, फसलों को प्राप्त करता ही चला आ रहा है। अतः संस्कृत और भारतवर्ष का संबंध अविचल है, अविराम है, अक्षत है,   अजय है, अक्षुण्ण है।
बस इससे अधिक और क्या जा सकता है।

सन्दर्भ
1. अखिल भारतीय रैगर समाज – बृजेश हेजावलिया मंदसौर
2. दैनिक जागरण(10-4-14) – अनुशासन का महत्व – पं. विनय कुमार
3. अनुशासन पर महान व्यक्तियों के विचार – विचार संग्रह
4. इंटरनेट साईट
5. संस्कृति का प्रश्न – जे. कृष्ण मूर्ति
6. विभिन्न विचारधाराएँ जैसे – स्वामी विवेकानन्द , स्वामी अवधेशानन्द गिरि  , ओशो, ब्रहमकुमारीज़।
7. NBT – स्पीकिंग ट्री के नियमित स्तम्भ
8. इंटरनेट साइट
9. विचारधाराएँ – हरबर्ट  ,मैंकाइवर  ,पेज  ,अरस्तू  ,आचार्य कौटिल्य  ,स्वामी विवेकानंद  ,रामकृष्णपरमहंस  ,फ्रायड आदि।
10. नैतिक मूल्य धर्म और हमार समाज – जागरण जंक्शन May 8 2015
11. 1.हिन्दी-संस्कृत अकादमी द्वारा प्रस्तुत सेमिनार के विभिन्न विचार तथा स्वयं द्वारा महसूस किए गए अनुभवों का सार
12. जनसत्ता – नवम्बर 18, 2015.
13. डा. नीतू सिंह तोमर – मानवीय मूल्यों का नैतिक महत्व – एक सामाजिक विवेचन (Feb.9  ,2016)

- डॉ विदुषी शर्मा

शिक्षा - एम ए  , एम फिल , बी एड , पी एच डी  प्रभाकर
पता -  ऋषि नगर रानी बाग दिल्ली 
वर्तमान स्थिति - दिल्ली स्टेट की जनरल सेक्रेटरी इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन।
एसोसिएट एडिटर
चीफ कोऑर्डिनेटर दिल्ली/एनसीआर
सदस्या, नेशनल एग्जीक्यूटिव बॉडी,मिशन न्यूज़ टीवी.कॉम.
 
संप्रति- स्वतंत्र लेखन
 
 ब्लॉग -
http://educationalvidushi.blogspot.in.
रिसर्च  पब्लिकेशंस – 18
 
* विदेश मंत्रालय भारत सरकार तथा मॉरिशस सरकार द्वारा 18 से 20 अगस्त 2018 मॉरीशस में आयोजित होने वाले ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर स्मारिका  “हिंदी विश्व : भारतीय संस्कृति” में शोध आलेख प्रकाशित।
 
* भारत सरकार, गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग की तरह मासिक पत्रिका राजभाषा भारती में आलेख प्रकाशनाधीन।
 
*  विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में  भागीदारी तथा शोधपत्र वाचन जिनमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में “गीता जयंती समारोह” में राष्ट्रपति महोदय श्री रामनाथ कोविंद जी के सामने “आमंत्रित  वक्ता” होने का गौरव प्राप्त।
 * दिल्ली के विज्ञान भवन में  हिंदी संस्कृत अकादमी की तरफ से तीन दिवसीय सेमिनार में  हिंदी संस्कृत अकादमी के अध्यक्ष श्री जीतराम भट्ट जी के सामने  शोध पत्र वाचन ।
*Think Unique Infomedia  की तरफ से आयोजित GLOBAL EDUCATION SUMMIT   में आमंत्रित वक्ता के रूप में आमंत्रित।
* विश्व हिंदी साहित्य सम्मेलन मॉरीशस  अगस्त 2018 हेतु शोध पत्र चयनित, प्रकाशनाधीन।
 * IHRO तथा विधि भारती के सौजन्य से राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय संसद में भागीदारी।
* राष्ट्रीय पुरस्कार “शिक्षक भूषण”, शिक्षक विकास परिषद  शिरोधा ,गोवा की तरफ से।
  * “ग्रेट नेशनलिस्ट अवार्ड”  प्रतिमा रक्षा सम्मान  समिति  करनाल, हरियाणा की तरफ से।
 * प्रथम “पुस्तक समीक्षा सम्मान”  हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में  विश्व पुस्तक मेला 2018 में प्रथम स्थान प्राप्त ।
* NCERT में  आमन्त्रित शोध पत्र वाचन ।
 * “मेरठ  लिटरेरी  फेस्टिवल” में उत्तर प्रदेश के  गवर्नर  श्री  राम नाईक की उपस्थिति में साहित्य सम्मेलन में  साझेदारी।
*  “विश्व हिंदी साहित्य संस्थान ,इलाहाबाद” की  काव्य प्रतियोगिता में देश भर के 250 कवियों में से  प्रथम11 में स्थान प्राप्त ।
* बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में “छत्तीसगढ़ राज्य हिन्दी ग्रंथ अकादमी”  के निदेशक एवम  डॉ विनय कुमार पाठक,अध्यक्ष राजभाषा आयोग, एवम अन्य गणमान्य सदस्यों के सम्मुख  शोधपत्र वाचन का सुअवसर जो मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित था ।
*J.N.U,  दिल्ली  में मिथकीय चेतना पर आधारित कवि सम्मेलन में अतिथि वक्ता।
*Amity University एमिटी यूनिवर्सिटी गुरूग्राम  में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में आमंत्रित वक्ता के रूप में आमंत्रित।
* वीर भाषा हिंदी साहित्य पीठ, मुरादाबाद द्वारा साहित्य प्रतिभा सम्मान प्राप्त ।
* “हम सब साथ साथ है तथा नवप्रभात जन सेवा संस्थान” द्वारा आयोजित “छठा सोशल मीडिया  मैत्री  सम्मेलन” में वरिष्ठ साहित्यकार सम्मान प्राप्त।
 * हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की तरफ से ‘हिंदुस्तानी भाषा प्रहरी सम्मान समारोह” जिसके मुख्य अतिथि दिल्ली के  उप मुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया थे, की मुख्य संयोजिका के रूप में कार्य ।
 *रशियन  कल्चर सेंटर में  आमन्त्रित कवयित्री के रूप में प्रस्तुति।
* मिशन न्यूज़ टी वी की तरफ से आयोजित सुपर अचीवर अवार्ड कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका के रूप में कार्य।
*राष्ट्रीय महिला काव्य मंच के काव्य महोत्सव में आमंत्रित कवयित्री।
* सनातन धर्म कॉलेज, अम्बाला में संस्कृत वेदांत व उपनिषदों, योग तथा संस्कृत भाषा की उपयोगिता नामक विषयों पर संगोष्ठी में दो बार आमन्त्रित वक्ता के रूप में प्रस्तुतिकरण जिसमे मुख्य अतिथि हरियाणा संस्कृत अकादमी के अध्यक्ष डॉ सोमेश्वर दत्त तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित थे।
* इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र एव हिंदुस्तानी भाषा अकादमी द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में आयोजन समिति की सदस्य ।
*नीति आयोग तथा श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में जिसके मुख्य अतिथि  श्री वैंकेया नायडू(माननीय उपराष्ट्रपति, भारत सरकार),सुश्री किरण बेदी(माननीय राज्यपाल, पुडुचेरी) ,श्री अमिताभ कांत,CEO नीति आयोग के लिए  आमंत्रित वक्ता के रूप में आमन्त्रित।
* Indian Council  of Philosophical Reaserach ICPR   की तऱफ से प्रायोजित चित्तौड़गढ़ में 3 दिवसीय राष्ट्रीय  संगोष्ठी में  अमांत्रित वक्ता के रूप में चयन ।
 * “जनकृति” अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में शोध आलेख प्रकाशित
* “हस्ताक्षर” अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका में सामाजिक आलेख प्रकाशित
* पांडिचेरी विश्वविद्यालय द्वारा संपादित के पत्रिका “परिवर्तन” में आलेख प्रकाशित।
 * चीन की एकमात्र पत्रिका “संचेतना” में रचना प्रकाशनाधीन ।
*”सिंगापुर संगम”  में रचना प्रकाशनाधीन।
* कनाडा की एकमात्र हिंदी पत्रिका “सेतू” में आलेख “मुट्ठी भर ज़िन्दगी” प्रकाशित ।
 * पांडिचेरी विश्वविद्यालय द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका “परिवर्तन”में शोध आलेख प्रकाशित।
* केंद्रीय हिंदी निदेशालय एवं  मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अनुदान से प्रकाशित ‘विधि भारती परिषद’ की त्रैमासिक शोध पत्रिका “विधि भारती” में शोध आलेख प्रकाशित।
*  अध्ययन पब्लिकेशनस  दिल्ली, के द्वारा संपादित पुस्तक समकालीन भारत में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे में  “समकालीन भारत में आधुनिक  संचार के साधनों की प्रसांगिकता” नामक अध्याय प्रकाशनाधीन।
 
 * विस्तार निदेशालय कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ,नई दिल्ली  की  पुस्तिका “राजभाषा विस्तारिका में  आलेख प्रकाशनाधीन।
* हरियाणा सरकार की मासिक पत्रिका हरियाणा संवाद में आलेख प्रकाशनाधीन
 * एक पुस्तक संपादन का कार्य जारी ।
*  1 e – book प्रकाशित।
* किन्नर विमर्श: साहित्य और समाज नामक पुस्तक में एक अध्याय प्रकाशित।
* ‘समकालीन भारत: आधुनिक संचार के साधनों प्रसांगिकता’  नामक विषय वस्तु पर पुस्तक में अध्याय के रूप में  प्रकाशनाधीन।
* ब्रिटिश सरकार द्वारा MBE मेडल प्राप्त प्रसिद्ध प्रवासी साहित्यकार तेजेंद्र शर्मा द्वारा संपादित पत्रिका “कथा UK” में आलेख प्रकाशनाधीन।
कुल शोध प्रकाशन – 18
 * अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में  पत्र वाचन सहित सहभागिता – 15
 * राष्ट्रीय सम्मेलनों में  पत्रवाचन  सहित सहभागिता – 18
सम्मान  प्राप्त – 17
 
सदस्यता:
 
 * संपादकीय सहयोगी , हिंदुस्तानी भाषा अकादमी,  दिल्ली की त्रैमासिक पत्रिका ‘हिंदुस्तानी भाषा भारती’।
*हिम् उत्तरायणी पत्रिका ,नई दिल्ली के संपादक मंडल की सदस्या ।
*बोहल शोध मंजूषा  शोध पत्रिका के संपादक मंडल की सदस्य।
* साहित्यपीडिया,  हिंदी
  * नवप्रभात जन सेवा संस्थान,
लखनऊ,दिल्ली।
 * एनवायरनमेंट एंड सोशल वेलफेयर सोसाइटी, खजुराहो।
 * विधि भारती परिषद् ,दिल्ली।
  * ग्रीन केयर सोसाइटी मेरठ
 * युवा शक्ति मंच झज्जर, हरियाणा
*  WARS ARTIUM. — An International Research Journal of Humanities and social Sciences (Saudi Arabia)
* WAAR. — World Association of Authors and Researchers (Saudi Arabia)
* International Educationist Forum
Powered and Promoted by Pooma Educational Trust, member of  the U.N.global compact ,AUGP(NGO in USA)and UNICEF
* Society for Environmental  Resources and Biotechnology Development, Agra

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