बेड़ियों की जकड़न

-पंद्रह सालों से बेड़ियों में जकड़ा हुआ है हरिया ।
-क्यों ?
-मानसिक विक्षिप्त है I बुढ़ापे में सहारा बनने की बजाय पिता पर बोझ बन गया है
-इलाज तो कराया होगा I
-हाँ, उधार लेकरI अब बूढ़ा बाप मटकी बनाकर हजार आस लिए बाजार जाता है और सस्ते में बेचकर लौटता हैI कभी -कभी तो लागत का खर्चा भी नहीं निकल पाता।

–अनुदान देने वाला कोई माई का लाल नहीं मिलाॽ
-कुछ ना पूछो! सहायता पाने को भागते-भागते एड़ियाँ घिस गईंI न सरकारी सहायता मिली न किसी धन्ना सेठ का दिल पिघला।
-सुना है तुम तिरुपति बाला जी जा रहे होI
-हाँ, बीस तोले सोना मंदिर में दान की झोली में डालना है I
-बीस तोले सोना! भगवान् क्या करेंगे उसका। हरिया के नाम बैंक में क्यों नहीं जमा कार देतेI ब्याज से उसका इलाज हो जायेगाI गरीब का भी भला , तुम्हारा भी भलाI
-मेरा क्या भला होगा ,जरा मैं भी तो सुनूँI
-गरीब की दुआ का सात जन्मों तक असर होता हैI उसकी झोंपड़ी में ही तो ईश्वर का निवास हैI
-तुम्हारा ईश्वर रहता होगा झोंपड़ी में,मेरा तो मंदिर में रहता है वह भी बड़ी शान सेI
आकाश निरुपाय था I बेड़ियों में जकड़ी जिन्दगी तो उसे अपने दोस्त की भी लगी जो लोहे से भी अधिक मजबूत थी I

 

- सुधा भार्गव

प्रकाशित पुस्तकें: रोशनी की तलाश में –काव्य संग्रहलघुकथा संग्रह -वेदना संवेदना 
बालकहानी पुस्तकें : १ अंगूठा चूस  २ अहंकारी राजा ३ जितनी चादर उतने पैर  ४ मन की रानी छतरी में पानी   ५ चाँद सा महल सम्मानित कृति–रोशनी की तलाश में(कविता संग्रह )

सम्मान : डा .कमला रत्नम सम्मान , राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मानपुरस्कार –राष्ट्र निर्माता पुरस्कार (प. बंगाल -१९९६)

वर्तमान लेखन का स्वरूप : बाल साहित्य ,लोककथाएँ,लघुकथाएँमैं एक ब्लॉगर भी हूँ। 

ब्लॉग:  तूलिकासदन

संपर्क: बैंगलोर , भारत 

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