बाल गीत


सूरज दादा
सूरज दादा सूरज दादा
रोज़ निभाते अपना  वादा ।
सुबह सवेरे ही तुम आते
इस जग को तुम रोज़ जगाते।
गरमी में तन को झुलसाते
सरदी  में कितना इतराते ।
तुम ही करते  जग उजियारा
तुम बिन जग में है  अँधियारा ।

मोर  निराला
नीला-नीला मोर  निराला
नाचे देखे  मेघा काला।
पंखों को वो जब फैलाए
जो देखे मोहित हो जाए ।
सुन्दर -सुन्दर  प्यारा- प्यारा
राष्ट्रीय पक्षी यही हमारा ।

टामी
टामी  मेरे कुत्ते का नाम
करता घर के बहुत से काम ।
मुँह में वो अखबार दबाता
पापा को झटपट दे आता ।
जब हम उसको ब्रेड खिलाएँ
तभी प्यार से पूँछ हिलाए  ।
इक खटके से देखो  चौके
शक होने पर कितना भौंके ।

तोता
मीतू ने एक तोता पला
बातूनी पर भोला भाला  ।
करते  हैं उसे सभी  पसंद
कर दिया  उसे  पिंजरे में बंद ।
नीतू ने जब पिजरा खोला
‘यहीं रहूँगा’-  तोता  बोला।
मुझको  लगता घर ये प्यारा
मैं सबकी आँखों का तारा ।

नानी   दादी
मेरी प्यारी नानी ,  दादी
मैं तो उनकी  हूँ शहज़ादी ।
आँखें उनकी काली -भूरी
मुझे खिलाती हलवा -पूरी ।
मेरी नानी  जब  घर आती
दोनों मिलकरके बतियाती ।
मैं  करती हूँ उनकी  सेवा
देती मुझको टॉफी , मेवा  ।

आओ मिलकर योग करें
आओ मिलकर योग करें
हम बालक भी योग करें |
आलस को तुम त्यागो जी
सुबह को जल्दी जागो जी
दूर सभी हम रोग करें
आओ मिलकर योग करें |
प्यारा – प्यारा तन – मन है
सेहत  है   तो    जीवन  है
सभी को हम निरोग करें
आओ मिलकर योग करें|
ऋषि -मुनि सारे योगी थे
कभी नहीं वो रोगी थे |
हर पल का उपयोग करें
आओ मिलकर योग करें |

- ज्योत्स्ना प्रदीप

शिक्षा : एम.ए (अंग्रेज़ी),बी.एड.
लेखन विधाएँ : कविता, गीत, ग़ज़ल, बालगीत, क्षणिकाएँ, हाइकु, तांका, सेदोका, चोका, माहिया और लेख।
सहयोगी संकलन : आखर-आखर गंध (काव्य संकलन)
उर्वरा (हाइकु संकलन)
पंचपर्णा-3 (काव्य संकलन)
हिन्दी हाइकु प्रकृति-काव्यकोश

प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन जैसे कादम्बिनी, अभिनव-इमरोज, उदंती, अविराम साहित्यिकी, सुखी-समृद्ध परिवार, हिन्दी चेतना ,साहित्यकलश आदि।

प्रसारण : जालंधर दूरदर्शन से कविता पाठ।
संप्रति : साहित्य-साधना मे रत।

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