‘प्रयाग-सारस्वत कुम्भ’ का सफल आयोजन


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला सभागार में ’सर्जनपीठ’ के तत्त्वावधान में 27 जनवरी को पंचदिवसीय परिसंवाद कार्यक्रम-सह-पुस्तकप्रदर्शनी ‘प्रयाग-सारस्वत कुम्भ’ का विधिवत उद्घाटन हुआ | उत्तरप्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व-अध्यक्ष और नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के कुलपति प्रोफ़ेसर कृष्णबिहारी पाण्डेय की अध्यक्षता में आयोजन का शुभारम्भ दीप-प्रज्ज्वलन के साथ हुआ । मुख्यअतिथि, भाभा परमाणु अनुसन्धान केन्द्र, मुम्बई के वरिष्ठ विज्ञानी और अन्तरराष्ट्रीय शिक्षाविद डॉ. के.पी. मिश्र ने पुस्तक-प्रदर्शनी का उद्घाटन सामान्य परिपाटी के ठीक उलट ‘कटे फीते को जोड़ते हुए’ किया । इस अवसर पर मुख्यअतिथि डॉ. मिश्र ने आयोजकों की प्रशंसा करते हुए कहा, कि प्रकाशकों द्वारा पुस्तकों की प्रदर्शनी के आयोजन की बात तो आम है, किन्तु लेखकों-द्वारा आहूत पुस्तक-प्रदर्शनी पहली बार देखने में आ रही है । सर्जनपीठ के राष्ट्रीय-संयोजक डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने जानकरी दी कि प्रदर्शनी में चालिस से अधिक लेखकों ने अपनी पुस्तकें प्रदर्शित कीं | पहले दिन के परिसंवाद विषय ‘शिक्षा का बाज़ारीकरण तथा देश का भविष्य’ का विषय-प्रवर्त्तन करते हुए शिक्षाविद डॉ. विभुराम मिश्र ने शिक्षा क्षेत्र में व्याप गये बाज़ारवाद की चर्चा की । इसी दिन कार्यक्रम के अगले चरण में साहित्यशिल्पी-समीक्षक सौरभ पाण्डेय ने काव्य-शिल्प पर विशद वक्तव्य प्रस्तुत किया |

दूसरे दिन ’पुस्तक पुरस्कार और राजनीति’ पर विशिष्ट-अतिथि अध्येता श्री सौरभ पाण्डेय ने कहा कि ’साधन, मत तथा व्यवस्था जब बदल जाती है तो इसका सीधा प्रभाव साहित्य पर पड़ता है । उन्होंने कहा कि ज्ञान और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में उपाधियों का वर्चस्व साहित्य के साथ विश्वासघात करने की तरह है । विषय-प्रवर्त्तन किया वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांश ने, जिनके अनुसार लेखकों द्वारा होता कोई व्यवस्था विरोध कलम के मार्फ़त ही होना चाहिए । मुख्य अतिथि अन्तरराष्ट्रीय विचारक, बिड़ला फाउंडेशन के सदस्य श्री ओमप्रकाश दुबे थे। परिसंवाद के अगले चरण में गद्य तथा पद्य की कई विधाओं पर शिल्पगत विशद चर्चा हुई ।

तीसरे दिन ’समाज को बनाता-बिगाड़ता मीडिया-तंत्र’ विषय के लिए अध्यक्षीय पद से बोलते हुए इलाहाबाद वि.वि. के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मुश्ताक अली ने प्रिण्ट मीडिया से अधिक इलेक्ट्रोनिक मीडिया को तमाम विद्रूपताओं के लिए उत्तरदायी बताया । डॉ. मुश्ताक ने ज़ोर दे कर कहा प्रिण्ट मीडिया आज भी अपनी नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठावान है । मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार-सम्पादक डॉ. आशीष त्रिपाठी ने इस पूरे विषय पर विस्तृत वक्तव्य दिया । उन्होंने स्वीकार किया कि पत्रकारिता के छात्रों को संतुलित शिक्षा नहीं मिल रही है । इस अवसर पर शहर के कई प्रमुख समाचार-पत्रों से सम्पादक तथा वरिष्ठ संवाददाता मौजूद थे । प्रबुद्ध श्रोताओं ने भी विषय सम्बन्धी कई विन्दुओं पर चर्चा की तथा सम्पादकों से प्रश्न किये ।

चौथे दिन ’हमारे दैनिक जीवन में देवनागरी लिपि और हिन्दी-भाषा’ विषयक कर्मशाला आयोजित हुई । कर्मशाला एक खुली चर्चा को आह्वान करती हुई संचालित हुई । हिन्दी भाषा की आजतक की यात्रा का समीक्षक सौरभ पाण्डेय ने सुरुचिपूर्ण वर्णन किया । चर्चा में भाग लेते हुए प्रख्यात भाषाविद् डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने भाषा को लेकर समाज को जागरुक रहने की बात की । उनके अनुसार जो समाज भाषायी तौर पर सचेत नहीं रहता वह कालान्तर में अपने मानवीय अधिकारों तक से वंचित हो जाता है । शिक्षाविद् डॉ. विभुराम मिश्र ने भाषा को संप्रेषण का साधन मात्र न कह कर इसे मनन-मंथन के लिए भी आवश्यक बताया । शिक्षाविद् डॉ. नरेन्द्रनाथ सिंह ने भाषायी शुद्धता को एक मिथ बताया । इस कार्यशाला में साहित्यकार प्रेमनाथ सिंह तथा डॉ. ज्योतीश्वर मिश्र की भी मुखर भागीदारी रही ।

पाँचवें दिन कुल बाइस साहित्यकारों को नारिकेल तथा शॉल देकर साहित्य-सर्जन-शिखर-सम्मान से सम्मानित किया गया । पाँचों दिन समारोह के संचालन का महती दायित्व आयोजन के संयोजक डॉ. पृथ्वीनाथ पाण्डेय पर था । दूसरे सत्र में काव्य-पाठ हुआ जिसमें कुल चालीस कवि-शाइरों ने भागीदारी की तथा इसका संचालन मुकुल मतवाला ने किया ।

पंचदिवसीय प्रयाग-सारस्वत कुम्भ का कार्यक्रम -

27 जनवरी – परिसंवाद विषय – ‘शिक्षा का बाज़ारीकरण तथा देश का भविष्य’

28 जनवरी – परिसंवाद विषय – ’पुस्तक पुरस्कार और राजनीति’

29 जनवरी – परिसंवाद विषय – ’समाज को बनाता-बिगाड़ता मीडिया-तंत्र’

30 जनवरी – कर्मशाला – ’हमारे दैनिक जीवन में देवनागरी लिपि और हिन्दी-भाषा’

31 जनवरी – सम्मान समारोह एवं कवि-शाइर सम्मेलन

 

- सौरभ पाण्डेय

जन्मतिथि : 3 दिसम्बर 

शिक्षा : बी.एस.सी (गणित), डिप. इन सॉफ़्टवेयर, डिप. इन एक्स्पोर्ट मैनेजमेण्ट, एमबीए.

पुस्तकें : परों को खोलते हुए शृंखला (सम्पादन), इकड़याँ जेबी से (काव्य-संग्रह), छन्द-मञ्जरी (छन्द-विधान)

प्रकाशन : राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा ई-पत्रिकाओं में, अनेक सम्पादकों के संकलन में रचनाएँ सम्मिलित.

सम्बद्ध मंच : प्रबन्धन सदस्य, ई-पत्रिका ओपनबुक्सऑनलाइन; सदस्य, प्रमर्शदात्री समूह, विश्वगाथा (त्रैमासिक)

पता :  नैनी, इलाहाबाद  (उप्र)

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