“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की साहित्य गोष्ठी सम्पन्न

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ 37वीं गोष्ठी सम्पन्न :
‘माना हमने शब है काली / ले खुशियाँ आई दिवाली
देश तरक्की तब ही करता / गर खुश हो बागों का माली ॥ – मन जीत कौर “मीत”
मुल्क को मेरे बस मेरा हिंदुस्तान रहने दो / हिन्दू सिख ईसाई मुसलमान रहने दो – “कम-दिल’
पुलकित भारत का हर कोना , दीपों का त्यौहार है – कन्हैया लाल खरे
आपको याद हम / हमको तुम याद हो
अब जरूरी नहीं की मुलाक़ात हो ॥ – मनोज दिवेदी
चलो हम इस उम्र में / एक समझौता करें
तुम मेरा प्रश्न कर दो , मैं तुम्हारा – विष्णु सक्सेना
बाजार मॉल में मन खुशगवार खो गया है / शहर में हैं सब मगर त्यौहार खो गया है – अवधेश सिंह
वैशाली , गाजियाबाद 29 अक्तूबर 2017, आज यहाँ “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” के अंतर्गत सैतीसवीं साहित्य गोष्ठी वैशाली गाजियाबाद स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क सेक्टर चार में सम्पन्न हुई । हिन्दी साहित्य से संबन्धित अभिनव प्रयोग की यह श्रंखला प्रत्येक माह के अंतिम रविवार के अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ही आज मध्यान्ह उपरांत 3.30 बजे से प्रारंभ हुई। इस साहित्य रचना पाठ के कार्यक्रम में पधारे कवि , कहानी कार , उपन्यासकार ,आलोचक , ग्रंथकार आदि ने अपने विचारों के साथ स्वरचित रचनाओं का पाठ किया ।
पूर्व निर्धारित विषय गांधी और प्रकाश उत्सव से जुड़ी सामाजिक सरोकार से जुड़ी रचनाओं का पाठ देर शाम अंधेरा होने तक जारी रहा । लगभग 11 कवियों सहित 25
श्रोताओं वाली इस बड़ी गोष्ठी  समापन बाकी कवियों की रचना पाठ के साथ संयोजक अवधेश सिंह के घर पर हुआ ।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ नवगीत कार डॉ राधेश्याम बंधु , आलोचक वरिष्ठ कवि डॉ वरुण कूमर तिवारी की अध्यक्षता में उपस्थित प्रमुख कवियों में सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा , कन्हैयालाल खरे , परमजीत यादव “कम दिल ” ,विष्णु सक्सेना , डॉ राकेश चक्र , रामेश्वर दयाल शास्त्री , रामचन्द्र जोगेश्वर , मनोज दिवेदी , अमर आनंद , अमन चक्र , व कवियत्री सुश्री मन जीत कौर “मीत”, मधु वार्श्णेय , व पूनम थीं । गोष्ठी का सफल संचालन संयोजक अवधेश सिंह ने किया ।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से वरिष्ठ कहानी कार मनीष कुमार सिंह व ए आर पब्लिशिंग के प्रकाशक शिवानंद तिवारी सहित राजदेव सिंह , एल एस राजू , रघुवर दयाल , कपिल देव नागर , राम कृष्ण शर्मा , शत्रुघन प्रसाद आदि प्रबुद्ध श्रोता गण उपस्थित रहे ।
“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की छतीसवीं साहित्य गोष्ठी सम्पन् :
“बाबू जी का चश्मा और अखवार है / हिन्दी हमारे लिए घरबार है .
“राष्ट्र भाषा हिन्दी और शिक्षक दिवस” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की छतीसवीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई ।
हिन्दी साहित्य से संबन्धित अभिनव प्रयोग की यह श्रंखला प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ही मध्यान्ह उपरांत 4 .30 बजे से प्रारंभ हुई। देर शाम तक चली गोष्ठी को “राष्ट्र भाषा हिन्दी और शिक्षक दिवस विषय में रची बसी कविताओं ने नयी बुलंदियों से स्पर्श कराया ।
गोष्ठी में पधारे गीत विधा के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ गीत कार बृजेन्द्र नाथ मिश्र ने हिन्दी पर अपना गीत “देश की माला भाषाएँ हैं / हिन्दी इनकी डोर है / इस मनके में बंधे रहें सब / माँ हो रही विभोर है “ पढ़ा । वहीं शिक्षा को उद्देश्य पूर्ण बताने वाला गीत “ घर से चुप चाप निकल / दबाकर अपने पदचाप निकल / अलख जगाने को मेरे मन / मिटाने को संताप निकल “ सुनाकर श्रोताओं को आकर्षित किया ।
गीतकार केशव प्रसाद पाण्डेय ने अपना गीत “हिन्दी हो हिंदुस्तान की भाषा / ऐसी है अपनी अभिलाषा / हिन्दी बने आन की भाषा /हिन्दी बने शान की भाषा / हिन्दी हो सम्मान की भाषा …” पढ़ा ।
कवि अमर आनंद ने हिन्दी को भारतीय संस्कृति , संस्कार और मूल्यों को का पूरक बताया और “बाबू जी का चश्मा और अखवार है / हिन्दी हमारे लिए घरबार है … भाई की हमजोली / बहन की डोली / माँ की दवाई है / हिन्दी तो रग रग में समाई है…/ हिन्दी प्यार है / हिन्दी मनुहार है / हिन्दी तो जैसे बहार ही बहार है । “ सुना कर तालियाँ बटोरी ।

संयोजक कवि अवधेश सिंह ने अपनी मातृभाषा शीर्षक की कविता “ जैसे…/ शब्द से बनता हो / कोई निवाला / जिसका पौष्टिक होना / पहली शर्त हो / सम्बन्धों के लिए / मानवता के लिए / प्रेम के लिए / गौतम बुद्ध की / इस दुनिया के लिए / होने को एक मातृभाषा ।“ पढ़ी ।
अन्य कवियों में नवोदित कवि रतनलाल गौतम , कवियत्री करुणा दिवेदी व शिवानी श्री ने रचना पाठ किया ।
गोस्ठी का सफल संचालन संयोजक अवधेश सिंह ने व अध्यक्षता वरिष्ठ गीत कार बृजेन्द्र नाथ मिश्र ने की । इस अवसर पर सर्व श्री राजदेव प्रसाद सिंह , शत्रुघ्न प्रसाद , शशिकांत सुशांत कुशवाहा , एस पी चौधरी , उमाशंकर प्रसाद गुप्त , आर पी सिंह आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया ।
गोस्ठी के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए इस गोस्ठी के संयोजक कवि लेखक अवधेश सिंह ने इस गोष्ठी की निरंतरता को बनाए रखने का अनुरोध करते हुए सबको धन्यवाद दिया।
“पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की पैंतीसवीं साहित्य गोष्ठी सम्पन्न :
दिनांक 27  अगस्त 2017 , रविवार, वैशाली,गाजियाबाद“देश भक्ति और राष्ट्र प्रेम पर” के ओजस्वी गीतों , छंदों और गजलों से परिपूर्ण  “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की पैंतीसवीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई । हिन्दी साहित्य से संबन्धित अभिनव प्रयोग की यह श्रंखला प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ही मध्यान्ह उपरांत 4 .30 बजे से प्रारंभ हुई।
घने गुलाचीन के पेड़ों और हरियाली के शीतल मनोरम सानिध्य में पार्क की हरी भरी दूब पर आयोजित इस साहित्य गोष्ठी में इस बार बाहर से पधारे नव गीत कारों और गजल कारों ने श्रोताओं को आनंदित किया और देर शाम तक चली  गोष्ठी को “देश भक्ति और राष्ट्र प्रेम के शौर्य त्याग बलिदान से जुडी गाथा पर” नयी बुलंदियों से स्पर्श कराया ।
गोष्ठी में पधारे नवगीत विधा के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ नवगीत कार जगदीश पंकज ने सरहद की सरगर्मियों के बीच शहीदों की याद करते हुए कहा ” कितना धैर्य रखें , कितना संयम बरते , दुश्मन सीमा लाँघ , हमें ललकार रहा “। वहीं वरिष्ठ कवि ईश्वर सिंह तेवतिआ ने फौजी के त्याग और बलिदान को नए रूप से प्रस्तुत किया और कविता “आओ चलो मिलकर हम समझे / एक सैनिक के जज्बातों को / जो सरहद पर गुजरे / उसके उन लम्हों उन हालातों को “  का पाठ किया। इस क्रम में उमेश श्रीवास्तव “राही ” ने पढ़ा ” हजार रंग फूल हैं / मगर चमन तो एक है / सितारे हैं हजारों / पर गगन तो एक है / भिन्न भिन्न धर्म है / अलग अलग है साधना / अनेक जाति वर्ण हैं / मगर वतन तो एक है। ” गोष्ठी के संयोजक अवधेश सिंह ने ललकार की भाषा में कहा ” गोली का गोली से बस आखिरी हो संवाद / पी ओ के पर कब्ज़ा कर भारत हो आबाद / भारत हो आबाद करे यहीं ख़त्म कहानी / आर पार की जंग लडें हम जंगी हिन्दुस्तानी ” मनोज दिवेदी ने देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत गीत पढ़ा ” ईमान पुकारे है / अभिमान पुकारे है / चेत जाओ देश का / सम्मान पुकारे है “ अन्य प्रमुख कवियों में परमजीत यादव “कम दिल ” ने गजल पढ़ी ” जश्न आजादी की शान तिरंगा है , खुद्दार वतन हर शख्स का अरमान तिरंगा है।  ,
कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए कवि व टीवी एंकर अमर आनंद ने कविता “अँधेरों का , अंधेरगर्दी का ना कभी भी डेरा हो / ऐसा संदेश , ऐसा परिवेश ,ऐसा देश ही मेरा हो”पढ़ी , व पत्रिका सृजन से की संपादिका मीना पाण्डेय ने राष्ट्र प्रेम से ओत प्रोत गीत “आसमां छू कर पुकारें/ सर्व आजादी / हमारा मर्म आजादी /मनाएँ पर्व आजादी ….” का पाठ किया तथा टीवी एंकर नवोदित रिंकू मिश्रा ने देश भक्ति की भावना से ओत प्रोत कविता “ मैं गीत हूँ संगीत हूँ मैं रीत हूँ और जीत हूँ मैं प्यार हूँ मैं भाव हूँ मैं प्रीत हूँ और शीत हूँ किस सोंच में पड़े हो …..” का पाठ किया।  अन्य प्रमुख कवियों में कृष्ण मोहन उपाध्याय , रामेश्वर दयाल शास्त्री , डॉ वरुण कुमार तिवारी ने भी काव्य पाठ किया इस अवसर पर प्रसिद्ध कहानी कार मनीष कुमार सिंह ने लघु कथा का वाचन किया और उनके नए उपन्यास “आँगन वाला घर ” पर चर्चा हुई। गोस्ठी का सफल संचालन संयोजक अवधेश सिंह ने व अध्यक्षता डा वरुण कुमार तिवारी ने की ।
इस अवसर पर सर्व श्री कैलाश पांडेय प्रबंध संपादक सृजन से साहित्यिक पत्रिका , समाज सेवी दयाल चंद्र , राजदेव सिंह , शत्रुघ्न प्रसाद , शिव चरण कुशवाहा , आर के शर्मा , उमाशंकर प्रसाद गुप्त , जे बी सिंह ,गुप्तेश्वर प्रसाद ,लक्ष्मी नारायण गुप्त , ए.एस रमन , एस. पी त्यागी , आर पी सिंह आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया । गोस्ठी के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए इस गोस्ठी के संयोजक कवि लेखक अवधेश सिंह ने इस गोष्ठी की निरंतरता को बनाए रखने का अनुरोध करते हुए सबको धन्यवाद दिया ।

- अवधेश सिंह , संयोजक

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