पाचवा अध्याय समाप्त

हम बचपन से ही एक कथा सुनते आ रहे हे जिसमे लीलावती और कलावति का नाम हर महीने सुनने को मिलता था , जब भी ख़ुशी की कोई बात होती तो झट से सतनारायण भगवन की कथा गाव के गोरजी की पक्की | समय के साथ साथ अब इस कथा का चलन कम हो गया पर आज भी मेरे जेसे लोग इसको पड़ते हे |
लीलवती और कलावती की पति और जमाई व्यापार के लिए जाते हे और खूब व्यापार में कमा कर आते हे तो भगवान उनका इम्तिहान लेने के लिए उनसे साधु रूप में
मिलते हे और पूछते हे की आपकी नाव खूब भरी हुई हे इसमें क्या  भारा हे | वे लोग सोचते हे की ये साथु दान मागने के लिए पूछ रहा हे सो घमंड से  बोल देते हे की हमारी नाव में तो लता पत्र भरे हुवे हे भगवन साथु रूप में उनकी बात सुन कर उन्हें कहते हे की  “तथास्तु ” तुम्हारी वाणी सत्य हो और दुर जा कर बेठ जाते हे | ये कथा आज भी सास्वत सत्य हो रही हे |सरकार आज भी आपसे यही पूछ रही हे की आपके पास पुरानी करंसी कितनी हे बता दो और कहा से आई ये भी बता दो |अब अगर आप ये बोलो की कुछ भी नहीं तो सरकार भी तथास्तु बोलने के मुड में आ चुकी हे |

एक किसान ने खेत पर कथा करवाई और ब्राम्हण ने भी अपने बेटे को ट्रेनिंग के बतोर कथा करने भेज दिया | उसने कथा बाची और दो अध्याय भूल भूल गया | बाद में किसान की बीबी बोली की इसमें लीलावती कलावती की कथा तो आई ही नहीं सो पंडित को बुलाया ,वो बोला भाई लीलावती कलावती खेत पे केसे आवेगी सो दोनों आपस में समज गए और काम ख़त्म |

अब सरकार विरोधी और धन कुबेर भी तरह तरह की कथा कर रहे हे अपन से सो गुणा जादा बुद्धि वाले नेता भी तरह तरह से जनता को गुमराह कर रहे हे | एक भिया जो ५ साल से काले धन के विरोध में आन्दोलन करके नेता बने हे वो भी नोटबंदी के खिलाफ हो गए हे | अपने गुरु को पीछे करके राजनीति में आने वाले झूट पे झूट बोल रहे हे | एक मेडम ने तो तिन दिन का अल्टीमेटम दे दिया हे और खुलेआम बगावत का बिगुल बजा दिया हे | जब उनके पास कुछ नहीं हे तो क्यों इतना फडफडा रहे हे | कहते हे की बुझने के पहले दिए इसी तरह फड़फडाते हे कही ये दिए बुझने वाले तो नहीं |जो लोग पुरे महीने बिजली,राशन,घासलेट,बिजली बिल , टेलेफोन बिल, पेट्रोल,रेल ,यहाँ तक की लेट्रिन  और न जाने कोन कोन सी लाइन में लगते थे वो चार दिन बैंक की लाइन में लगने में बड़ा भारी जुर्म बता रहे हे |
सो मेरा तो ये कहना हे की सत्य नारायण की कथा का ये आखरी पाचवा अद्यया हे और अब परसाद बटने की तय्यारी हे और सब का भला इसी में हे की इसमें अपनी आहुति दो और अपने परिवार के साथ सुख से जीवन बिताओ नहीं तो सरकार आपको तथास्तु बोलने में देर नहीं करेगी | आगे आपकी मर्जी |
 

- राजेश भंडारी “बाबु”

जन्म स्थान : गाव ;हाजी खेडी ,तराना जिला उज्जैन (म.प्र.)
पैत्रक निवास : गाव ; झलारिया जिला ;इंदौर (म.प्र.) 
वर्तमान निवास : महावीर नगर ,इंदौर (म.प्र.)

शिक्षा: एम.काम., एल.एल.बी. ,एम.बी ए.(फाइनेंस)

प्रकाशन :
स्कुल/कालेज के समय से ही लेखन कार्य में रूचि रही| नई दुनिया, देनिक पत्रिका , देनिक भास्कर ,औधिच्च बंधू ,औधिच्य समाज ,अग्निपथ ,देनिक दबंग, प्रिय पाठक,अक्छर वार्ता ,मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति की पत्रिका वीणा ,शब्द प्रवाह वा अन्य पत्र परिकाओ में समय समय पर लेख ,कविता ,व्यंग प्रकाशित | मालवी के प्रचार प्रसार हेतु समय समय पर लेख वा कविताओ का प्रकाशन | इन्टरनेट के वा अन्य इलेक्ट्रानिक माध्यमों से मालवी के प्रचार प्रसार निरंतर प्रयास रत हे | यू ट्यूब पर करीब ५० वीडियो उपलोड हे |फेसबुक के माध्यम से देश विदेश के मालवी भाषी हजारों लोगो से निरंतर जुड़े हुवे हे और मालवी सस्कृति की विलुप्त होती चीजों को जन जन तक पहुचाने के लिए प्रयासरत हे |नेट ब्लॉग के माध्यम से भी मालवी को देश विदेश के लोगो तक पहुचाने में प्रयास रत हे | आज कही भी कवि गोष्ठी होती हे तो मालवी की हाजरी जरुर लगती हे अखंड संडे ,मालवी जाजम और भी कई संथाओ में नियमित मालवी कविता पाठ करने जरुर जाते हे |

One thought on “पाचवा अध्याय समाप्त

  1. कथा के बहाने भ्रष्टाचारियों को अच्छी सीख | पर समझें, तब न | बधाई | सुरेन्द्र वर्मा |

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