नासमझी

देश को आजाद हुए सत्तर वर्ष होने वाले हैं लेकिन बुधिया आज भी सोलह वर्ग गज भूमि पर बनी अपनी झुग्गी के अंदर प्रसव वेदना से कराह

रही थी। घीसू तथा माधव बाहर अलाव में आलू भून रहे थे। गोधूलि बेला में कसबे से लौटते समय घीसू के हाथ शराब की एक दुकान के कोने में

पड़ी टूटी – फूटी बोतलों के ढ़ेर से शराब का एक पव्वा हाथ लग गया था। उसे पॉलीथीन के थैले में लपेट वह कुछ देर पहले लौटा था। अलाव से

एक लकड़ी की डंडी से आलू निकाल कर माधव ने उन्हें बाजू में पड़े अखबार के पन्ने के ऊपर रखा। माधव आलू छीलने लगा तो घीसू ने पव्वे का

ढ़क्कन हटाकर उसमें मौजूद आधे द्रव को पास में रखे प्लास्टिक के मग में उड़ेल दिया।

तभी यकायक माधव ने घीसू से पूछा – ” बापू ! ये जीडीपी क्या होता है ? ” सवाल सुनकर घीसू ने बोतल से कुछ द्रव अपने हलक में उतारा। फिर

एक छिले हुए आलू को हाथ में लेकर हँसते हुए बोला – ” मुझे तो मालूम नहीं लेकिन कसबे के मैदान में आज दिन में एक नेता बता रहा था कि देश

की जीडीपी में बढ़ोतरी हो रही है। ”

 

 

- सुभाष चंद्र लखेड़ा

जन्म स्थान : रिखेडा, पौड़ी ( उत्तराखंड )
जन्म तिथि : 15 अक्टूबर
शिक्षा: एम एससी ( रसायन विज्ञान )
* रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन से वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद से सन 2009 में सेवा निवृत
* केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद् , नई दिल्ली; विज्ञान परिषद् प्रयाग, इलाहाबाद; हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद्, भाभा
परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई एवं भारतीय विज्ञान कांग्रेस की आजीवन सदस्यता
* वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों से जुड़े लगभग तीस से अधिक शोध पत्र एवं रिपोर्ट
* राष्ट्रीय स्तर की पत्र – पत्रिकाओं में पंद्रह सौ से अधिक वैज्ञानिक लेख और विविध रचनाएं प्रकाशित
* बीस विज्ञान कथाएं प्रकाशित
* आकाशवाणी से विज्ञान विषयक 150 वार्ताएं प्रसारित

* प्रकाशित पुस्तकें:
1 खेल, खिलाड़ी और विज्ञान। 2 लघुकथाएँ वैज्ञानिक की कलम से। 
3 वैज्ञानिकों के रोचक और प्रेरक प्रसंग। 4 मेरी रोचक एवं प्रेरक लघुकथाएँ
5 लघुकथा संग्रह – पैदायशी पागल

पुरस्कार एवं सम्मान :
( क ) संस्थागत
* वर्ष 1987 में ” सर्जन रिअर एडमिरल एम एस मल्होत्रा रिसर्च प्राइज़”
* वर्ष 2002 में वैज्ञानिक कार्यों में सर्वोत्तम योगदान और सहयोग के लिए ” डॉ जे सेनगुप्ता अवार्ड “;
* वर्ष 2005 में वैज्ञानिक और तकनीकी समन्वय और उसके जन – प्रसार के लिए ” निदेशक पुरस्कार से सम्मानित
(ख ) राष्ट्रीय / अंतरराष्ट्रीय :
* वर्ष 1988 – 1990 के दौरान महामंत्री,केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद्, नई दिल्ली
* देश के विभिन्न नगरों में स्थित संस्थानों में राजभाषा संबंधी आयोजनों में निरंतर शिरकत
* केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की राजभाषा कार्यान्वयन समितियों में वर्ष 1988 – 1996 तक सहभागिता.
* हिंदी विज्ञान साहित्य परिषद्, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा उत्कृष्ट विज्ञान लेखन हेतु पुरस्कृत। * विज्ञान परिषद् प्रयाग,
इलाहाबाद द्वारा ” विज्ञान वाचस्पति ” की मानद उपाधि एवं ” व्हीटेकर पुरस्कार। * केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद् , नई दिल्ली द्वारा हिंदी
के प्रचार – प्रसार में उल्लेखनीय योगदान हेतु पूर्व राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैल सिंह के कर कमलों से सम्मानित। * वर्ष 2009 के “आत्माराम
पुरस्कार ” से पूर्व राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के कर कमलों से सम्मानित। * ‘ विज्ञान प्रगति ‘ पत्रिका की सलाहकार समिति
का मानद सदस्य ( 2004 – 2006 )। * विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए विज्ञान परिषद् प्रयाग द्वारा ” विज्ञान परिषद् प्रयाग शताब्दी सम्मान ” – 2012
* युवा हिंदी संस्थान, अमेरिका द्वारा हिंदी में विज्ञान लेखन हेतु दिसंबर 2012 में न्यू जर्सी में सम्मानित। * जुलाई 2014 में ‘ विश्व हिंदी ज्योति, कैलिफ़ोर्निया
शाखा की सांस्कृतिक संध्या के शुभ अवसर पर हिंदी सेवा के लिए सम्मानित *पर्वतीय लोकविकास समिति,नई दिल्ली द्वारा उत्तरायणी महोत्सव – 2014 में 
” पर्वत गौरव सम्मान ” * मई 2015 में ‘ इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए ‘ के 250वें अंक के लोकार्पण के अवसर पर ” सर सी वी रामन् विज्ञान संचार सम्मान “
* दसवें विश्व हिंदी सम्मलेन में ‘ विज्ञान क्षेत्र में हिंदी ‘ विषय पर समानांतर सत्र में ‘ हिंदी में विज्ञान संचार और रक्षा विज्ञान ‘ विषय पर वार्ता

सम्प्रति : राजभाषा के प्रचार – प्रसार, विज्ञान के लोकप्रियकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े मामलों में निरंतर योगदान !

संपर्क :  द्वारका, नई दिल्ली 

 

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