नारी हूँ मै

नारी हूँ मै
पूरक भी मै
समर्पण भी
श्रंगार हूँ ,जीवन दर्शन भी
नारी हूँ मै
ममतामयी,करुणामयी
मोहक मादक रसधार भी मै
पल्लव पल्लव सिंचित करती
हूँ नवसृजन का आधार भी
नारी हूँ मै
कोमल हूँ कमजोर नहीं
सबला हूँ मै लाचार नहीं
तोडती तटबंध वर्जनाओं के
हूँ नभ में चमकता सूर्य भी
नारी हूँ मै
मर्यादा हूँ शालीनता भी
घर की इज्ज़त ,सुन्दरता भी
चंदन की शीतलता मुझमे
हूँ भड़कती ज्वाला भी
नारी हूँ मै
हर रिश्ते में ढल जाती हूँ
बन मोम पिघल सी जाती हूँ
संघर्षों से ना डरने वाली
हूँ झांसी की रानी भी
नारी हूँ मै
ममता का आँचल लहराती
पत्नी बन जीवन महकाती
बेटी हूँ लक्ष्मी भी मै
सृष्टी का अवलम्ब भी
नारी हूँ मै
हूँ शब्द भी आवाज़ भी
लेखनी सशक्त दमदार भी
रस छन्द अलंकार मुझमे
साहित्य का श्रंगार भी
नारी हूँ मै
धरा से आकाश तक
शिखर से सिन्धु तक
विस्तार ही विस्तार हूँ
मै सत्य हूँ अभिमान भी
नारी हूँ मै
भावना के पंथ पर
ह्रदय का स्पंदन हूँ
गर्व हूँ मै देश का
मान की अधिकारिणी
नारी हूँ मै

 
- डॉ शिप्रा शिल्पी

जन्मतिथि और स्थान -१४ दिसम्बर , बहराइच [उत्तरप्रदेश]

वर्तमान निवास : कोलोन ,जर्मनी

शिक्षा -  एम.ए ,एल.एल.बी, पीएच.डी [हिन्दी साहित्य ,इलक्ट्रोनिकमीडिया ]

रंगमंच ,मीडिया लेखन ,डेक्स टॉप पब्लिशिग में डिप्लोमा

कार्यअनुभव :

……………..: पूर्व  लेक्चरर, स्नातकोत्तर महाविद्यालय

……………..: लखनऊ दूरदर्शन में संचालक ,पटकथा लेखन , वृतचित्र निर्माण,साक्षात्कार             विज्ञापन एवं कुकीज लेखन

…………….: राष्ट्रीय फीचर्स नेटवर्क द्वारा चित्रकथाओ एवं आवरण पृष्ठों का रेखांकन लेखन की सभी विधाओं ,भारतीय पारंपरिक नृत्य एवं चित्रकला में अभिरुचि

उपलब्धियाँ…१- ‘साहित्यगौरव’ एवं उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक विभाग द्वारा “युवासम्मान” आदि कई सम्मानोँ से सम्मानित

२- देश-विदेश की अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओँ मेँ रचनाओँ का निरन्तर  प्रकाशन

३- कई साझा संग्रहोँ मेँ रचनाएँ प्रकाशित

सम्पादन- अक्षरबंजारे, मीठी सी तल्खियां ,मोँगरे के फूल (साझा काव्य संग्रह)  (प्रकाशाधीन)

सम्प्रति …..: वर्तमान में जर्मनी के कोलोन शहर में हिन्दी क्लब द्वारा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय सहभागिता

 

One thought on “नारी हूँ मै

  1. पिछले यूपी चुनाव में 45 दिन कवरेज के दौरान बहराइच गया था। गंजे-शहीदां बचपन में कभी पढ़ा था, जो वहां देखने को मिला। गाजी मियां की दरगाह। आपको तो पता ही होगा कि वह महमूद गजनवी का भांजा था-सालार मसूद, जो करीब एक लाख फौज के साथ यहां उन दिनों आया था, जब खुद मेहमूद लगातार 17 साल तक भारत पर हमले कर रहा था। श्रावस्ती के राजा सुहैल देव ने एक जबर्दस्त जंग में मसूद को उसकी फौज समेत मारा था। कालांतर में उसकी कब्र एक सूफी संत के रूप में मशहूर हो गई। मेरी किताब भारत की खोज में मेेरे पांच साल में यह वाकया यूपी के अध्याय में दर्ज है। किताब अभी छपकर आई है। अमेजन पर है। आपकी कविता पढ़ी। अच्छी लगी। परिचय में बहराइच देखा तो अपनी यात्रा याद आ गई। शुक्रिया..

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