नादान

एक वो दिन थे ,
जब समझदार होने के लिए ,
हम हो रहे थे  बड़े ।
तब क्लास में किसी का परांठा ,
चुरा कर  खाना ,
स्कूल न जाने के लिए ,
वो पेट दर्द का बहाना ,
खेल में हार जाने पर ,
मुंह फुला  लेना ,
तितली ,कंचे ,पतंग ,
कार्टून की वो दीवानगी ,
ये सब हमारी नादानियाँ ,
कही जाती थीं ।
तब उम्मीद थी हमसे की ,
इस नादान समय को पीछे छोड़ ,
हम हो  जाएंगे समझदार !
आज समझदारियों के तेल से ,
जगमगा चुके हैं अक्ल के चिराग !
तो फिर ये दिल क्यों दुबारा –
वही नादानियाँ करने को ,
नादान बनने को मचलता है ।I

 

- डॉ संगीता गांधी 

शिक्षिका व लेखिका  , नयी दिल्ली। 

शिक्षा - बी ए ऑनर्स ,एम् ए हिंदी । एम् फिल ,पी एच डी ।

शोध कार्य -
1   पाली -सम्वेदना और शिल्प ।
2   अमृतलाल नागर जी के उपन्यासों में सांस्कृतिक बोध ।
प्रकाशन -नवप्रदेश ,ट्रू टाइम्स ,लोकजंग ,दैनिक  नव एक्सप्रेस , समाज्ञा ,हमारा मैट्रो  ,वर्तमान अंकुर , विमेन एक्सप्रेस ,साप्ताहिक अकोदिया सम्राट ,झांब न्यूज़ ,दैनिक पब्लिक इमोशन ,अद्भुत इंडिया ,दैनिक गज केसरी, पत्रों में कविताएं ,लघुकथाएं व कहानियां प्रकाशित ।
शैल सूत्र ,निकट ,ककसाड़,दृष्टि ,शेषप्रश्न ,अट्टहास ,पर्तों की पड़ताल ,सत्य की मशाल , नारी तू कल्याणी ,प्रयास ,सन्तुष्टि सेवा मासिक,अनुभव,अनुगुंजन ,सलाम दुनिया आदि पत्रिकाओं में कविता , लघुकथा , लेख प्रकाशित ।
नए पल्लव 2 संग्रह में लघुकथाएं प्रकाशित
मुसाफिर साझा काव्य संग्रह 
सहोदरी सोपान 4 काव्य संग्रह 
सहोदरी सोपान 4 लघुकथा संग्रह ।
हिंदी लेखक .कॉम ,साहित्यपिडिया ,प्रतिलिपि.कॉम ,लिटरेचर पॉइंट ,स्टोरी मिरर ,जय विजय .कॉम ,हिंदी कुंज.कॉम ,कथांकन.कॉम  ,अटूट बन्धन ,मातृ भारती .कॉम पर  रचनाएं प्रकाशित ।कथांकन .कॉम द्वारा कहानी ‘ समय का अंतराल ‘  यू ट्यूब पर  प्रस्तुत ।

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