दोसर देसवा

बबुनी रेवे रेवे जनि करS कार

जाए के बा दोसर देसवा

जहवा मिलिहे नाया संसार

जाए के बा दोसर देसवा

माई बाबु के बा नाया अवतार

जाए के बा दोसर देसवा

               सबके तू राखिय ख्याल

               जाए के बा दोसर देसवा

               मन तबे ख़ुशी होई हमार 

               हसत बोलत रहबू  देसवा

               पिरितिया के नाया नाता मिली

उहे देसवा आपन कहाई

सुनS तारु ये बबुनी हमार

बबुनी करल करS हाली हाली कार

आदत उहो बनल रही अईसे

काहे की जाए के बा दोसर देसवा

               माई रूपी सास मिलिहे

               बाबु रूपी मिलिहे ससुर

               भाई रूपी देवर मिलिहे

               बहिन रूपी ननदों

               सबका से नेही मिलेमउहाके

उहा रहन सहन फरका जे होई

सिखी जईहS बबुनी हमार

जाए के बा दोसर देसवा

सब होईये आपन उहवो

मनवा के जनि करिह उदास

 

- प्रिंस रितुराज

ये रचनाकार के रूप में अपना हुनर दिखाना चाहते हैं। 
दिल्ली से छपने वाली भोजपुरी/हिंदी पत्रिकाओं में इनकी रचना प्रकाशित होती रहती है। 
वर्तमान में ये भारत में हैं।

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