दुनिया बची रहेगी

 

मैंने लिखा धरती,
उसने पढ़ा माँ
मैंने लिखा प्रकृति,
उसे ध्यान आया सहोदर,
मैंने लिखा चाँद,
उसने देखी रोटी,
मैंने लिखा सरकार,
उसने समझा न्याय.
मैंने लिखा पलास,
उसने समझा प्रेम फिर क्रान्ति,
मैंने लिखा, लिखा कई बार लिखा…
दुनिया बची रहेगी.

 

-डॉ अनुज कुमार


हिंदी ऑफिसर 
नागालैंड विश्वविद्यालय

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