त्रिलोक सिंह ठकुरेला की मुकरियाँ

जब भी देखूं , आतप हरता ।
मेरे मन में  सपने भरता ।
जादूगर है , डाले फंदा ।
क्या सखि,  साजन ? ना सखि , चंदा।
लंबा कद है , चिकनी काया ।
उसने सब  पर  रौब जमाया ।
पहलवान भी पड़ता ठंडा ।
क्या सखि, साजन ?  ना सखि , डंडा ।
उससे सटकर , मैं सुख पाती ।
नई ताज़गी मन में  आती ।
कभी न मिलती उससे झिड़की ।
क्या सखि, साजन ?  ना सखि , खिड़की ।
जैसे चाहे  वह तन छूता ।
उसको रोके , किसका बूता ।
करता रहता अपनी मर्जी ।
क्या सखि, साजन ? ना सखि  , दर्जी ।
कभी किसी की धाक  न माने।
जग की सारी बातें जाने ।
उससे हारे सारे ट्यूटर ।
क्या सखि, साजन ? ना  ,  कंप्यूटर ।
यूँ तो हर  दिन साथ  निभाये।
जाड़े में कुछ ज्यादा भाये ।
कभी कभी बन जाता चीटर ।
क्या सखि, साजन ?  ना  सखि , हीटर ।

देख देख कर मैं हरषाऊँ ।
खुश होकर के अंग लगाऊं ।
सीख चुकी मैं सुख-दुख सहना।
क्या  सखि, साजन ?  ना सखि ,गहना ।

दिन में  घर के  बाहर  भाता ।
किन्तु  शाम को घर में लाता ।
कभी पिलाता तुलसी काढ़ा ।
क्या सखि, साजन ?  ना  सखि , जाड़ा ।
रात दिवस का साथ हमारा ।
सखि , वह मुझको लगता प्यारा ।
गाये गीत कि नाचे पायल ।
क्या सखि , साजन ?  ना  , मोबाइल ।
मन बहलाता जब ढिंग होती ।
खूब लुटाता खुश हो मोती ।
फिर भी प्यासी मन की गागर ।
क्या सखि,  साजन ? ना सखि , सागर ।
बार बार वह पास बुलाता ।
मेरे मन को खूब रिझाता ।
खुद को उस  पर करती अर्पण ।
क्या सखि, साजन ?  ना सखि , दर्पण।
बड़ी अकड़ से  पहरा देता ।
बदले में कुछ कभी न लेता ।
चतुराई  से खतरा टाला ।
क्या सखि, साजन ?  ना सखि , ताला ।
दाँत  दिखाए ,  आँखें मींचे ।
जब चाहे  तब कपड़े खींचे ।
डरकर  भागूं  घर  के अंदर ।
क्या सखि ,गुंडा ?  ना सखि , बंदर ।
वादे करता , ख्वाब दिखाये ।
तरह तरह से मन समझाये ।
मतलब साधे , कुछ ना  देता ।
क्या सखि, साजन ?  ना सखि , नेता ।
रस लेती मैं उसके रस में ।
हो जाती हूँ उसके वश  में ।
मैं खुद उस पर जाऊँ  वारी ।
क्या सखि, साजन ? ना  , फुलवारी ।
बल उससे ही मुझमें आता ।
उसके बिना न कुछ भी भाता ।
वह न मिले तो व्यर्थ खजाना ।
क्या सखि,  साजन ? ना  सखि , खाना ।
चमक दमक पर उसकी वारी ।
उसकी चाहत सब पर  भारी ।
कभी न चाहूँ उसको खोना ।
क्या सखि, साजन ? ना सखि, सोना ।

- त्रिलोक सिंह ठकुरेला

 

जन्म-स्थान —– नगला मिश्रिया ( हाथरस )

प्रकाशित कृतियाँ — 1. नया सवेरा ( बाल साहित्य )

2. काव्यगंधा ( कुण्डलिया संग्रह )

सम्पादन — 1. आधुनिक हिंदी लघुकथाएँ 
2. कुण्डलिया छंद के सात हस्ताक्षर 
3. कुण्डलिया कानन

सम्मान / पुरस्कार — 1. राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा ‘शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार ‘
2. पंजाब कला , साहित्य अकादमी ,जालंधर ( पंजाब ) द्वारा ‘ विशेष अकादमी सम्मान ‘
3. विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ , गांधीनगर ( बिहार ) द्वारा ‘विद्या- वाचस्पति’ 
4. हिंदी साहित्य सम्मलेन प्रयाग द्वारा ‘वाग्विदाम्वर सम्मान ‘
5. राष्ट्रभाषा स्वाभिमान ट्रस्ट ( भारत ) गाज़ियाबाद द्वारा ‘ बाल साहित्य भूषण ‘
6. निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान , बस्ती ( उ. प्र. ) द्वारा ‘राष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान’ 
7. हिंदी साहित्य परिषद , खगड़िया ( बिहार ) द्वारा स्वर्ण सम्मान ‘

विशिष्टता — कुण्डलिया छंद के उन्नयन , विकास और पुनर्स्थापना हेतु कृतसंकल्प एवं समर्पित

सम्प्रति — उत्तर पश्चिम रेलवे में इंजीनियर

संपर्क —- आबू रोड -307027 ( राजस्थान )

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