जाला

नीलांजना का बुखार था कि छूटने का नाम नहीं ले रहा था। खाँसी का दौरा पड़ता तो साँस जैसे रुक जाती। ऐसे कष्ट से बेहतर है कि मौत आ जाए। क्या सुख मिला है इस घर में? रात–दिन बाँदी की तरह खटो फिर भी ज़रा–सा सुख नहीं। पति समीर को काम से ही फुर्सत नही, दो घड़ी पास में बैठकर बात तो क्या करेंगे? आज सुबह से ही गायब हैं।

बुखार और तेज हो गया है। रह–रहकर उसका जी रोने को चाह रहा है। आँखें मुँदी जा रही हैं। सब कुछ धुँधला नज़र आ रहा है। वह जैसे एक ऊँचे पहाड़ से नीचे लुढ़क गई है। उसकी चीख निकल गई। वह घिघियाई…मैं नहीं बचूँगी।’’

उसके माथे पर कोई ठण्डे पानी की पट्टी रख रहा है। वह सुबक रही है। किसी ने रूमाल से उसकी आँखें पोंछ दी हैं। कुछ उँगलियाँ उसके बालों को सहला रही हैं। उसे अजीब–सा सुकून मिल रहा है। वह सहलाने वाली उँगलियों को दोनों हाथों से दबोच लेती है।

जब उसकी आँख खुली–दो कोमल हाथ उसका माथा सहला रहे थे। उसकी दृष्टि सामने दीवार पर लगी घड़ी पर पड़ी, साफ दिख रहा है…..बारह बज गए, रात के बारह बजे!

उसने गर्दन घुमाई। सिरहाने समीर बैठा है। घोर उदासी चेहरे पर पुती है। आज तक उसको इतना उदास कभी नहीं देखा।

‘‘अब कैसी हो नीलांजना?’’ उसने भर्राई आवाज़ में पूछा।

‘‘मैं ठीक हूँ समीर। तुम पास में हो तो मुझे कुछ नहीं हो सकता……’’ नीलांजना के होठों पर मुस्कान बिखर गई।

 

- रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

 

जन्म: 19 मार्च

शिक्षा : एम ए-हिन्दी (मेरठ विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में) , बी0 एड्0 ।

प्रकाशित रचनाएँ :‘माटी,पानी और हवा’,'अंजुरी भर आसीस’,'कुकडूँ कूँ’,'हुआ सवेरा’)(कविता संग्रह),मेरे सात जनम (हाइकु -संग्रह), मिले किनारे (ताँका और चोका संग्रह संयुक्त रूप से डॉ हरदीप सन्धु के साथ), झरे हरसिंगार(ताँका-संग्रह)’धरती के आँसू’,'दीपा’,'दूसरा सवेरा’ (लघु उपन्यास),’असभ्य नगर’(लघुकथा संग्रह),खूँटी पर टँगी आत्मा( व्यंग्य –संग्रह),भाषा-चन्दिका (व्याकरण ) ,रूम टू रीड इण्डिया से  मुनिया और फुलिया (बालकथा हिन्दी और अंग्रेज़ी), झरना ,सोनमछरिया, कुआँ(पोस्टर कविता छोटे बच्चों के लिए ) , रोचक बाल कथाएँ प्रकाशित  ,अनेक संकलनों में लघुकथाएँ संकलित तथा गुजराती,पंजाबी,उर्दू ,अंग्रेज़ी एवं नेपाली में अनूदित। देश -विदेश की विभिन्न -पत्र-पत्रिकाओं में विगत 43 वर्षों से रचनाएँ प्रकाशित ।लोकल कवि का चक्कर (आकाशवाणी  जबलपुर से  नाटक का प्रसारण ) । मुनिया और फुलिया (बालकथा – अंग्रेज़ी) इटली के बाल पुस्तक मेले के लिए भारत  से दो बार चयनित ।

सम्पादन:आयोजन(बरेली लघुकथा सम्मेलन 1989),नैतिक कथाएँ(पाँच भाग), भाषा-मंजरी (आठ भाग),चन्दनमन (18 रचनाकारों का प्रतिनिधि हाइकु संकलन),गीत सरिता(बालगीत-3भाग),बालमनोवैज्ञानिक लघुकथाएँ ,मानव मूल्यों की लघुकथाएँ एवं लघुकथाएँ-मेरी पसन्द  (श्री सुकेश साहनी के  साथ), ‘एक दुनिया इनकी भी ( बालकथा-संग्रह 2 भाग), भावकलश(29 कवियों का  ताँका -संग्रह-डॉ भावना कुँअर के साथ) , यादों के पाखी ,(हाइकु-संग्रह), अलसाई चाँदनी ( सेदोका -संग्रह)का प्रकाशन ।

www.laghukatha.com ( 40 देशों में देखी जाने वाली लघुकथा की एकमात्र वेब साइट), http://patang-ki-udan.blogspot.com/ (बच्चों के लिए ब्लॉगर), 88 देशों में प्रसारित  हिन्दी हाइकु (आस्त्ट्रेलिया)wwwhindihaiku.net के तथा त्रिवेणी  http://trivenni.blogspot.com ( हिन्दी का तांका ,हाइगा और चोका-जापानी छन्द का एक मात्र ब्लॉग) के डॉ हरदीप कौर सन्धु के साथ सहयोगी सम्पादक;हिन्दी चेतना (हिन्दी प्रचारिणी सभा कनाडा की  विश्व भर में प्रसारित त्रैमासिक) के सह -सम्पादक ।

वेब साइट पर प्रकाशन:रचनाकार ,अनुभूति, अभिव्यक्ति,हिन्दी नेस्ट,साहित्य -कुंज ,लेखनी,इन्द्र- धनुष ,उदन्ती ,कर्मभूमि, हिन्दी गौरव ,गर्भनाल आदि ।

प्रसारणआकाशवाणी गुवाहाटी ,रामपुर, नज़ीबाबाद ,अम्बिकापुर एवं जबलपुर से ।

निर्देशन: केन्द्रीय विद्यालय संगठन में हिन्दी कार्यशालाओं में विभिन्न स्तरों पर संसाधक(छह बार) ,निदेशक (छह बार) एवं  केन्द्रीय विद्यालय संगठन के ओरियण्टेशन के फ़ैकल्टी मेम्बर के रूप में कार्य; एन बी टी द्वारा सर्जनात्मक लेखन की कार्यशाला (चण्डीगढ़), पठन अभिरुचि के प्रोत्साहन हेतु कार्यशाला ( ऊना हिमाचल) , बी एड शिक्षकों के लिए  शिक्षण की परिचर्चा ( गिरडीह)के लिए संसाधक रूप में प्रतिनियुक्त ।

सेवा :  7 वर्षों तक उत्तरप्रदेश के विद्यालयों तथा 32 वर्षों तक केन्द्रीय विद्यालय संगठन में कार्य ।  केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य पद ( 19 फ़रवरी1994- 31 अगस्त 2008) से सेवा निवृत्ति।

सम्प्रति: स्वतन्त्र लेखन ।

सम्पर्क:-  नई दिल्ली-110085

 

 

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