जलकुंभी

जलकुंभी
तालाब में बह आयी
हाय रे
किसी ने देखा नहीं
देखा भी तो
निकाला नहीं
वह फैलती ही गई
एक नाबालिग जलकुंभी
पहले माँ बनी
फिर दादी
फिर पर दादी
और भी रिश्तें जुड़ते गये
तलाब का सारा बदन
पूरी तरह से
ढक गया
जलकुंभी ने
तालाब को
कस के जकड़ लिया है
और फैलती ही जा रही है
अब चिड़ियों का जल-पात्र
जलकुंभी से छिपता जा रहा है
विशाल तालाब का अस्तित्व
अब मिटा जा रहा है
अब वह (तालाब) चिड़ियों को
हरे-भरे खेत-सा मालूम होता है
और बेचारी चिड़िया
दिन भर प्यासी
मारी-मारी फिर रही
अपना जलपात्र
ढूँढ रही हैं
दौड़-दौड़ कर
उसी तरफ जा रही
जहाँ
अब खेत है
तालाब
अब खेत बन चुका है

 
- अमन चाँदपुरी


जन्मतिथि- 25 नवम्बर

शिक्षा – स्नातक

लेखन विधाएँ– दोहा, ग़ज़ल, हाइकु, क्षणिका, मुक्तक, कुंडलिया, समीक्षा, लघुकथा एवं मुक्त छंद कविताएँ आदि

प्रकाशित पुस्तकें – ‘कारवान-ए-ग़ज़ल ‘ ‘दोहा कलश’ एवं ‘स्वर धारा‘ (सभी साझा संकलन)

सम्पादन – ‘ दोहा दर्पण ‘

प्रकाशन – विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा वेब पर सैकड़ों रचनाएँ प्रकाशित

सम्मान – प्रतिभा मंच फाउंडेशन द्वारा ‘काव्य रत्न सम्मान‘, समय साहित्य सम्मेलन, पुनसिया (बांका, बिहार) द्वारा ‘कबीर कुल कलाधर’ सम्मान, साहित्य शारदा मंच (उत्तराखंड) द्वारा ‘दोहा शिरोमणि’ की उपाधि, कामायनी संस्था (भागलपुर,  बिहार) द्वारा ‘कुंडलिया शिरोमणि’ की मानद उपाधि, उन्मुख साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा ‘ओमका देवी सम्मान’ एवं तुलसी शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा ‘संत तुलसी सम्मान’ से सम्मानित
 विशेष – फोटोग्राफी में रुचि। विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं तथा वेब पर फोटोग्राफस प्रकाशित

पता – ग्राम व पोस्ट- चाँदपुर तहसील- टांडा,जिला- अम्बेडकर नगर (उ.प्र.) 

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