नवगीत: जय-जय कन्हैया लाल की

लिख रही हैं यातनायें
अनुभवों से
लघुकथायें -
मौसम-घड़ी-दिक्काल की !
जय-जय कन्हैया लाल की !!

शासकों के चोंचले हैं
लोग गोवर्द्धन उठायें
हम लुकाठी
ले खड़े हैं
चोंच में आकाश पायें

शातिर सदा पद
इन्द्र का
जो सोचता बस चाल की..
जय-जय कन्हैया लाल की !!

अब उफनती
है न जमुना
कालिया मथता अड़ा है
चेतना लुंठित-बलत्कृत
देह-मन
लथपथ पड़ा है

कुब्जा पड़ी हर घाट पर
किसको पड़ी है
ताल की !
जय-जय कन्हैया लाल की !!

नत कमर ले
शांत रहना
पीढ़ियों का सच यही है
कंस फिर पंचायतों में
भाग्य का षडयंत्र भी है.

फिर से जरासंधी-मिलन,
चर्चा हुई है जाल की
जय-जय कन्हैया लाल की !!

क्या गजब हो इस घड़ी जो
साध ले जग
वो हृदय हो
किन्तु यह भी है असंभव
घात-प्रतिघाती सदय हो

जब पूतना की गोद है,
फिर क्या कहें ग्रहचाल की !
जय-जय कन्हैया लाल की !!

 
- सौरभ पाण्डेय

जन्मतिथि : 3 दिसम्बर 

शिक्षा : बी.एस.सी (गणित), डिप. इन सॉफ़्टवेयर, डिप. इन एक्स्पोर्ट मैनेजमेण्ट, एमबीए.

पुस्तकें : परों को खोलते हुए शृंखला (सम्पादन), इकड़याँ जेबी से (काव्य-संग्रह), छन्द-मञ्जरी (छन्द-विधान)

प्रकाशन : राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा ई-पत्रिकाओं में, अनेक सम्पादकों के संकलन में रचनाएँ सम्मिलित.

सम्बद्ध मंच : प्रबन्धन सदस्य, ई-पत्रिका ओपनबुक्सऑनलाइन; सदस्य, प्रमर्शदात्री समूह, विश्वगाथा (त्रैमासिक)

पता :  नैनी, इलाहाबाद  (उप्र)

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