जंजीर

साहब बचा लो मुझे प्लीज़ बचा लो !! कसम से आगे से यह गन्दा काम नहीं करूँगा !!

साले, अब बचा लो , तब बड़ी जवानी फूट रही थी तेरी !!वकील श्याम जेल के एक कोने में उस व्यक्ति से उलझ रहा था जो कि बहुत मालदार लग रहा था और अभी अभी एक लड़की के रेप पकड़ा गया था।

बता कैसे बचा लूँ तुझे, हर सबूत तो तेरे खिलाफ जा रहा है

मैं जानता हूँ साहब आप बड़े वकील है आप कुछ न कुछ करके मुझे जरूर बचा लेंगे ”

अच्छा बता कहाँ किया तूने यह काम ?और फिर इधर उधर देख के आँख मार के बोला “लड़की कैसी थी ?”मजेदार थी क्या बहुत ?पूछते हुए वकील की आँखों में भी वहशीपन उभर आया और होंठो पर शैतानी मुस्कान।
अरे साहब !!वही तो सच में क्या माल थी , बस देखते ही दिमाग सटक गया मेरा। कोशिश तो बहुत की उसने बचने की मुझसे ,खूब छीना झपटी करनी पड़ी ,उसी में न जाने मेरी एक मोटी सोने की जंजीर भी गिर गयी कहीं ,पर उसको छोड़ो आप को जितनी फीस चाहिए ले लो उम्मीद से अधिक दूंगा बस इस बार बचा लो ,देख भाई !! निर्भया काण्ड के बाद बहुत मुश्किल हो गया है इस तरह के केस हैंडल करना ,पब्लिक जज कोई भी वकील को भी नहीं छोड़ता जो इस तरह के केस लेता है। खैर तू बचना चाहता है तो तगड़ी रकम देनी पड़ेगी मुझे ,मैं देखता हूँ कैसे बचा सकता हूँ तुझे।

हाँ हाँ वकील साहब ! आप हुक्म करो मुह मांगी रकम दूंगा आपको आप बस यह केस ले लो।

वकील श्याम कुछ सोच के बोला ,ठीक है फिर कल आता हूँ ,तू बोल दे अपने घर वालों को रकम के लिए

घर की तरफ जाते हुए श्याम को सिर्फ हरे हरे नोट दिख रहे थे और होंठो पर कुटिल मुस्कान। बिन माँ की बेटी की शादी को अच्छे से करने के लिए कुछ तो रकम इकट्ठा हो जाएगी सोचते हुए वह घर पहुंचा पर घर के अंदर घुसते ही उसके होश उड़ गए जब उसने अपनी जवान खूबसूरत बेटी को पंखे पर झूलते हुए देखा और उसके हाथ में सोने की एक मोटी जंजीर दबी हुई लटक रही थी !

 
- रंजू भाटिया


जन्म: १४ अप्रैल

अनुभव : १२ साल तक प्राइमरी स्कूल में अध्यापन दो वर्ष तक दिल्ली के मधुबन पब्लिशर में काम जहाँ प्रेमचन्द के उपन्यासों और प्राइमरी हिंदी की पुस्तकों पर काम किया सम्राट प्रेमचंद के उपन्यासों की प्रूफ़-रीडिंग और एडीटिंग का अनुभव प्राप्त हुआ।

प्रकाशन : दो निजी काव्य संग्रह “कुछ मेरी कलम से ( हिन्द युग्म प्रकाशन ) साया ( अयन प्रकाशन ) साझे काव्य संग्रह पगडण्डीयाँ (का संपादन ) पुष्प पांखुरी। स्त्री हो कर सवाल करती है ,नारी विमर्श ,काव्य संग्रह गुलमोहर ( हिन्द युग्म प्रकाशन ) सिर्फ तुम (आगमन )आदि हैं
दैनिक जागरण ,अमर उजाला ,नवभारत टाइम्स ऑनलाइन भाटिया प्रकाश मासिक पत्रिका, हरी भूमि ,जन्संदेश लखनऊ आदि में लेख कविताओं का प्रकाशन ,हिंदी मिडिया ऑनलाइन ब्लॉग समीक्षा

सम्मान …..उपलब्धियां :
2007 तरकश स्वर्ण कलम विजेता
२००९ में वर्ष की सर्व श्रेष्ठ ब्लागर एसोसेशन अर्वार्ड २०११ में हिंद युग्म शमशेर अहमद खान बाल साहित्यकार सम्मान २०१२ में तस्लीम परिकल्पना सम्मान चर्चित महिला ब्लागर

 

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