जंगल में महासभा

आज जंगल में एक महासभा होने वाली है । जंगल के सभी जीव-जन्तु जंगल के सबसे ऊंचे टीले की तरफ भागे जा रहे हैं । इन जीवों में सभी प्रकार के जीव-जन्तु हैं । जिनमें कुछ मांसाहारी, कुछ शाकाहारी, कुछ उड़ने वाले, कुछ रेंगने वाले और कुछ फुदकनें वाले । सभी एक-दूसरे से आगे निकलने की होड में हैं ।

यह महासभा किसी और ने नही बल्कि जंगल के शाकाहारी जीवों को हिंसक जीवों से बचाने के लिए खरगोश ने बुलाई थी । कुछ ही समय में वहां उस मचान के चारों तरफ सभी प्रकार के जीव एकत्रित होने लगे । कुछ ही समय में वहां पर सभी प्रकार के जीव जैसे कि – मोर, कबूतर, मैना, कोयल, हंस, गीदड़, लोंभा, भेडि़ये, जंगली गधे, आदि और भी अन्य प्रकार के जीव जन्तु एकत्रित हो गये ।

कुछ समय बाद वहां एकत्रित सभी जीव-जन्तुओं में कानाफूसी होने लगी । अब तक मचान पर कोई भी बोलने के लिए नही चढ़ा था । सभी सोच रहे थे कि हमारे घर यहां बुलाने के लिए नोटिस आखिर भेजा तो किसने भेजा । अब यहां पर वह खुद तो आया भी नही । तभी उनमें से एक सफेद खरगोश उछल कर मंचान पर जा चढ़ा और कहने लगा-

देखो भाईयों, यहां पर बुलाने के लिए मैंने ही तुम्हारे पास तुम्हारे घर पर वह लैटर भेजा था । आज आपको संबोधित करते हुए मुझे यह दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे जंगल में जो पंचायती राज है । उससे शायद ही कोई ऐसा आम जीव हो जो अछूता बचा है अन्यथा सभी को कष्ट झेलने पड़ रहे हैं । सभी जीव हमारे राजा से दुखी हैं ।

हमने जो राजा चुना था वह निरंकुश है । वह अपनी प्रजा को दुख में डालकर मजे से रह रहा है । वह अय्यासी करता है । किसी की भी मां-बहन को उठवाकर अपने घर मंगवा लेता है । आम जनता का खून चूस रहा है । कोई अपनी फरियाद भी लेकर जाये तो किसके पास । यदि कोई उसके पास जाता भी है तो उसे वह मारकर खा जाता है, या उसके जो मंत्री हैं । उसके साथ दुर्व्यवहार करके उसे मार देते हैं और खा जाते हैं । हम उनके इस अत्याचार से बहुत दुखी हो गये हैं ।

अब कि बार मेरा मानना है कि हमें उसके खिलाफ आवाज उठाकर उसे पदच्यूत कर देना चाहिए, और जंगल में राष्ट्रपति शासन लागू करा देना चाहिए, इससे ऊपर हाईकोर्ट में इस केस को लेजाकर वहां के मुख्य न्यायाधिश को यह ज्ञापन सौंप कर दोबारा से जंगल में इलैक्शन कराने की मांग करनी चाहिए। यह सुनकर कौआ बोला-

एक बताईये जनाब तो फिर हम जंगल का सरपंच चुने तो चुने किसे, क्योंकि मुझे लगता है कि हम जितने भी शाकाहारी जीव हैं । वो हम किसी भी मांसाहारी जीव से अपनी खुद रक्षा नही कर सकते हैं । फिर हमारी रक्षा कौन कर सकेगा । यदि कोई शाकाहारी जीव बना तो वह उसकी जनता अर्थात जंगली जीवों की मांसाहारी जीवों से कैसे रक्षा करेगा । कौवे की बात सुन गीदड़ कहने लगा -

मेरा जहां तक मानना है तो हमारा सरपंच शेर ही ठीक है, क्योंकि वह हम सभी जीवों की दूसरे बाहर वाले जीवों से रक्षा कर सकता है । अब वह हमारी रक्षा करता है तो उसे भी कुछ मेहनताना  चाहिए, और फिर उसके जो मेंबरगण हैं उनका पेट भरना भी उसकी जिम्मेदारी है । यह पद संभालना इतना आसान नही है । सबकी सुननी पड़ती है । उसकी बातों को सुनकर कोयल कहने लगी-

सुननी सबकी पड़ती है और करना कुछ नही । ये कैसा सरपंच है । आज हम औरत जाति का तो घर से निकलना ही दुर्भर हो गया है । पहले हमें कहीं भी जाने की पूरी आजादी थी और आज हम घर से निकलती भी हैं तो पूरे अदब के साथ निकलना पड़ता है । पूरे कपड़े पहनने के बावजूद भी हमें हवस का शिकार होना पड़ता हैं । हमारे बाहर निकलते ही कुछ मनचले कौवे हमें बीच राह पकड़ लेते हैं । जिनको हमारी तरफ देखने से भी डर लगता था आज वही जीव जैसे कि मोर, कबूतर तोते आदि हमपर कुदृष्टि जमाये रहते हैं । मैं तो कहती हूं कि ऐसे पंचायती राज को खत्म किया जाये, और नये शासन की व्यवस्था की जाये । उसकी बातें सुनकर पास ही बैठा बगुला कहने लगा-

देखो बहनजी, आप हम नर जीवों पर बेकार ही तोहमत लगा रही हैं । सारे नरजीव एक जैसे थोड़े ही होते हैं । मानता हूं कुछ स्वार्थी नरजीव हैं जो हमारी  बहने मादाजीवों को वासना की नजर से देखते हैं, पर सभी तो एक जैसे नही हैं ना । इसलिए जरा-सा ध्यान रखिये कि -आपकी बातों से किसी अन्य भाई को किसी भी प्रकार कोई परेशानी ना हो । यह सुन कर कोयल ने उससे और अन्य सभी जीवों से माफी मांगी ।

खरगोश उन सभी की बातों को ध्यान से सुन रहा था । वह उनसे कहने लगा-देखों भाईयो और बहनों, मैं मानता हूं कि इस पंचायती राज में हमारे समाज में बहुत से अपराध बढ़े हैं । इसलिए ही तो यह महासभा आज बुलाई गई है । हमें आपस में ना लड़कर इस समस्या का निदान सोचना है । यह सुनकर हंस कहने लगा -

अब  इस बात का क्या निदान हो सकता है । आपके विचार में क्या होना चाहिए । बताते हैं कि इस मामले में बगूले का दिमाग तेज चलता है । सो हमें उन्हीं से इस मसले पर विचार करना चाहिए । यह सुन कर बगुला कहने लगा -

मेरे हिसाब से तो इस समस्या से निदान पाने के लिए हमें फिर से चुनाव की घोषणा के लिए मुख्य न्यायाधीश को लिखना चाहिए । वो यहां पर एक बार फिर चुनाव कराये तो उसमें हम सबकी सहमति से एक हमारा भी उम्मीदवार हम सभी खड़ा करें और सारी की सारी वोट हमारे उम्मीदवार के पक्ष में डालें । शेर की पूरी तरह से हार होनी चाहिए । तभी हमें इससे छुटकारा मिल सकता है । यदि आप मेरी बात से सहमत हो तो अपना कोई भी एक उम्मीदवार चुन लो और न्यायाधीश के पास लैटर में फिर से चुनाव की घोषणा बारे जिक्र कर भेज दो । यह सुनकर उल्लू कहने लगा -

मैं भाई बगुले की बातों से सहमत हूं । पर ये बात तो बताओ कि- अब कि बार फिर से इलैक्शन होगा तो हम उसके अपोजिट में खड़ा किसे करेंगे ?

सभी जीव आपस में बात करने लगे । यह देख खरगोश उस टीले पर खड़ा सभी को शांत करते हुए बोला -

देखो आज हम सभी ने एक ऐसे जीव को चुनना है जो हमारी हर तरह से रक्षा करे, हमारे जंगल में हर वो काम करे, जिसकी हमें जरूरत है । तो बोलो ऐसा कोई है जो ईमानदारी से जंगल के कामों को करेगा ।

यह सुन सभी जीव एक-दूसरे की तरफ तांकने लगे । कोई कुछ भी कहने को तैयार नही कि वह जंगल का राज करना चाहता है । वहां पर चारों तरफ एक चुप्पी का माहौल छा गया । सभी चुपचाप एक-दूसरे को केवल देख रहे थे । बोलने को कोई भी तैयार नही था । उन्हें इस प्रकार से चुप देख कर खरगोश बोला -

जहां तक मैं जानता हूं । जंगल में सबसे विशाल जीव हाथी होता है । उसका नाम ही  जंगल के सरपंच पद के लिए अनांउंस कर आगे भेजना चाहिए । यह सुन हाथी खड़ा हुआ और हाथ जोड़कर कहने लगा -

खरगोश भाई, मैं आपका यह बड़प्पन मानता हूं कि आपने सरपंच पद के लिए मुझे चुना, पर मेरे अन्दर भी कई खामियां  है जो कि मुझे इस काम के लिए पूर्णतया तैयार नही करती । जैसे कि मैं डीलडौल हूं, सरपंच बनने के बाद और भी ज्यादा मोटा हो जाऊंगा और जंगल के जानवर मुझपर रिश्वत का आरोप लगायेंगे कि मैंने जंगल को संवारने के लिए आई ग्रांट खाकर तोंद बढ़ा ली । इस काम के लिए कोई ईमानदार ही जीव चुनों । मुझसे नही होगा । मुझे रहने दो । खरगोश कहने लगा -

लोमड़ी तुम ही सरपंच पद के लिए खड़ी हो जाओ, क्योंकि तुम भी सभी जीवों में चतुर भी हो और तेज दौड़ने वाली भी हो । तुम अच्छे से शासन को संभाल सकती हो । यह सुन लोमड़ी अदब से खड़ी होकर कहने लगी -

भाई खरगोश, मैं आपका ऐहसान मानती हूं कि आपने मुझे इस लायक समझा । पर जैसा कि भाई हाथी ने कहा है कि उसके अन्दर कुछ खामियां हैं जो उसे इस पद के लिए सही नही मानती हैं । उसी प्रकार से मेरे अन्दर भी कुछ कमियां हैं । जैसे कि मैं मांसाहारी हूं । अब घास फूंस से तो मैं अपना पेट नही भर सकती । मैं भी इस पद के लायक नही हूं । उसकी इन बातों को सुनकर खरगोश ने हिरण की तरफ आशा भरी नजरों से देखा । उसकी दृष्टि को देखते ही हिरण समझ गया कि वह उसे सरपंच बनने के लिए कह रहा है हिरण भी  उठ खड़ा हुआ और कहने लगा -

मैं मानता हूं कि खरगोश भाई, आप मुझे सरपंची के लिए कह रहे हैं । मैं खूब तेज दौड़ भी लेता हूं और शाकाहारी भी हूं । मैं अपनी तरफ से किसी भी जंगलवासी को किसी भी प्रकार की कोई हानि नही होने दूंगा, मगर जब मांसाहारी हिंसक जीव जंगल के जीवों को खाने आयेगे तो मैं किसी भी प्रकार से उनकी रक्षा नही कर पाऊंगा और मानलो रक्षा के लिए उनके आगे भी आऊंगा तो सबसे पहले वो मांसाहारी जीव मुझे ही खायेगा । सो मैं भी इस पद के योग्य नही हूं । यह सुन खरगोश ने चील अर्थात गिद्ध की तरफ देखा और कहा-

आप इस जंगल में सबसे तेज उड़ने वाले जीव हो । आप अधिक से अधिक ऊंचाई तक उड़ सकते हो और ऊपर से ही जंगल की सारी गतिविधियों पर नजर रख सकते हो तो क्यों न मैं आपका ही नाम आगे भेज दूं । यह सुन गिद्ध कहने लगा -

भाई खरगोश, आप ठीक कह रहें । मैं काफी ऊपर तक उड़ सकता हूं । बुद्धि भी खैर ठीक ही है । मैं किसी भी प्रकार से जंगल का अहित नही होने दूंगा, मगर यह एक ईमानदारी का पद है । इस पद पर रहते हुए यदि कभी मुझसे कोई गलती हो गई तो मेरी तो आने वाली सभी पुश्तों पर कलंक लग जायेगा, सो आप मुझे तो माफ ही कर दें । अब खरगोश थोड़ा निराश हो गया और कहने लगा -

आज हमने जो यह महासभा बुलाई है । उसमें जब तक यह फैसला नही हो लेगा कि सरपंच पद के लिए कौन सही उम्मीदवार रहेगा और उसका नाम अनाऊंस नही हो लेगा तब तक सभा भंग नही हो सकती । अब वह उल्लू से कहने लगा कि- भाई इस पद के लिए मुझे लगता है कि आप ही ठीक रहेगें क्योंकि आप रात को भी देख सकते हैं और रात को भ्रमण करते हुए आप जंगल में सभी जीवों की कुशलक्षेम जानते रहेंगे और अन्य घुसपैठिये जानवरों से भी जंगली जीवों आगाह कराते रहेंगे । यह सुन उल्लू कहने लगा -

भाई खरगोश आप यह ठीक कह रहें हैं कि मैं रात को भ्रमण कर सभी जीवों की कुशलक्षेम जानता रहूंगा । मैं पूरी ईमानदारी से इस पर काम भी करूंगा, परन्तु मेरे सामने भी एक समस्या है कि मैं दिन में नही देख सकता और बिना देखे मैं यह कैसे पता करूंगा कि दिन में क्या चल रहा है । यदि पता भी कर लूंगा तो सही से न्याय नही कर पाऊंगा सो इस बारे मुझे तो रहने ही दो । मुझसे सही न्याय नही हो पायेगा । प्लीज आप मुझे माफ करें । मैं इस पद के लिए उपयुक्त नही हूं । यह सुन कर खरगोश ने कहा-

देखो भाईयो और बहनों मैंने बहुत से जीवांे से पूछ लिया है कोई भी इस पद के लिए आगे नही आना चाहता । अब मैं कौवे भाई साहब से यह विनती करता हूं कि वो ही इस पद के लिए राजी हो जाये ताकि उनका नाम आगे भेज कर उन्हें निर्विरोध चुनकर जंगल का सरपंच बनाने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास रिपोर्ट भेजी जा सके ।  यह सुन कौआ कहने लगा -

सबसे पहले तो मैं भाई खरगोश व यहां पर आये सभी गणमान्य जीव-जन्तुओं, प्यारे भाईयों और प्यारी-प्यारी बहनों आप सबका दिल से आभारी हूं । जो जंगल के भ्रष्ट लोकतंत्र या शासन से आहत होकर यहां एकत्रित हुए हैं । मैं मानता हूं कि हमारी जाति के जीव कुछ मनचले होते हैं, प्यारी बहन कोयल ने जो कहा वह ठीक है । पर मैं बगुले की बात से भी सरोकार रखता हूं कि पांचों ऊंगली एक जैसी नही होती जो कि मानवों की कहावत है, ठीक है ।

मैंने आज तक किसी भी मादा जीव की तरफ आंख उठाकर नही देखा । ये मैं अपनी प्रशंशा नही कर रहा हूं । जैसा कि आप जानते हैं कि मैं मांसाहारी और शाकाहारी दोनों श्रेणियों में आता हूं । खुदा ना करें कल को मुझे सरपंच बना दिया जाये ओर मुझसे कोई गलत काम हो जाये तो मुझे तो फांसी खानी पड़ेगी ही, साथ ही पूरे खानदान पर भी कालिख पूत जायेगी । नही नही भाई, मैं भी इस पद के लायक नही हूं । मुझे माफ करना शॉरी भाईयो और बहनों। यह सुन कर खरगोश कहने लगा-

देखो भाईयो और बहनो, मैंने जैसा कि आप सभी से बारी-बारी सरपंच पद के लिए निवेदन किया, परन्तु सभी ने अपनी कमजोरियों को बयान कर अपना पल्ला झाड़ लिया । अब मैं इस सभा में बैठे हुए सभी बहन और भाईयों से एक बार फिर से दरख्वास्त करूंगा कि जो भी भाई या बहन अपने आपको इस पद के लिए उपयुक्त मानते हैं वो अपना नाम मुझे दें ताकि हम जंगल में भ्रष्टाचार विरोधी सुशासन जंगल के लिए तैयार कर सकें ।

एक बार फिर से सभी जीव एक-दूसरे के मुंह को तांकने लगे । कोई भी शेर के अपॉजिट में नही खड़ा होना चाहता था । यह देख कर वह खरगोश कहने लगा कि आज पता चल गया है कि जंगल में कोई भी भ्रष्ट शासन के खिलाफ आवाज नही उठाना चाहता है । सभी जैसा शासन है, उसी में जी लेना चाहते हैं । उसने एक बार फिर से बगूले से कहा-अब आप ही बतायें कि हमें क्या करना चाहिए । यह सुन कर बगुला कहने लगा -

देखो भाईयों आप सभी यहां आये, इससे एक बात तो सिद्ध होती है कि आप भी इस भ्रष्ट शासन का विरोध करना चाहते हैं और यहां पर जो बात हुई है उससे भी यह सिद्ध होता है कि-हर कोई टालमटौल करके इस शासन के खिलाफ  आवाज भी नही उठाना चाहता है । सरपंच पद पर खड़ा होकर कोई भी युवा साथी हालबतौर सरपंच शेर से पंगा भी नही लेना चाहता है । यदि हम खुलकर इस बात का विरोध नही करेंगे तो वह यूं ही अपनी मनमानी करता रहेगा । जिससे आम जीव का जीना दुर्भर हो जायेगा । किसी की भी बहु-बेटी को उसके पंच उठा ले जायेंगे और हम आराम से देखते रहेंगे । मरे हुए तो हम वैसे ही हैं जब हमारा जमीर ही मर चुका है तो हमें जीते हुए भी मरे के समान है मगर हमें अपने जंगल के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ताकि हमारी आने वाली नस्लें इस प्रकार से भ्रष्टाचार से मुक्त हो सकें । ये शक्तिशाली जीव पद नियुक्ति के समय तो हमें जाने क्या-क्या सपने दिखाते हैं और बनने के बाद हमारी बहु-बेटियों को उठाते हैं । हम पूछने जायें तो हमें गुंडों से पिटवाते हैं । अब बताओ हमें कुछ तो करना होगा । मरना तो हमें वैसे भी है और कुछ करेंगे तो भी मरना है तो क्यों ना हम कुछ करके ही मरें । कल को चील बहन आपको कोई उठायेगा, या चिडि़या आपकी बारी हो सकती है, या फिर किसी कबूतर की बहन मां या पत्नि को कोई उठा ले जायेगा । उसे छुडाने जाओ तो उसके पंच उसे मार डालेगें ओर खा जायेगंे । मैना, बटेर, गुरशल, व अन्य भी जंगल की बहनें, पत्नियां और माताऐं हैं । सबकी इज्जत है । रिश्वत मांगी जाती है । एक जीव दूसरे जीव का खून चूसवाने के लिए उसके पास ले जाता है । कब तक चलेगा ये । उनके भय से जंगल की गर्भवती बहनों ने मादा संतानों को जन्म देना ही बंद कर दिया । घर इज्जत जाने से तो अच्छा है कि उसे पैदा ही ना होने दिया जाये । अब आप में से कोई भी यदि इस शासन का विरोध नही करना चाहता है तो मत करो । हमारा क्या है हम तो आजाद पंछी हैं । आज यहां है तो कल किसी और तालाब में चले जायेंगे, पर तुम तो कुछ समझो बगुले की आवाज में जोश बढ़ता ही जा रहा था मगर सभी चुपचाप सूनते जा रहे थे । बोलने को कोई भी तैयार नही था । अंत खरगोश बोला -

भाई बगुले मैं जानता हूं कि आप यदि इसी प्रकार से बोलते रहे तो इन सभी में जोश जरूर जगा देंगे और ये भ्रष्ट शासन के विरूद्ध आवाज उठाने को भी तैयार हो जायेगंे । मगर मेरा मानना है कि हमें घृणा पाप से करनी चाहिए ना पापी से । हम यदि चाहे तो पाप करने वाले को भी सुधार सकते हैं । मैं चाहता हूं कि इस बारे में आप कोई ओर राय दें । बगुला कहने लगा -

इस बारे यदि कोई उसका प्रतिद्वंधी नही उठना चाहता है तो कोई बात नही । एक ओर तरीका है जो उसे सही रास्ते पर ला सकता है और वो है एकजुटता । यदि जंगल के सारे जीव-जन्तु जो आज यहां एकत्रित हुए हैं । इसी प्रकार से उसके पास एकत्रित होकर चले जायें और उससे कहें कि वह यदि अमन-शांति चाहता है तो जंगल से भ्रष्टाचार खत्म करके एक सुशासन की नींव रखें । इसके लिए उसे खुद सुधरना होगा । ईमानदारी से काम करना होगा, उसका जो भी नुमाईंदा या पंच उसके खिलाफ या जंगल के जीवों के खिलाफ कोई गलत साजिश या गलत काम करें । उसे तुरंत प्रभाव से जंगल से बाहर करे फिर वह चाहे जहां जायें । जंगल की जनता का हित करे । उसकेे साथ दुर्व्यवहार ना करें  सबकी बहु-बेटियों की इज्जत करे । उसके आचरण से ही प्रभावित होकर अन्य पंच भी वैसा ही व्यावहार करने लगेंगे । तब जाकर इस जंगल में अमन शांति हो सकेगी । यह बात सुनकर सारे जीव एक साथ पुकार उठे । आपकी ये बात सही है । चलो हम अभी शेर के पास चलते हैं और उसे इस बारे बताते हैं । और यदि वह नही मानता है  तो उसको भी जंगल छोड़ने के लिए मजबूर कर देंगे । यहां पर सभी जीवों का बराबर का हक है । अकेली वही थोड़े ही है शासन करने वाला । आज ही हम दिखा देंगे हमारे वोट में कितनी पावर है । यह कहकर सभी हो हल्ला करने लगे । तभी एक और से शेर की दहाड़ की आवाज सभी को सुनाई दी । कुछ ही समय में शेर उसी मचान पर था जिस पर खरगोश बैठा था । शेर को देखकर भी कोई नही घबराया । शेर उस मचान पर बैठकर कहने लगा -

देखो भाईयो और बहनों, आज तक मैं यही सोचता रहा कि राज केवल बाजुओं के दम पर ही किया जा सकता है , परन्तु आज मुझे यहां आकर पता चला कि राज केवल आप सभी के साथ मिलकर किया जा सकता है । यदि आप साथ हैं तो राज है अन्यथा कुछ नही । मैं उस पेड़ के पिछे खड़ा सबके तर्क-वितर्क सुन रहा था । उस समय मुझे तुम्हारी बातों पर हंसी आ रही थी । मगर जब इस बगुले ने तुम सबको समझाना प्रारम्भ किया तो मुझे पता चला कि मैं आप सभी से हूं मुझसे आप नही हैं, तो भाईयो और बहनों अब तक जो मुझसे अनजाने में हुआ है उसके लिए मैं आप सभी से माफी मांगता हूं । भविष्य में कभी ऐसा नही होगा, और हां यदि आप में से कोई और सरपंच बनना चाहता है तो मैं सहर्ष ही सरपंच पद से इस्तीफा देने को तैयार हूं और आपका पूरा-पूरा सहयोग करने को भी तैयार हूं । यदि आपको लगता है कि मुझे सुधरने का एक ओर मौका दिया जाये तो भी मैं आपके साथ ही हूं । अब आगे से चाहें जो भी बहन जैसे भी घुमें किसी को किसी प्रकार का कोई भी खतरा किसी से नही रहेगा । मैं आज से ही ये ऐलान करता हूं कि आने वाले समय मेें हमारा जंगल सबसे सुन्दर और सुशासित होगा । अब तक जो गलती मुझसे हुई है एक बार फिर से मैं आप सभी से हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं और आप सबसे आशा करता हूं कि आप मुझे एक मौका और देगंे सुधरने का । सभी ने खुशी-खुशी उसे सुधरने का एक मौका और दे दिया और सच में ही छह महीने भीतर ही वहां पर सुशासन करके दिखा दिया उसने । जंगल में सभी मादा पक्षी आजादी से घुम सकती हैं । किसी का किसी पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नही । कोई मनमानी नही कर सकता ।

- नवल पाल प्रभाकर

शिक्षा:-    प्रभाकर, बी.एड, एम.ए.

भाषा ज्ञानः- हिन्दी, उर्दू तथा अंग्रेजी

प्रकाशित रचनाएंः-

                        पुस्तकें 1. आशाएं (काव्य संग्रह) 2013 में ।

                                    2. नारी की व्यथा (काव्य संग्रह) 2014 में ।

                                    3. वतन की ओर (कहानी संग्रह) हाल में 2016।

  आने वाली पुस्तकंे 1. मोम के पंख (काव्य संग्रह) ।

                                    2. गौतम की कथा (कथा) ।

                                    3. परिन्दे (काव्य संग्रह) ।

     हाल ही में शोध पत्र प्रकाशित मालती अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका में । हिन्दी काव्य संकलन मंच ऑनलाईन मंच पर 114 कविताएं प्रकाशित । महात्मा गांधी विश्वविद्यालय की साईट पर भी रचनाएं ऑनलाईन होने के लिए भेज चुका हूं ।  हरियाणा हिन्दी अकादमी से प्रकाशित मासिक पत्रिका में भी कई बार कहानियों और कविताओं का प्रकाशन । हरियाणा से प्रकाशित समाचार पत्रों में भी कविताओं का प्रकाशन । दिल्ली हिन्दी अकादमी ने आशाएं पुस्तक पर दस हजार रूपये का प्रकाशन सहयोग दिया ।

वर्तमान पताः- जिला व तहसील-झज्जर , राज्य-हरियाणा  (भारत)

 

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