गोविन्द सेन के दोहे

तोपों से तलवार की, ठनी हुई है आज

कचरे का ही राज हो, या झाड़ू का राज

 

गाँव-शहर में गन्दगी, कचरे का अम्बार

साफ-सफाई के लिए, झाड़ू बस दो चार

 

अपने भीतर भी रखें, एक झाड़ू तैयार

तेरी ही सरकार हो, या मेरी सरकार

 

दिखा रहे हैं सादगी, लेते जन का पक्ष

निस-दिन होते जा रहे, राज-काज में दक्ष

 

हंसों जैसी धवलता, बगुलों जैसे काम

भोली-भाली मछलियाँ, चुग्गा बनती राम

 

रैन-बसेरे में कई, ठिठुर रहे थे यार

पश्मीना पहुँची वहाँ, लेकर महँगी कार

 

बदल रहे हैं टोपियाँ, अपनाते नव ढंग

जान बचाने के लिए, गिरगिट बदले रंग

 

जूते मालिक बन गए, टोपी बनी गुलाम

बदली सबकी भूमिका, बदला नहीं निज़ाम

 

- गोविन्द सेन 

जन्म: १५ अगस्त 
जन्म स्थान: राजपुरा [अमझेरा] धार [म.प्र.] 

शिक्षा: एम.ए.(हिंदी, अंग्रेजी) बी.टी.

कृतियाँ: १. चुप्पियाँ चुभती हैं(गजल संग्रह) १९८८ 
२. अकड़ूभुट्टा (निमाड़ी हाइकु संग्रह) २००० 
३. नकटी नाक (निमाड़ी हाइकु संग्रह) २०१० 
४. नवसाक्षरों के लिए ५ पुस्तिकाएँ 
५. बिना पते का प्रशंसा पत्र (व्यंग्य संग्रह) २०१२ 
६. खोलो मन के द्वार (दोहा संग्रह) २०१४ 
पुरस्कार-‘स्वदेश’ कहानी प्रतियोगिता-१९९२ में कहानी ‘बरकत’ को प्रथम 
पुरस्कार 

सम्मान: 
१. पं. देवीदत्त शुक्ल स्मृति सम्मान-२००३ 
२.आंचलिक साहित्यकार सम्मान-२००५ -०६ 
३.झलक निगम साहित्य सम्मान-२०१२ 
४. .हमजमीं सम्मान-२०१२ 
५. साक्षरता मित्र सम्मान-२०१३ 
६. शब्द प्रवाह सम्मान-२०१३ 
७. गणगौर सम्मान-२०१४ 

प्रकाशन: देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ एवं रेखांकन प्रकाशित

प्रसारण: आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से रचनाएँ प्रसारित 

सम्प्रति: अध्यापन 
पता: मनावर, जिला-धार(म.प्र.)

One thought on “गोविन्द सेन के दोहे

  1. बहुत सुंदर सार्थक दोहे आ. गोविन्द सेज जी

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