गोले का छल्ला उड़-उड़ रे

 

 गोलू का भाई था छोलू। गोलू बातों का गोला बनाता रहता और छोलू गोले के  छल्ला बनाकर हवा में उड़ा देता। चारों तरफ हंसी के बुलबुले फुदकने लगते।

 एक बार दोनों शादी की दावत उड़ाने गए। पूरी-पकवान को देखकर गोलू की लार टपकने लगी । सबसे पहले आलू की सब्जी दी गई। गोलू ने झट से चम्मच भर कर मुंह में भर ली। तुरंत सी–सी कर उठा। थू-थू करते बोला-“मिर्च—मिर्च-हाय रे ततैया सी मिर्च। एकदम गोल है सब्जी।’’

छोलू को छल्ला बनाने का मौका मिल गया। तपाक से बोला-“सब्जी में पानी डाल –अरे जल्दी पानी डाल,मिर्च कम लगेगी।’’

कचौरियों का टोकरा आया। उनसे गरम गरम भाप उठ रही थी। गोलू ने आवाज दी-“कचौरी –कचौरी— पहले मुझे—पहले मुझे ।’’

पत्तल में कचौरी पड़ते ही उसने साबुत कचौरी उठाकर मुंह में डालनी चाही। लेकिन हाथ में इतनी तपत महसूस हुई कि झटके से उसने उसपर से अपनी पकड़ ढीली कर दी और चिल्लाया-‘हाय—हाय जल गया –मेरा हाथ जल गया। देख तो छोलू मेरी  दो ऊंगलियाँ कितनी लाल हो गई हैं!’’

“तो मुश्किल क्या है !कचौरी को भी डाल पानी में। ठंडी हो जाएगी।’’ छोलू की आँखें नाच उठीं।

एक आदमी सबको गरम-गरम खीर परोस गया। उसकी खुशबू गोलू के नथुनों में घुसती चली गई। हाथ की जलन भूल गया और खीर पर धाबा बोल दिया।इतनी गरमाई कोमल जीभ सहन न कर सकी। जलन से तड़पता बोला-‘हाय रे मेरी जीभ! गरम-गरम—उबलती खीर दे गया।’’

‘तो गोलू मुश्किल क्या है। इस पर भी डाल पानी। अभी ठंडक पड़ जाएगी।’’  छोलू हाथ मटकाते हुए बोला। आसपास बैठे लोग उन दोनों की बात का मजा ले रहे थे।

दावत में हलुआ तो गज़ब का था। बादाम,किशमिश की परत से एकदम ढका हुआ। गोलू  ने अपनी पत्तल में उसे दो बार पड़वाया। डर था कि बाद  में लेने से कहीं खतम न हो जाय। खाते  समय एक पल को हिचकिचाया –कहीं खीर की तरह यह भी गरम न हो। हल्के से छूकर देखा-ठंडा। झूम उठा वह तो और मुट्ठी भर –भर हलुआ गटकने लगा। दूसरे ही मिनट ओंठ आड़े-तिरछे करते बोला-“उफ,इतनी ज्यादा चीनी।’’

“तो मुश्किल क्या! इस पर भी डाल पानी । चीनी घुल-घुल—धुलधुल जाएगी।‘’ छोलू ने छक्का लगा ही दिया।

देखने-सुनने वाले दांत निकालकर ही—ही कर उठे। शैतान छोलू की आँखों से भी हंसी टपकने लगी। पर गोलू बुरी तरह खिसिया गया था । उसने चुप्पी साध ली और आँखें नीची करके कहने लगा । फिर किसी ने उसे बातों का गोला बनाते नहीं देखा।

 

 

- सुधा भार्गव

 

 

प्रकाशित पुस्तकें: रोशनी की तलाश में –काव्य संग्रहलघुकथा संग्रह -वेदना संवेदना 

बालकहानी पुस्तकें : १ अंगूठा चूस  २ अहंकारी राजा ३ जितनी चादर उतने पैर  ४ मन की रानी छतरी में पानी   ५ चाँद सा महल सम्मानित कृति–रोशनी की तलाश में(कविता संग्रह )

सम्मान : डा .कमला रत्नम सम्मान , राष्ट्रीय शिखर साहित्य सम्मानपुरस्कार –राष्ट्र निर्माता पुरस्कार (प. बंगाल -१९९६)

वर्तमान लेखन का स्वरूप : बाल साहित्य ,लोककथाएँ,लघुकथाएँमैं एक ब्लॉगर भी हूँ। 

ब्लॉग:  तूलिकासदन

संपर्क: बैंगलोर , भारत 

    

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