गोली

गोली चलाने से पलाश के फूल नहीं खिलते
बस सन्नाटा टूटता है
या कोई मरता है
तुम पतंग क्यों नहीं उड़ाते
आकाश का मन कब से उचटा हुआ-सा है
तुम मेरे लिए ऐसा घर क्यों नहीं ढूंढ़ देते
जिसके आंगन में सांझ घिरती हो
बरामदे पर मार्च में पेड़ का पीला पत्ता गिरता हो
तुम नदियों के नाम याद करो
फिर हम अपनी बेटियों के नाम किसी अनजान नदी के नाम पर रखेंगे
तुम कभी धोती-कुर्ता पहनकर तेज कदमों से चलो
अनायास ही भ्रम होगा दादाजी के लौटने का
तुम बाजार से चने लाना और
ठोंगे पर लिखी कोई कविता सुनाना   ।।
- रोहित ठाकुर
शैक्षणिक योग्यता  -   परा-स्नातक राजनीति विज्ञान

विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित 
विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ
वृत्ति  -   सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण 
रूचि -हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन
पत्राचार - संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार

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