गुलाब

सुनो ,
वो इक गुलाब जो तुम ,
जुड़े में सजातीं थीं ,
आज भी मेरे ज़हन पर हावी है उसकी महक |
अब तुम उलझी रहती हो ,
कुछ समेटने ,कुछ पकाने ,कुछ सँवारने में ,
बिखरे बाल तुम्हारे झूलते रहते हैं -
जैसे कोई पेचीदा गुथियाँ उलझ गयी हों !
इधर -उधर दौडती हल्दी लगे कपड़ों के साथ ,
बेतरतीब उलझी हुई  दार्शनिक सी !
बहुत हुआ ,
आओ  एक बार फिर से  चलें समय के पार ,
जहाँ  तुम  सजीसंवरी ,सहज ,
चंचल अल्हड नदी सी बलखाती ,
आती थीं मुझसे मिलने ,
उन्हीं अनुभूतियोंके कैनवास में भरता हूँ वो रंग – जो कहीं कहीं से उड़ गए हैं !
एक बार तुम भी मेरा साथ दो ,
भूले प्रेम पलों का ब्रश थामे ,
उस  ’ गुलाब ‘ सजे जुड़े वाली तस्वीर को ,
फिर साकार कर दो |

 

 

- डॉ संगीता गांधी 

शिक्षिका व लेखिका  , नयी दिल्ली। 

शिक्षा - बी ए ऑनर्स ,एम् ए हिंदी । एम् फिल ,पी एच डी ।

शोध कार्य -
1   पाली -सम्वेदना और शिल्प ।
2   अमृतलाल नागर जी के उपन्यासों में सांस्कृतिक बोध ।
प्रकाशन -नवप्रदेश ,ट्रू टाइम्स ,लोकजंग ,दैनिक  नव एक्सप्रेस , समाज्ञा ,हमारा मैट्रो  ,वर्तमान अंकुर , विमेन एक्सप्रेस ,साप्ताहिक अकोदिया सम्राट ,झांब न्यूज़ ,दैनिक पब्लिक इमोशन ,अद्भुत इंडिया ,दैनिक गज केसरी, पत्रों में कविताएं ,लघुकथाएं व कहानियां प्रकाशित ।
शैल सूत्र ,निकट ,ककसाड़,दृष्टि ,शेषप्रश्न ,अट्टहास ,पर्तों की पड़ताल ,सत्य की मशाल , नारी तू कल्याणी ,प्रयास ,सन्तुष्टि सेवा मासिक,अनुभव,अनुगुंजन ,सलाम दुनिया आदि पत्रिकाओं में कविता , लघुकथा , लेख प्रकाशित ।
नए पल्लव 2 संग्रह में लघुकथाएं प्रकाशित
मुसाफिर साझा काव्य संग्रह 
सहोदरी सोपान 4 काव्य संग्रह 
सहोदरी सोपान 4 लघुकथा संग्रह ।
हिंदी लेखक .कॉम ,साहित्यपिडिया ,प्रतिलिपि.कॉम ,लिटरेचर पॉइंट ,स्टोरी मिरर ,जय विजय .कॉम ,हिंदी कुंज.कॉम ,कथांकन.कॉम  ,अटूट बन्धन ,मातृ भारती .कॉम पर  रचनाएं प्रकाशित ।कथांकन .कॉम द्वारा कहानी ‘ समय का अंतराल ‘  यू ट्यूब पर  प्रस्तुत ।

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