गीत – जगदीष चन्द्र ठाकुर

 

एक चांद है गगन में
एक चांद मेरे मन में ।

आकाष में लबालब
बादल भरे हुए हैं,
एक मोर दूर वन में
एक मोर मेरे मन में ।

कोर्इ दूर गा रहा है
एक गीत प्रेम के,
एक गंध है सुमन में
एक गंध मेरे मन में ।

मेरी नजर से तुम भी
खुद को बचा के रखना,
एक चोर है चमन में
एक चोर मेरे मन में ।

खोने को और कुछ भी
मेरे पास अब नहीं है,
एक षोर है पवन में
एक षोर मेरे मन में ।

तुम ने हरेक पल को
उत्सव बना दिया है,
एक भोर तेरे मन में
एक भोर मेरे मन में ।

 - जगदीष चन्द्र ठाकुर

नाम- जगदीश चंद्र ठाकुर

उपनाम –अनिल ( जगदीश चंद्र ठाकुर ‘अनिल’ के नाम से मैथिली मे लेखन )

जन्म— बिहार राज्य के मधुबनी जिले के शम्भुआर गांव में २७ नवम्बर १९५० को जन्म 

शिक्षा – बी. एस.सी. ( कृषि )१९७२

मातृभाषा –मैथिली 

सेवा— सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अग्रणी जिला प्रबंधक के पद से ३० नवम्बर २०१० को सेवानिवृति |

सेवा कार्य क्षेत्र - १९७५ से १९९२ तक बिहार एवं १९९३ से २०१० तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित विभिन्न शाखाएं / कार्यालय 

लेखन - हिंदी एवं मैथिली में 

लेखन विधा - कविता, गीत, गजल, लघुकथा, व्यंग्य 

प्रकाशित पुस्तकें - १. तोरा अंगना मे ( मैथिली गीत संग्रह ) १९७८
तिरंगे के लिए ( हिंदी गजल संग्रह ) १९९७
धारक ओइ पार ( मैथिली दीर्घ कविता ) ११९९९

हिंदी पत्र-पत्रिकाएँ जिनमें रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं—
दैनिक भास्कर ( बिलासपुर )/नव भारत ( बिलासपुर )/शुभतारिका ( अम्बाला छावनी )/ नवनीत /हंस /वीणा /अक्षरा /समान्तर /सानुबंध /समकालीन भारतीय साहित्य /प्रयास /जर्जर कश्ती

मैथिली पत्रिकाएँ जिनमें रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं –
. मिथिला मिहिर/ मिथिला दर्शन/ आरम्भ / बैदेही / भारती मंडन /पूर्वोत्तर मैथिल /समय साल ,

प्रसारण : आकाशवाणी - दरभंगा, पटना, अंबिकापुर

प्रसारण : दूरदर्शन – रायपुर, पटना

सम्प्रति  - स्वतंत्र लेखन 
पता – पटना -८०१५०५ ( बिहार )

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