गर्भपात स्त्री का अधिकार

प्रसंगवश: चिली में इन दिनों गर्भपात पर राष्ट्रीय बहस के संदर्भ में

मातृत्व स्त्री का नैसर्गिक मानवाधिकार है। स्त्री का यह अधिकार सदा सुरक्षित रहना चाहिए। साथ ही स्त्री यह अधिकार भी अपने पास सुरक्षित रखना चाहती है कि वह गर्भधारण करना चाहती है या नहीं। यदि गर्भ ठहर गया है तो वह गर्भ को रखना चाहती है या नहीं। सहज और स्वाभाविक रूप से प्रकृति ने स्त्री को जो सृजन क्षमता दी है वह उसका ही अधिकार है किन्तु उसके इस अधिकार को सुरक्षित रखने की कई दिक्कतें हैं। विगत वर्ष आयरलैण्ड में भारतीय मूल की सविता की गर्भ गिरने से मौत हो गई थी। आयरलैण्ड एक कैथोलिक देश है जहाँ अब तक गर्भपात कानूनन एक जुर्म है। 31 साल की सविता हलप्पनवर की अक्टूबर, 2012 समय पर गर्भपात न होने के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद से ही आयरलैण्ड में लम्बी बहस चली कि विशेष परिस्थितियों में गर्भपात की संवैधानिक इजाजत दी जानी चाहिए। इस मुद्दे पर कैथोलिक मान्यता वाले आयरलैण्ड में गर्भपात को वैध बनाने के विधेयक पर संसद में रातभर बहस चली। सविता की मौत के बाद भारत सहित दुनियाभर में आयरलैण्ड को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। और किसी महिला के जीवन पर संकट को देखते हुए देश में गर्भपात कानून की इजाजत दिए जाने की माँग थी।…. आयरलैण्ड की संसद ने दो दिन की लम्बी बहस के बाद विशेष परिस्थितियों में गर्भपात को मान्यता दे दी।

अमेरिका में इन दिनों गर्भपात कानून सख्त है। गर्भपात पर रोक के बारे में अभी तक 300 से अधिक विधेयक प्रस्तावित किये जा चुके हैं। यहाँ 13 राज्यों ने गर्भपात को लेकर नई सीमा रेखाएं तय की हैं।

चिली में इन दिनों इसी विषय पर राष्ट्रीय बहस चल रही है। लातिन अमेरिका के चिली में भी गर्भपात कराना कानूनी जुर्म है। बहस का कारण एक ग्यारह साल की बच्ची है जो 14 हफ्ते की गर्भवती है। वहाँ के चिकित्सकों ने उसके गर्भधारण को किशोरी एवं उसके गर्भस्थ शिशु के जीवन को खतरा बताया है। चिकित्सकों की राय के बाद बच्ची के गर्भपात की इजाजत दे दी गई है। लेकिन इस इजाजत ने लातिन जैसे रूढि़वादी देश में एक बहस छेड़ दी है। 11 साल की यह बच्ची बलात्कार की शिकार हुई थी। बच्ची के साथ उसकी माँ के ही पुरुष मित्र ने दो वर्षों तक लगातार बलात्कार किया था। लातिन अमेरिका में 1973 में जेनरल अगस्ते पिनोशे के कार्यकाल में गर्भपात पर रोक लगा दी गई थी।

स्त्री के इस अधिकार के पक्ष में अमेरिका सीनेटर वेडीं डेविस पूरी शिद्दत के साथ संघर्षरत हैं। पचास वर्षीय वेंडीं अमेरिका के फोर्ट वर्थ की डेमोक्रेट सीनेटर हैं। उन्होंने टेक्सास की सीनेट में लगातार 11 घण्टे तक गर्भपात के हक में अपनी बात रखी। वेंडी के इस धाराप्रवाह के वैचारिक भाषण ने उस विधेयक को भी पारित होने से रुकवा दिया जिसके तहत उनके राज्य में 20 हफ्ते की गर्भवती महिला के गर्भपात पर पाबंदी लगाई जाने वाली थी।

वेंडी ने स्त्री अधिकारों के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा यदि औरतों से गर्भपात कराने का अधिकार छीन लिया गया तो औरतों को किस-किस तरह की परेशानियाँ आ सकती हैं।

भारत के सन्दर्भ में अगर हम बात करें तो यहाँ ‘‘कन्या भ्रुण हत्या’’ एक बड़ा और विडम्बनापूर्ण मुद्दा है, जो गर्भपात के अधिकार को प्रभावित करता है। लेकिन हमारे यहाँ गर्भपात करवाने की कानूनी दिक्कतों का निर्धारण एम.टी.पी. (चिकित्सापरक पतन एक्ट) के साथ किया गया है। भारत में गैर कानूनी गर्भपात की समस्या को रोकने के उद्देश्य से इस एक्ट की संरचना की गई है।

भारतीय कानून में लिंग परीक्षण एवं कन्या भ्रुण हत्या को रोकने के लिए गर्भपात पर रोक है। लेकिन एम.टी.पी. एक्ट के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण तथ्य हैं जिन कारणों से महिला गर्भपात करवा सकती हैं। जैसे महिला को कोई गम्भीर रोग हो और गर्भ रखने से उसको जान का खतरा हो जैसे हृदय रोग, कैंसर मिरगी, मेल्लिब्स डायबिटिस, मनोवैज्ञानिक रोग, उच्चतम रक्तचाप इत्यादि गर्भपात का दूसरा कारण जहाँ गर्भ को धारण किए रहने से नवजात को भारी खतरा हो, बच्चे को शारीरिक या मानसिक अपंगता की आशंका हो। जैसे – बच्चे को दीर्घकालिन बीमारियाँ, पहले तीन महिनों में माँ को रूबेला इन्फैक्शन जो जर्मन मीसलस कहलाता है या गर्भस्थ बच्चे को जन्मजात अप्राकृतिक विकृति हो या आर.एच.इसो – इम्यूनाइसेशन।

इसके अलावा बलात्कार के परिणामस्वरूप गर्भधारण की स्थिति में भारतीय कानून गर्भपात की अनुमति देता है। इसके अतिरिक्त ऐसी सामाजिक आर्थिक परिस्थितियाँ जो माँ के स्वस्थ गर्भ विकास और स्वस्थ बच्चे के जन्म में बाधक हो। इसके अतिरिक्त गर्भ निरोधक की असफलता चाहे जिस भी माध्यम का उपयोग किया गया हो। यह परिस्थिति भारतीय कानून की विलक्षण विशेषता है अर्थात अवांछित गर्भावस्था के कारण इन परिस्थितियों में गर्भपात कराया जा सकता है।

भारतीय कानून की यह एक और विशेषता है कि यदि स्त्री अठारह वर्ष से ऊपर है तो स्वयं अनुमति दे सकती है। उसे पति से अनुमति की जरूरत नहीं होती। यदि कम उम्र है तो उसे अपने संरक्षक की लिखित अनुमति की जरूरत होती है।

भारतीय कानून कई विषयों में अन्य देशों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील हैं एवं जनहित से जुड़े है पर विडम्बना यह है डबलिन आयरलैंण्ड की संसद ने सविता की मृत्यु के बाद गर्भ के दौरान जीवन रक्षा विधेयक को मान्यता दी वह हमारे यहाँ पहले से उपलब्ध है। लेकिन भारतीय समाज अपने कानूनों का सम्मान ना करते हुए उसमें उपलब्ध प्रावधानों का कितना और कैसा दुरुपयोग करता है यह सब जानते हैं। लिंगानुपात में लगातार घटती लड़कियों की संख्या से स्पष्ट हो जाता है। यदि नैतिकता के आधार पर वे डाक्टर्स जो व्यावसायिक दृष्टि से अपनी व्यावहारिक सामाजिक सरोकार से जोड़ लें तो हमारे कानूनी प्रावधानों की रक्षा हो सकती है। वरना – एक दिन शायद हमें भी कानूनी सख्ती होने पर वींडी जैसी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।

 

- डा. स्वाति तिवारी

जन्म : धार (मध्यप्रदेश)

शिक्षा : एम.एस.सी., एल.एल.बी., एम.फिल, पी.एच.डी

शोध कार्य :

Ÿ महिलाओं पर पारिवारिक अत्याचार एवं परामार्श केन्द्रों की भूमिका

Ÿप्राथमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण में राजीव गांधी शिक्षा मिशन की भूमिका

Ÿअकेले होते लोग – वृद्धावस्था पर मनोवैज्ञानिक दस्तावेज

Ÿसवाल आज भी जिन्दा हैं : भोपाल गैस त्रासदी एवं स्त्रियों की सामाजिक समस्याएं (प्रकाशनाधीन)

रचनाकर्म :

Ÿमध्यप्रदेश और देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी, व्यंग्य, समीक्षा, रिपोर्ताज, यात्रा-संस्मरण, कविताओं आदि का नियमित प्रकाशन

Ÿ आकाशवाणी, दूरदर्शन और निजी टी.वी. चैनलों पर रचनाओं का प्रसारण-पटकथा लेखन

विशेष :

मध्यप्रदेश की कलाजगत हस्ती कलागुरू विष्णु चिंचालकर पर निर्मित फिल्म की पटकथा-लेखन, सम्पादन और सूत्रधार

फिल्म निर्माण: इन्दौर स्थित परिवार परामर्श केन्द्रों पर आधारित लघु फिल्म “घरौंदा ना टूटे’ (निर्माण, सम्पादन और स्वर)

प्रकाशित कृतियॉ :-

कहानी-संग्रह :

Ÿ “क्या मैंने गुनाह किया’, Ÿ”विशवास टूटा तो टूटा’, Ÿ “हथेली पर उकेरी कहानियां’ Ÿ “छ जमा तीन”, Ÿ “मुडती है यूं जिन्दगी, Ÿ”मैं हारी नहीं’, Ÿ “जमीन अपनी-अपनी’, Ÿ “बैगनी फूलों वाला पेड”, Ÿस्वाति तिवारी की चुनिंदा कहानियां

अन्य महत्वपूर्ण प्रकाशन :

Ÿ वृद्धावस्था के मनोवैज्ञानिक वि¶लेषण पर केन्द्रित दस्तावेज – “अकेले होते लोग’

Ÿ”महिलाओं के कानून से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तक “मैं औरत हूं मेरी कौन सुनेगा’,

Ÿव्यक्तित्व विकास पर केन्द्रित पुस्तक “सफलता के लिए’

Ÿदेश के जाने-माने पत्रकार स्व.प्रभाष जोशी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केन्द्रित पुस्तक “शब्दों का दरवेश” (महामहिम उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी द्वारा 16 जुलाई 2011 को विमोचित)

प्रकाशनाधीन :

Ÿ सवाल आज भी जिन्दा है (भोपाल गैस त्रासदी और स्त्री विमर्श)

Ÿ लोक परम्पराओं में विज्ञान (माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा प्रदत्त प्रोजेक्ट)

Ÿ ब्राहृ कमल एक प्रेमकथा (उपन्यास)

सम्पादन (1996 से 2004 तक) :

Ÿ सुरभि (दैनिक चौथा संसार),

Ÿ घरबार (दैनिक चेतना)

चर्चित स्तंभ लेखन (वर्ष 96 से 2006 तक) :

Ÿ हमारे आस पास (दैनिक भास्कर),

Ÿ महिलाएं और कानून (दैनिक फ्रीप्रेस, अंग्रेजी),

Ÿ आखिरी बात (चौथा संसार),

Ÿ आठवां कॉलम एवं अपनी बात (चेतना),

सम्मान और पुरस्कार :

Ÿ “अकेले होते लोग’ पुस्तक (वर्ष 2008-09) के मौलिक लेखन पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली द्वारा 80 हजार रुपये का राष्ट्रीय पुरस्कार

Ÿ “स्वाति तिवारी की चुनिन्दा कहानियाँ’ पर मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा 22/01/12 को वागेशरी सम्मान 2010 (छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल के कर कमलों द्वारा)

Ÿ “बैंगनी फूलोंवाला पेड़’ कहानी संग्रह पर 02 अक्टूबर, 11 को प्रकाश कुमारी हरकावत महिला लेखन पुरस्कार (मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल के कर कमलों द्वारा)

Ÿ देश की शिशार्स्थ पत्रिका “द संडे इंडियन’ द्वारा देश की चयनित 21वीं सदी की 111 लेखिकाओं में प्रमुखता से शामिल

Ÿ “अभिनव शब्द शिल्पी अलंकरण”, 2012 सांस्कृतिक संस्था अभिनव कला परिषद, भोपाल द्वारा

Ÿ लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकार पं. रामनारायण शास्त्री स्मृति कथा पुरस्कार

Ÿ जाने-माने रिपोर्टर स्व. गोपीकृष्ण गुप्ता स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार (श्रेष्ठ रिपोर्टिंग के लिए)

Ÿ शब्द साधिका सम्मान (पत्रकारिता पुरस्कार) Ÿ निर्मलादेवी स्मृति साहित्य सम्मान, गाजियाबाद (उत्तरप्रदेश)

Ÿ पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में अनुपम उपलब्धियों के लिए “स्व. माधवराव सिंधिया प्रतिष्ठा” सम्मान

Ÿ हिन्दी प्रचार समिति, जहीराबाद (आन्ध्रप्रदेश) द्वारा सेवारत्न की मानद उपाधि

Ÿ पं. आशा कुमार त्रिवेदी स्मृति मालवा-भूषण सम्मान

Ÿ मध्यप्रदेश लेखक संघ द्वारा स्थापित देवकीनंदन साहित्य सम्मान

Ÿ अंबिकाप्रसाद दिव्य रजत सम्मान

Ÿ भारतीय दलित साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश का सावित्रीबाई फूले साहित्य रत्न सम्मान

विशेष :

कुरुक्षेत्र वि.वि. हिमाचल प्रदेश और देवी अहिल्या वि.वि. इन्दौर, वि.वि.चैन्नई, जवाहरलाल नेहरू वि.वि. नई दिल्ली में कहानियों पर शोध कार्य।

मैसूर में 02 से 04 अक्टूबर, 2011 तक राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं मैसूर विश्वविद्यालय द्वारा

“सुशासन और मानव अधिकार” पर आयोजित तीन दिवसीय सेमीनार में शोध पत्र का वाचन।

माण्डव में 5 से 7 नवम्बर, 2011 को देश के शिरसस्थ कथाकारों के संगमन 17 में भागीदारी।

संस्थापक-अध्यक्ष, इन्दौर लेखिका संघ, इन्दौर।

वुमन राइटर्स गिल्ड आफ इंडिया (दिल्ली लेखिका संघ) की सचिव (वर्ष 07 से 09)

इंडिया वुमन प्रेस कार्प, नई दिल्ली की आजीवन सदस्य

सम्प्रति : मध्यप्रदेश शासन में जनसम्पर्क विभाग में अधिकारी (राज्य शासन के मुखपत्र मध्यप्रदेश संदेश में सहयोगी सम्पादक)

सम्पर्क - चार इमली, भोपाल – 462016 (मध्यप्रदेश – भारत)

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