ग़ज़ल – जगदीष चन्द्र ठाकुर

ताउम्र दौडता रहा जल की तलाष में
मौजूद था कुआं मेरे घर के ही पास में ।

डरते थे अंधेरे में उसे सांप समझ कर
रस्सी दिखार्इ दी जब ही देखा प्रकाष में ।

खुद ही बना घरौंदा खुद तोडते रहे
अब खेल कौन खेले ये होषो-हवाष में ।

रोना भी क्या जो वो तुम्हारे पास है नहीं
तारों को रहने दो यूं ही मन के अकाष में ।

हमने ही लगाये हैं ये पौधे बबूल के
अब आम कब फलेगा ये, बैठे हैं आस में ।

 

 - जगदीष चन्द्र ठाकुर

१. नाम- जगदीश चंद्र ठाकुर
२. उपनाम –अनिल ( जगदीश चंद्र ठाकुर ‘अनिल’ के नाम से मैथिली मे लेखन )
३. जन्म— बिहार राज्य के मधुबनी जिले के शम्भुआर गांव में २७ नवम्बर १९५० को जन्म |
४. शिक्षा – बी. एस.सी. ( कृषि )|१९७२
५. मातृभाषा –मैथिली |
६. सेवा—– सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अग्रणी जिला प्रबंधक के पद से ३० नवम्बर २०१० को सेवानिवृति |
७. सेवा कार्य क्षेत्र —- १९७५ से १९९२ तक बिहार एवं १९९३ से २०१० तक छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित विभिन्न शाखाएं / कार्यालय |
८. लेखन ————- हिंदी एवं मैथिली में |
९. लेखन विधा ——- कविता, गीत, गजल, लघुकथा, व्यंग्य |
१०. प्रकाशित पुस्तकें —- १. तोरा अंगना मे ( मैथिली गीत संग्रह ) १९७८
२. तिरंगे के लिए ( हिंदी गजल संग्रह ) १९९७
३. धारक ओइ पार ( मैथिली दीर्घ कविता ) ११९९९
११. हिंदी पत्र-पत्रिकाएँ जिनमें रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं—
दैनिक भास्कर ( बिलासपुर )/नव भारत ( बिलासपुर )/शुभतारिका ( अम्बाला छावनी )/ नवनीत /हंस /वीणा /अक्षरा /समान्तर /सानुबंध /समकालीन भारतीय साहित्य /प्रयास /जर्जर कश्ती
१२. मैथिली पत्रिकाएँ जिनमें रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं –
. मिथिला मिहिर/ मिथिला दर्शन/ आरम्भ / बैदेही / भारती मंडन /पूर्वोत्तर मैथिल /समय साल ,
१३. प्रसारण : आकाशवाणी —- दरभंगा, पटना, अंबिकापुर
दूरदर्शन —– रायपुर, पटना
१४. सम्प्रति ——- स्वतंत्र लेखन |
१५. पता –पटना -८०१५०५ ( बिहार )

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