कुछ बातें हैं..

कुछ बातें जो जिन्दगी के एक मुकाम पर आ कर हर एक के दिल को तड़पाती हैं ….

नींद तो बचपन में आती थी,
अब तो बस थक कर सो जाते हैं।

ऐसा नहीं कि ये जिंदगी बुरी है,
पर स्कूल और कॉलेज में बिताये उन दिनों कि बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब हँसी नहीं आती,
पर दोस्तों में बैंठ कर खिलखिलाने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब टेंशन से रात नहीं कटती,
पर परीक्षाओं की रातों में जागने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब धूमने कि इच्छा नहीं होती,
पर दोस्तों के साथ क्लास छोड़ कर मस्ती करने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि आगे आ कर कुछ हासिल न किया हो,
पर परीक्षाओं में सिर्फ पास होकर पार्टी उड़ाने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब लोगो को हम जानते पहचानते नहीं,
पर दूर से “कमीने रुक” बोल कर दोस्तों को पुकारने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब टिफिन शेयर नहीं करते,
पर कैंटीन में दोस्तों कि प्लेट से छीन कर खाने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

ऐसा नहीं कि अब जिंदगी नहीं कट रही है,
पर दोस्तों में जिंदगी जीने वाली वो बातें ही कुछ और थी।

शायद किसी ने सच ही कहा है कि “गर खोल देते दिल अपना दोस्तों के साथ,
तो आज न खोलना पड़ता औजारों के साथ”।

बिन पूछे कोई सवाल, लहरों के संग – संग बहूँगा,
गर हूँ जिंदा आज, तो जिंदा ही रहूँगा।

बोझ है मेरे सीने पर कई, रात दिन उस आस में,
रेत के घरोंदे सा मेरा मन, हर आस पे ढह जाता है।

तुमको हो पता तो बताना ये दोस्त,
कौन सा है रास्ता खुशियों की तरफ जाता।।

 

- डॉ. ज्ञान प्रकाश


शिक्षा: मास्टर ऑफ़ साइंस एवं डॉक्टर ऑफ़ फिलास्फी (सांख्यकीय)
कार्य क्षेत्र: सहायक आचार्य (सांख्यकीय), मेडिकल कॉलेज आगरा।
खाली समय में गाने सुनना और कविताएँ एवं शेरो शायरी पढ़ना।

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