क़तरा-क़तरा पी ख्वाहिशें मैनें..

 

साहिल की खामोशी देखी, लहरों की बेचैनी देखी,

पुरसुक़ून सागर के दिल में… मैनें गहरी बेक़रारी देखी ।

 

बेताब मचलती लहरें आकर ,पाँवों से मेरे लिपट-लिपट कर ….

तर-ब-तर मुझको कर जातीं….बेकल, बेबस दिखा के मंज़र..।

 

मेरे तन्हा दिल में भी.. उदासी के समंदर जगते,

जज़्बातों के रेले उठते.. एहसासों के मेले लगते..।

मुझे सराबोर कर जातीं… अश्कों की मौजें तूफ़ानी…,

गम के प्याले छलक ही जाते… बहती… आँखों से कहानी..।

 

देख मेरी हसरतों का पानी…. रेत पे लिख तहरीरें अपनी…,

लहरें वापस लौट ही जातीं… अपने वजूद की छोड़ निशानी…।

 

बेबस अरमानों के ढेर में…. टूटे ख्वाबों के रेतमहल में…,

पी क़तरा क़तरा..जो ख्वाहिशें मैनें…हुईं जज़्ब वही मेरी रूह में…।।

 

- अनिता ललित

 

जन्मतिथि- ६ सितंबर
जन्म स्थान- इलाहाबाद
स्थायी पता- गोमती नगर, लखनऊ (उत्तर प्रदेश), भारत
शिक्षा- एम. ए. इंग्लिश लिटरेचर ।
 
शौक- जो भी मेरे दिल को छू जाए…..वो संगीत, कविता,कहानी, लेख मुझे पसंद हैं और वही सुनना, पढ़ना तथा लिखना मुझे बहुत पसंद है ।
 
लिखने का शौक मुझे शेली (P.B.Shelly) और कीट्स(John Keats) को पढ़ते पढ़ते हुआ । धीरे- धीरे यही शौक अपनी भावनाओं को डायरी में उतारने का साधन बन गया । किसी शैली में अपने आप को बाँधना मुझे नहीं आया…। जो भी जज़्बात दिल में उमड़ते हैं, मैं उन्हें किसी न किसी रूप में समेट कर काग़ज़ पर उतार देती हूँ । हाइकु, ताँका व चोका मंच पर आकर बहुत कुछ सीखने को मिला ! कम शब्दों में अपने भावों को व्यक्त करने का अनोखा अवसर मिला ! सीखने की कोशिश जारी है…और ता-उम्र रहेगी ।
मैनें मई २०१२ में अपना ब्लॉग शुरू किया; जिसका लिंक नीचे दे रही हूँ । अभी तक मैंने कुछ कविताएँ, दो कहानियाँ तथा कुछ लेख लिखे हैं । उनमें से कुछ मेरे ब्लॉग में हैं, कुछ अभी मेरी डायरी में ही हैं ।
 
       मेरी कुछ कविताएँ व एक कहानी ‘दैनिक भास्कर’ राजनांदगांव में प्रकाशित हुईं हैं । एक रचना ई-पत्रिका ‘नव्या’ में प्रकाशित हुई है।
फेसबुक में “साहित्यिक मधुशाला”  के हाईकु/ तांका मंच पर भी मेरी रचनाएँ हैं और उनमें भी मैं विजेता रही हूँ । http://hindihaiku.wordpress.com व ‘सहज साहित्य’ पर भी मेरे रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं।
 
 

 

2 thoughts on “क़तरा-क़तरा पी ख्वाहिशें मैनें..

  1. बेबस अरमानों के ढेर में…. टूटे ख्वाबों के रेतमहल में…,

    पी क़तरा क़तरा..जो ख्वाहिशें मैनें…हुईं जज़्ब वही मेरी रूह में…।।

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