ओ! सागर!!!

ओ! सागर! तुम इतने खारे क्यों हो?कहाँ से लाते हो इतना खारापन?

उच्च पर्वतों से निकली,अठखेलियाँ-बल खातीं, इठलातीं मीठी नदियाँ ,

कभी झरनों सी झरझराती, कभी झीलों सी झिलमिलातीं मीठी नदियाँ ,

बाँधों से हरहरातीं, दुनिया की प्यास बुझा,धरती को लहलहातीं नदियाँ,

प्रिय-मिलन को आती अभिसारिका सी,तुम पर सर्वस्व लुटातीं नदियाँ,

फिर भी.… तुम इतने खारे क्यों हो? कहाँ से लाते हो इतना खारापन ?

 

सारे संसार को अपने नमक के स्वाद से आनंदित कर नमकीन बनाते हो.

इस दुनिया की सारी कड़वाहट अपने में भर कर और संगीन हो जाते हो.

प्रकृति की अनुपम देन से गर्भ में अनंत सुन्दर जीवों की क्षुधा मिटाते हो.

गरमाहट से तट पर प्रेमी-जोड़ों को उष्ण-मधुर प्रेम का पाठ पढ़ाते हो.

फिर भी.… तुम इतने खारे क्यों हो? कहाँ से लाते हो इतना खारापन ?

ओ! सागर! तुम इतने खारे क्यों हो? कहाँ से लाते हो इतना खारापन?

 

शोर मचाती उत्ताल-तरंगों के संग आकाश को छूने को मन ललचाता है,

पर तुम्हारी काया के अंदर की हलचल की सुनामी से मन डर जाता है,

तट से क्षितिज तक फैला अनंत- असीम साम्राज्य मन को भा जाता है,

सुनहरे-रुपहले रंगों के संग सतरंगा इन्द्रधनुष तुम में झिलमिलाता है,

फिर भी.… तुम इतने खारे क्यों हो? कहाँ से लाते हो इतना खारापन ?

ओ! सागर! तुम इतने खारे क्यों हो? कहाँ से लाते हो इतना खारापन?

 

- शील निगम

आगरा (उ. प्रदेश )में जन्म ६ दिसम्बर
शिक्षा- बी.ए.बी.एड.

कवयित्री, कहानी तथा स्क्रिप्ट लेखिका.
मुंबई में १५ वर्ष प्रधानाचार्या तथा दस वर्षों तक हिंदी अध्यापन.
विद्यार्थी जीवन में अनेक नाटकों,लोकनृत्यों तथा साहित्यिक प्रतियोगिताओं में सफलतापूर्वक प्रतिभाग एवं पुरुस्कृत.
दूरदर्शन पर काव्य-गोष्ठियों में प्रतिभाग एवं संचालन तथा साक्षात्कारों का प्रसारण.
आकाशवाणी के मुंबई केंद्र से रेडियो तथा ज़ी टी.वी. पर कहानियों का प्रसारण.प्रसारित कहानियाँ -’परंपरा का अंत’ ‘तोहफा प्यार का’, ‘चुटकी भर सिन्दूर,’ ‘अंतिम विदाई’, ‘अनछुआ प्यार’ ‘सहेली’, ‘बीस साल बाद’ ‘अपराध-बोध’ आदि .
देश-विदेश की हिंदी के पत्र -पत्रिकाओं तथा ई पत्रिकाओं में कविताएं तथा कहानियाँ प्रकाशित.विशेष रूप से इंगलैंड की ‘पुरवाई’ कनाडा के ‘द हिंदी टाइम्स’ व ‘प्रयास ‘ तथा ऑस्ट्रेलिया के ‘हिंदी गौरव’ व ‘हिंदी पुष्प’ में बहुत सी कविताओं का प्रकाशन .’हिंद युग्म’ द्वारा कई कविताएँ पुरुस्कृत.
बच्चों के लिए नृत्य- नाटिकाओं का लेखन, निर्देशन तथा मंचन.
कहानियों के नाटयीकरण साक्षात्कार,कॉन्सर्ट्स तथा स्टेज शो के लिए स्क्रिप्ट लेखन.
हिंदी से अंग्रेज़ी तथा अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद कार्य-हिंदी से अंग्रेज़ी एक फिल्म का अनुवाद, ‘टेम्स की सरगम ‘ हिंदी उपन्यास का अंग्रेजी अनुवाद, एक मराठी फिल्म ‘स्पंदन’ का हिंदी अनुवाद.
A special Issue of ‘TSI, Hindi 111 Top Hindi Women Writers of 21st Century’, published in August,2011, has included me in this issue as one of the top writers in ‘The Sunday Indian’ published in NOIDA

डॉ आंबेडकर फेलोशिप अवार्ड से सम्मानित. (दिल्ली)
“हिंदी गौरव सम्मान से सम्मानित (लंदन )

विदेश-भ्रमण - जर्मनी, फ्रांस, हॉलैंड, बेल्जियम, फ़िनलैंड, युनाइटेड किंगडम,ऑस्ट्रेलिया ,सिंगापुर तथा मालदीव्स.

पता- वर्सोवा,अंधेरी (पश्चिम),मुंबई-६१.

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