ओ दीप !

 

ओ दीप !
जलते पंकितबद्ध
अनगिनत बिखेरते प्रकाश
झिलमिलाते सीढि़यों पर
लगातार बार बार
अहा !सुंदर मनोहर
लगता है अब बुझे कि तब

ओ दीप !
अभी तो संध्या हुर्इ ही
शेष पूरी निशा
तेल-बाती फिर
लहराकर खिलखिलाकर
दिखाकर मुस्कराकर
हंसाकर जलाकर
जलो जलो जलो !

ओ दीप!
देव दीपा
सामने कल-कल
बहती गंग
अठखेलियां पूर्ण चंद्र
नाचती नौकाएं सतह पर
करता स्वर पतवार
छपाक छप्प छप्प
संगीत मधुर उच्चरित
तव स्वागतम

ओ दीप !
घाटों से घट-घट
अंत: स्थल प्राण तक
प्रकाशित उजाला
दूर-दूर अति दूर
अनंत जीव-जीवन तक दिखे
बस दीप
ओ दीप, तू दीप !

 

-मनोज कृष्ण

 

मनोज कृष्णा जी मीडिया और मनोरंजन के विभिन्न क्षेत्र में दस साल से अधिक का अनुभव रखते हैं | वे टीवी शो, सीरियल और फिल्म के लिए मुंबई के स्वत्रंत स्क्रिप्ट लेखन में सक्रिय हैं |

वर्तमान में वे सॉफ्ट ड्रीम फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड में लेखक हैं |

 मुंबई में: मनोज ने २०१० से २०१२ के बीच में काफी सारे कार्यक्रम में सफल योगदान दिए हैं | उनमें से कुछ चुनिन्दा नाम हैं ; क्राइम पेट्रोल, अखियों के झरोखों से, रुक जाना नहीं, हम हैं बजरंगी, लापता गंज, डिटेक्टिव देव, आदि |

2007 के बाद से अप्रैल २०१०: प्रज्ञा टीवी (फिल्म सिटी नोएडा) के साथ सह निर्माता और वरिष्ठ पटकथा लेखक | प्रोमो लेखन में विशेषज्ञता, जिंगल्स / संवाद स्क्रीन प्ले, वृत्तचित्र, विसुअलिज़िंग, विचारों और गल्प स्क्रिप्टिंग का विकास.
वृत्तचित्र कार्यक्रमों आधारित: भारत के तीर्थ, उत्सव, गुरुकुल, यात्राक |

 २००१ से २००७ : इस दौरान मनोज की प्रिंट मीडिया के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका रही; लोकायत, सीनियर इंडिया, महामेधा, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया, माया, यूनाइटेड भारत, जनमुख, आदि |

 व्यावसायिक योग्यता: M.J.M.C. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से

शैक्षणिक योग्यता: एम.ए. (हिन्दी), C.S.J.M. विश्वविद्यालय. कानपुर

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