एक लम्बी कहानी : पर्दाफाश

लन्दन के एक स्कूल में वह पढ़ाती थी. रूहैम्प्टन यूनी से उसने बी.ए.  किया था . एक अच्छे माँ बाप की एक अच्छी बेटी. तेईस चौबीस की उम्र. पांच फुट चार इंच क़द. यूं चेहरा   लम्बूत्रा   सा था मगर हेज़ल-नट जैसी दो गोल गोल आँखें, जीवन को प्रसारित करती सी,बिना बोले दिल की बात खोलती  चलती  थीं .अपनी ओर अनायास ही हरेक का ध्यान खींच लेने वाली एंजेला किसी भाषा की मोहताज नहीं  थी .

      

एंजेला खेल कूद में हमेशा आगे रहती थी.  इसके अलावा हाथों में हुनर भी खूब था. मिट्टी के खिलौने गढ़ना ,मुखौटे बनाना , कठपुतलियाँ चलाना, आदि सब उसके अल्हड़पन के शौक थे. कई बार उसने पढाई के साथ साथ शाम की क्लासों में अपने अंतर्मन में बसी सृजनात्मकता को व्यक्त करने के लिए तरह तरह कि कलाएं सीखी थीं.

 

बी.ए. कर चुकी तो पिता ने पूछा,”अब आगे क्या इरादा है? ” उन्हों ने सुझाव दिया,” अच्छा होगा अगर तुम लन्दन के बाहर किसी और शहर में नौकरी ढूंढ लो. इससे तुम्हारा दायरा भी बढेगा. ”

      

एंजेला ने शर्माते हुए कहा,” हाँ वह तो ठीक है मगर मै अपने मित्रों से इतनी दूर नहीं जाना चाहती.”

      

पिता ने छेड़ते हुए पूछा,” मित्रों से या मित्र से?”

      

एंजेला ने होंठ सी लिए. प्रेम अंतर्मुखी होता है. अभी तो अंकुर ही फूटे थे. नाईजल ड्रामा और साहित्य का स्नातक था. स्टेज पर उसकी एक्टिंग देखकर कोई भी उसकी प्रतिभा को नकार नहीं सकता था. एंजेला ने उसे शेरीडन के नाटक में मिसेज मैलाप्रोप की भूमिका निभाते देखा था . वह लोटन कबूतर हो गयी थी. उसके दो दिन बाद ही कॉलिज की कैंटीन में वह अपनी ट्रे उठाये उसी के सामने आ बैठा. एंजेला से उसने हलो  कहा और पूछा , ” यहाँ कोई और बैठनेवाला तो नहीं है ? ”

      

एंजेला ने अपनी शर्मीली मुस्कान के पीछे से कहा,”फिलहाल कोई नहीं.” 

      

”ठीक है. फिर तो आज मेरा दिन बहुत अच्छा है!” और दोनों खिलखिला के हँस दिए.  

       

पहचान बढ़ी तो अक्सर चलते फिरते एक दूसरे का अभिवादन कर लेते. अभिवादन से बात चीत पर उतरे तो ड्रामा कॉलिज के परिसर में लगी बर्नार्ड शौ की प्रतिमा के आस पास की सीढ़ियों पर दोनों अपना अपना सैंडविच खोलकर खाने लगे ताकि बातों के लिए अधिक से अधिक समय मिल सके. कैंटीन में जाना और लाइन में लगना समय की बरबादी लगने लगी . फिर वह दिन भी आया कि वह दुनिया की नजरों से दूर छुपना चाहने लगे . नाईजल पूर्व संध्या को ही फोन कर देता और एंजेला को किसी रेस्तराँ या नाटक या म्यूज़ियम में मिलता . एक दूसरे का स्वागत वह अब आलिंगन से करते. आर्ट कॉलिज के गलियारे में सजे रोमांटिक कवियों के  पत्थर के धड़  उन्हें देखकर  मुस्कुराते . 

      

जल्दी ही एंजेला को नौकरी मिल गयी और इसी के साथ साथ बी. एड की ट्रेनिंग भी शुरू हो गयी. उधर नाईजल कॉमेडी की ओर झुकने लगा. कॉमेडियन बनना और लोगों को अपनी बेवकूफियों से हँसाना सबसे कठिन काम है.

 

दो वर्ष कहाँ पंख लगा कर उड़ गए पता ही नहीं चला . एंजेला की नौकरी पक्की हो गयी अब वह अलग फ़्लैट लेकर रहने लगी जहां हर रात नाईजल उसके साथ होता . कभी कभी उसके आने से पहले खाना बनाकर टेबिल सजा कर उसका इन्तजार करता बैठा होता . एंजेला फूली नहीं समाती . एंजेला इन्तजार कर रही थी कि कब नाईजल को पक्की नौकरी मिले और कब वह उससे शादी  का प्रस्ताव रखे .

        

 

एंजेला की अभिन्न मित्र थी बैटी स्मिथ . दोनों ने बी. ए. साथ साथ किया था  मगर उसका झुकाव मीडिया की ओर था . अतः वह संवाददाता का कोर्स करने डरहम चली गयी .  बैटी को वह अपने दिल कि हरेक बात बताती थी . फिर वह दीं भी आ गया जब नाईजल को नौकरी मिल गयी . मगर उसकी कंपनी एक ऑस्ट्रलियन कंपनी थी जो इश्तेहार बनाती थी . नाईजल ने धीरे धीरे एंजेला के मन की थाह लेनी शुरू करी . क्या एंजेला कहीं विदेश में रहकर अध्यापन करना पसंद करेगी ?एंजेला का माथा ठनका . अपने माँ बाप की वह एकलौती संतान थी . वह दोनों अपनी अपनी नौकरियों से बंधे हुए थे . यूं सबकुछ छोड़कर कैसे चल पड़ते? एंजेला ने कोई पक्का उत्तर देने के बजाय इशारा किया और कहा ,” देखी जायेगी . सब निर्भर करता है कि हमारा रिश्ता कहाँ तक पहुँचता है .”

    

 

इतना सीधा इशारा करने पर भी नाईजल की ओर से पैगाम नहीं आया . उसका नवयुवा मन दूर के नज़ारों में उड़ान भरने लगा था . नाईजल की बॉस एक चालीस पैंतालिस बरस की अविवाहित स्त्री थी . नाईजल उसके हाथों में चाक़ू के नीचे खरबूजे की तरह था . उसके पास पैसा था और तमाम ऐश्वर्य के साधन . नाईजल को अपनी कंपनी में भरती करने के बाद वह उसे साथ ही रखती . नाईजल की ड्रामा और  थिएटर में अभिरुचि के कारण वह उसे हमेशा अपने साथ रखती . कंपनी के खर्चे से मँहगी से  मँहगी टिकटें मँगवा कर आये दिन कोई न कोई शो देखने जाने लगी . एंजला का पत्ता धीरे धीरे कटने लगा . सीधा सदा नाईजल अब दामी सूट पहनता ऊँची सोसाइटी में घूमता . उसकी बॉस डैफ्नी विल्सन ने उसे अपना टॉय बॉय बना लिया . एंजेला उदास रहने लगी . जब उसके पिता को पता चला तो बेटी का गम उनसे सहन नहीं हुआ . मगर बिना किसी ठोस रिश्ते के वह नाईजल को डाँटते भी तो कैसे ? एक दिन वह भी आया जब एंजेला ने नाईजल के मोबाइल पर डैफ्नी के सन्देश देख लिए . खूब चिकनी चुपड़ी बातों से सराबोर ! बातें जो एंजेला को बनानी नहीं आतीं थीं , बातें जो अनुभवी बाजार् वालियां करती हैं , बातें जो सदियों से पुरुषों को लुभाती आईं है .

 

       

एंजेला का दिल टूट गया . बैटी को रो रो कर सब बताया तो वह अगले दिन ही आ धमकी . उसकी भोले दिलवाली परमप्रिय मित्र मुश्किल में थी . उस दिन शनिवार था . बैटी ने आते ही पहला काम किया कि एंजेला के फ़्लैट में जितना सामान नाईजल कथा सब गत्ते के डिब्बों में डाला और उसे बिल्डिंग के डस्टबिन के पास रख दिया . कीमती सामान एक सूटकेस में डाला और उसे भी नीचे  लौबी  में  भिजवा  दिया . उसके बाद नाईजल को फोन करके समझा दिया कि वह सब उठा कर ले जाय और भूल जाए कि उसका कोई वास्ता है यहाँ से .

       

नाईजल सामान लेने नहीं आया . वह सब जमादारों ने उठा लिया . बैटी ने एंजेला का सामान  भी बाँधा और  टैक्सी वैन में रखवाकर वह सीधे  एंजेला के पिता के घर आ गयी .

      

” एंजेला मै तुम्हारी आँखों में एक भी आँसू नहीं देखना चाहती . वह चला गया तो उसे जाने दो . समझ लो कि वह तुहारे लायक नहीं था . दुनिया भरी पड़ी है अभी और भी इससे अच्छे लोग मिलेंगे . ”

      

” जरूर मिले ! टीचिंग में तो पुरुषों का कोई स्थान है ही नहीं हमारे देश में . मिलेंगे क्या खाक ? ” एंजेला की रुलाई हलक में अटकी थी .

       

दिल प्यार के लिए पात्र नहीं देखता . प्यार एक अजस्त्र धारा की तरह एक बार जिस राह बह गया वही उसे प्रिय . एंजेला अवसाद के गह्वर में जा फंसी . कौन उबारे ?  पिता का घर , उसका अपना कमरा —सब कुछ उसे सहलाता दुलराता मगर उसे सब बासी लगता , धोखा खाकर उसका ध्यान कहीं भी नहीं लग पा रहा था . रोना चाहती तो अपने पर गुस्सा आता . गुस्सा करना चाहती तो अपराधी जाने कहाँ चला गया था .

 

विवशता उसके ह्रदय के नासूर को छील छील कर उसे सालती  रही . हर वस्तु उसे नाईजल की याद दिलाती यहाँ तक कि अपना प्रतिबिम्ब भी . वह अपने अंग प्रत्यंग को छू छूकर नाईजल के स्पर्श को ढूँढती फिर हताश होकर रोने लगती . रातों की नींद उड़ गयी . दिन में सारी ताकत निचुड़ी हुई सी देह लेकर वह स्कूल के कामों में ढीली पड़ गयी . दो तीन बार हेडमिस्ट्रेस ने उसे आगाह किया . ठीक से खाती पीती भी नहीं थी . कमजोरी से एक दिन बेहोश हो गयी . कुछ दिन के लिए छुट्टी लेकर घर बैठी तो बजाय सेहत सुधरती , वह और भी अंतर्मुखी हो गयी . उसके दुःख में उसके माँ बाप भी बुझे बुझे से रहने लगे .

  

बैटी कैंट के एक शहर में किसी न्यूज़ एजेंसी के दफ्तर में काम कर रही थी . एंजेला को उसने समझाया कि वह अपना करीयर कतई बदल ले . पढ़ाने के काम में वह हमेशा दूसरों से ही उलझती रहती है . अपनी ओर ध्यान देने का समय ही नहीं मिलता . शायद इसीलिये नाईजल पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गयी . एंजेला बैटी का सानिध्य पसंद करती थी . बैटी बेहद प्रैक्टिकल थी और तर्कसंगत बातें करती थी . एंजेला जिस ठोस व्यक्तित्व का सहारा ढूँढ रही थी वह बैटी के सिवा और कोई नहीं हो सकता था .

 

एंजेला ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और बैटी की फर्म न्यूज़  इंटर नैशनल में नौकरी कर ली . भाषा पर उसकी पकड़ अच्छी थी . जहान भर की   documentary   डॉक्युमेंतरी फिल्मो की कमेंट्री लिखने का काम उसे मिल गया . उस विभाग में दो पुरुष और तीन उसी के जैसी स्त्रियाँ थीं . विभाग का अध्यक्ष , लिओ मेकेंजी एक सभ्य क्लासी व्यक्ति था . फालतू बातों में समय नहीं गँवाता था . उसका सहयोगी केविन एंजेला की उम्र का था और बात बात पर फिकरे क़स कर सबको हँसाता रहता था .

     

एंजेला इस नए माहौल और नौकरी की नयी चुनौतियों में  शीघ्र  ही अपना दुःख भूल गयी . फिर भी पुरुष की चाहना से अभी वह कोसों दूर थी . मन ही मन वह प्रेम से विरक्त हो गयी थी . पूरी पुरुष जाति पर से उसका विश्वास मानो ख़तम हो गया था . 

       

एक साल चट पट गुज़र गया . पूरे ऑफिस में उसके काम की धाक बैठ गयी .  एक दिन लिओ ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया .

        

” एंजेला , इनसे मिलो . ये हैं फ्रैंक कार्टर . एक्टर भी हैं और  डायरेक्टर  भी . छोटी छोटी फ़िल्में बनाते हैं . ज्यादातर घरेलू इस्तेमाल की  चीज़ों   के इश्तेहार . छोटी छोटी कहानियों के जैसी इबारत तुम्हें इनके लिए लिखनी होगी . मुझे यकीन है कि तुम यह काम पसंद करोगी . ”

       

” मेरा सौभाग्य है कि मै इतने मशहूर व्यक्ति से मिली . मै अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोडूँगी . ”

       

”कभी कभी तुम्हें साईट पर भी जाना पडेगा . ”

 

” हाँ हाँ क्यों नहीं ! मेरी कोई और जंजीर नहीं है मुझे रोकने के लिए . ”

       

” इसीलिये मैंने तुम्हें चुना है . आशा है तुम निराश नहीं होगी .”

       

” धन्यवाद . मै बेहद अनुगृहीत हूँ आपकी . ”

 

इसके बाद फ्रैंक कार्टर ने उसे अपना परिचय दिया . अगले दिन उसे अपनी टीम के अन्य लोगों से मिलवाया . एंजेला मनोयोग से अपना काम सँभालने लगी . रोज पहले अपने दफ्तर जाती . वहाँ हाजिरी लगवा कर फ्रैंक के दफ्तर जाती . करीब एक महीना बीत गया तो बैटी ने उससे कुरेद कर पूछा 

        

” कैसा है  फ्रैंक ? ”

       

” बात चीत का धनी है . बहुत पैसेवाला है पर पीने पिलाने का शौक नहीं है उसे . उसका शौक गोल्फ खेलना है और उसका खुद का गोल्फ कोर्स है कहीं दूर किसी गाँव में . ”

       

” शादीशुदा है क्या ? ”

       

” हाँ . दो बच्चे भी हैं मगर बीवी से जुदा होकर रह रहा है . ”

        

” क्यों ? ”

       

” क्या पता . काम अच्छा है उसका .”

 

बैटी ने ऑफिस में और लोगों से  पूछा  ताछा तो किसी को कुछ खास पता नहीं था उसकी व्यक्तिगत जिन्दगी के बारे में . फ्रैंक चूंकि एक एक्टर था , उसके  पहनने  ओढ़ने का सलीका जरा दामी और भड़कीला था . गर्मी की ऋतू में फूलदार हवाइयन बुश-शर्ट और सफ़ेद सिल्क के ट्राउज़र पहनता या कभी कभी धारीदार टी-शर्ट और खाकी चीनो पैंट . सुन्दर घने और सुनहरे बाल उसपर खूब फबते  थे .  वेस्ट एंड के मेफेयर इलाके में उसका ऑफिस था. यहाँ वह अनेकों उद्योगपतियों से मिलता  और उनकी कंपनियों के इश्तेहार बनाने का ठेका लेता . उसकी कलाई पर कोई न कोई दामी घड़ी होती . उसकी कार भी ओपन एयर शैवरलेट थी . उसका मानना था कि कई कारों की इंश्योरेंस आदि देने से अच्छा था कि एक ही बढ़िया गाड़ी हो .

        

देखने में वह चालीस वर्ष से ऊपर का लगता था . इतना व्यस्त होने पर भी ऑफिस के बाहर उसकी बातचीत  में एक फक्कडपन था जो उसे बेहद विश्वस्त्नीय बना देता था . एंजेला को सिखाते समय वह अनुभवी व् गंभीर पिता की तरह अपनी बात तौल तौल कर कहता था . इसीलिये एंजेला उसके संग जल्दी ही खुल गयी . फ्रैंक ने कई जरूरी कार्यभार उसे एक एक करके सौंप दिए . जिन्हें वह अपने निर्धारित समय पर पूरा करके देने लगी . उसका अपना बोस लिओ भी खुश था . क्योंकि व्यापार में अगर ग्राहक खुश तो सब खुश . 

         

बैटी को अलबत्ता यह सब इतना सहज नहीं लग रहा था . उसने एंजेला को अकारण एक दिन आगाह किया कि फ्रैंक की बीवी उससे अलग रहती है और फ्रैंक किसी को उसका नाम तक नहीं बताता .

 

एंजेला ने बुझे मन से कहा ,” बैटी मुझसे तुम यह उम्मीद तो रखो ही मत कि मै फ्रैंक पर डोरे डालूँगी . जानती तो हो कि मेरा दिल कितना टूट चुका है . ” कहते कहते वह फूट फूट कर रोने लगी . बैटी ने उसे गले लगा लिया और बीसियों बार माफ़ी मांगी . ” तुम्हारा दिल दुखाने का मेरा कोई इरादा नहीं था . शायद मै ही जलन खा गयी . ”

         

ऑफिस में और भी लड़कियां थीं जो उसके भाग्य से ईर्ष्या करती थीं और गुप चुप फिकरे कसती थीं . सिवाय ड़ोरीन स्टारलिंग   के ,  सभी कनखियों से देखते उसका फ्रैंक से बातचीत करना . हालाँकि फ्रैंक के लिए एंजेला महज एक कार्यकर्त्री थी . वह औपचारिक दूरी बनाए रखता.  उसकी उम्र, उसका दबदबा ,उसकी पड़ प्रतिष्ठा के लिए जरूरी आचार विचार , सब मायने रखता था  व्यवहार जगत  में .

 

एक दिन ड़ोरीन स्टारलिंग सुबह ऑफिस नहीं आई . लिओ को यह बेहद खला . ड़ोरीन उसकी सेक्रेटरी थी . वह गंभीर और अनुशासनप्रिय स्त्री थी . उम्र शायद तीस के आस पास रही होगी . जबसे नौकरी संभाली , पिछले पांच वर्षों में एक बार भी अनुपस्थित नहीं हुई थी . लिओ की तो वह छाया समान थी . सब हंसते थे कि लिओ एक परफेक्ट पुरुष है . घर में उसकी एक विश्वासी , प्रेमपगी पत्नी थी और ऑफिस में उसकी अंधभक्त सेक्रेटरी . ड़ोरीन इन सभी फिकरों को एक स्वर्गीय मुस्कान के साथ स्वीकार कर लेती . उसका बॉय फ्रेंड कई साल से उसके संग था . सबने सोंचा कि बीमार होगी . दो चार दिन यूं ही निकल गए .

       

” बैटी ज़रा ड़ोरीन का पता लगाओ . यूं तो कभी गायब नहीं हुई . लगता ही नहीं कि वह कभी बीमार पड़ सकती है . ” लिओ बौखलाया सा आदेश दे रहा था .

 

बैटी ने कई बार फोन किये मगर उसका घर का फोन बज बज कर चुप हो जाता . 

करीब एक हफ्ते के बाद पुलिस का अफसर लिओ मेकेंजी के ऑफिस में पहुंचा . ड़ोरीन गायब है . उसके दोस्त पीटर ने पुलिस को बताया . इन्स्पेक्टर ने कहा कि पीटर ने डोरीन से वीकेंड में मिलने का वादा किया था .पर वह नहीं आई . पीटर उसे  ढूँढता रहा . कहीं पता न चलने पर उसने मार्लो में उसके माँ बाप के घर फोन किया . माँ अस्पताल कि नर्स है उसने बताया कि डोरीन वहां नहीं गयी . अब दुबारा सोमवार आगया है . इतने दिन कोई सुराग न मिलने पर पुलिस को खबर दे दी गयी है . लिओ हैरान था . कोई अनहोनी घटना , और डोरीन जैसी शरीफ लड़की के साथ घटी हो , यह उसकी कल्पना से भी परे था . फिर भी  पुलिस ने एक एक करके सब सहकर्मियों से गुप्त साक्षात्कार किया . लिओ अक्सर डोरीन पर कई मेहरबानियाँ करता था . इसलिए उसे शक के घेरे में ले लिया गया . वह गुप्त रूप से उसके ऊपर नज़र रखने लगे . उसके जीवन के हर अगले पिछले रेकोर्ड जांचे जाने लगे . 

 

एंजेला बैटी के शक्कीपन से चिढ़ सी गयी . वह जाँ बूझ कर उससे कटने लगी और फ्रैंक का चर्चा उससे करना बंद कर दिया .  फ्रैंक को अगली बार दफ्तर में डोरीन के बारे में पता चला तो वह बहुत विक्षिप्त हो गया . पांच सात  मिनट सिर झुकाए बैठा रहा . फिर बोला ” माय गौड ! इस इलाके में हर  साल एक न एक लडकी गायब हो जाती है . करीब सात या आठ किस्से हो चुके हैं  . कितने शर्म की बात है कि हमारी पुलिस कुछ भी नहीं कर पा रही .  लड़कियों को खुद ही सावधान रहना चाहिए . ”  

 

उस दिन उसे एंजेला को लेकर एक खाना पकाने का तेल बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर से मिलना था . इश्तेहार की शुरुआत सूरजमुखी के फूलों से होनी थी . तेल  बनाने  वाला एक कविता चाहता था जिसमे सूर्य की ऊर्जा छोटे बच्चों में प्रविष्ट  हो रही  हो . ऑफिस से निकलकर फ्रैंक ने एंजेला को पहले एक ऊँचे दामोवाली ड्रेस बुटीक में ले जाकर खड़ा कर दिया बुतीकवाली से उसने तकरीबन हुकुम देते हुए कहा ” हैना इस खूबसूरत परी को बाजार लूटने के लिए ले जाना है . जरा इसे अपग्रेड कर दो . ”   बुटीक वाली फ्रैंक को पहले से जानती थी . हंसकर उसने एंजेला से अनुमति माँगी ,”में आई ? ” एंजेला के पास कोई विकल्प नहीं था . वह अन्दर के कमरे में  ड्रेसेस  ट्राई करने चली गयी . फ्रैंक फैशन पत्रिकाओं के पन्ने उलटता पलटता रहा . हर बार जब एंजेला ड्रेस पहनती वह उसे दिखाने को बाहर बुलाता . ऐसे करीब दस बारह ट्रायल लेने के बाद आखिर एक पीले से प्रिंट की ड्रेस उसने पसंद की जिसकी बैक बेहद नीचे तक कटी थी और एंजेला की पतली कमर को पूरी सुन्दरता से उभार रही थी . मैचिंग के  सैंडिल पहनकर एंजेला एकदम मॉडल लग रही थी .

   

” इसकी क्या जरूरत थी फ्रैंक ?मैंने कोई उसके इश्तेहार की मॉडल तो नहीं बनाना ? सिर्फ स्क्रिप्ट लिखनी है . ”

 

फ्रैंक अपने गंभीर पैतृक आदेशात्मक स्वर में समझाते हुए बोला ,”  तुम इस खेल में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो .  यु आर द की फिगर  . क्या यह जरूरी नहीं कि तुम स्वयं  सूर्य किरण  सी लगो ? इसका ग्राहक की मनोवृत्ति पर बड़ा स्वीकारात्मक असर पड़ता है . ”

     

” पर इतना खर्चा ?”

     

” मै बराबर कर लूंगा न! डील हो जाने दो एक बार . सब चलता है. इट्स आल पार्ट ऑफ द गेम.”

 

डोरीन का कुछ पता नहीं चला।  पुलिस ने उसे लापता लड़कियों की लम्बी फेहरिस्त में दर्ज़ कर लिया।  उसके मरने का कोई  चिन्ह नहीं मिला।  न ही कोई कारण।  अतः ह्त्या या आत्महत्या की कोई संभावना नहीं मानी  गयी।  फिर भी अगर कोई लाश मिलती है तो पुलिस फ़ौरन बताएगी।  

 

धीरे- धीरे किस्सा पुराना  पड़ गया और रोज़- रोज़ की खुसुर- पुसुर बंद होने लगी।  सब अपने- अपने जीवन की पटरियों पर अपनी- अपनी गति से पुनः चलने लगे ,. मरता क्या न करता।  लियो ने डोरीन की जगह बैटी को अपना पर्सनल सेक्रेटरी बना  लिया।  यदा- कदा  पुलिस किसी सूत्र की तहक़ीक़ात करने वहां आ जाती।  लियो पर उनका फोकस ज्यादा था मगर वह हर स्थिति में निर्दोष साबित हो रहा था।  जिस वीकेंड को डोरीन गायब हुई थी वह पूरे समय  अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उपस्थित था और इसका प्रमाण भी मिल चुका था। अतः वह शक के घेरे से बाहर था।  ऑफिस में एक- एक करके सबका साक्षात्कार लिया जा चुका था।  डोरीन का बॉय फ्रेंड  पीटर भी अपना बयान दे   चुका था और वह सच की  कसौटी पर खरा उतरा था।  डोरीन की माँ कई बार आकर अपनी बेटी की गतिविधियों की पूछताछ कर गयी थी मगर सदा चुप रहनेवाली डोरीन के बारे में

सहकर्मियों को बहुत कम जानकारी थी।  ऑफिस के बाद वह किससे मिलती थी, कहाँ जाती थी आदि कोई न बता सका।  

 

सूरजमुखी के तेल का विज्ञापन फ्रैंक को मिल गया।  वह अपनी टीम के साथ कैमरा साधकर निकल पड़ा।  एंजेला  की कविता उसके विषय पर एकदम सटीक बैठी और उसे संगीत में बांधा गया।  एंजेला  गर्व से अपने माँ और पिता को सुनाती।  वह खुश  रहने लगी।  बदले में फ्रैंक ने उसे खूब घुमाया फिराया।  हालाँकि दोनों में मैत्री बढ़ने लगी मगर एंजेला  उसे अपने नाइजल की जगह नहीं देख पाती थी।  फ्रैंक ने उसे बताया भी कि उसकी पत्नी सेरा उससे रूठ कर बच्चों को लेकर चली गई।  वह लोग वेल्स में रहते हैं। वह एक कट्टर क्वेकर परिवार से है और अपने धर्म को सबसे ऊपर स्थान देती है।  फ्रैंक , फिल्मे बनानेवाला पति  उसकी आस्था और शुद्ध आदतों का मान नहीं रख पाया।  धंधे में हर समय सिगरेट और शराब से परहेज़ नहीं हो सकता।  यूं वह खुद इन बुराइयों से दूर रहता है।  उसे खेल कूद का शौक है और वह गोल्फ और टेनिस खेलता है।  मगर सेरा को उसके दोस्त  यार छिछोरे लगते थे अतः वह सबसे कटने  लगी।  

 

” एंजेला तुम क्या गोल्फ खेल सकती हो? ” फ्रैंक ने एक दिन पूछा।   

 

” नहीं , कभी कोशिश भी नहीं की। ”

 

” कोशिश नहीं की या मौका नहीं लगा?”  

 

” जो समझ लो। ” 

 

” मेरे संग आओ एक दिन। मेरा अपना गोल्फ कोर्स है डाउन विल में। तुम्हें गोल्फ खेलना सीखा दूंगा। मेरे कई मित्र हैं जिनकी बीबियाँ भी संग आती हैं। कुछ तो अपने पति से भी अच्छा खेलती हैं। हर शनिवार को हमारे क्लब की मीटिंग होती है।  जब पानी बरस रहा होता है तब हम शतरंज या ताश खेलते हैं।  तुम भी आओ तो तुम्हारा मन बदलेगा।  

 

हाँ हूँ करके एंजेला ने उसे टाल दिया। फ्रैंक के संग जाने के बजाय उस वीकेंड में वह अपने पिता माता से मिलने गयी। वह दोनों फूले न समाये। एंजेला विस्तार से उन्हें अपने बारे में बतलाती रही।  फ्रैंक ने जो तस्वीरें खींची थीं उनकी अल्बम भी उसने  उन्हें दिखाइ। माँ ने गर्व से वह अल्बम अपनी सहेलियों को दिखाने के लिए रख ली।  एंजेला के पास एक से एक दामी पोशाकें हैंडबैग और मोबाइल फोन आदि देखकर उन्हें बहुत संतोष हुआ।  

 

अगले दिन , एक माँ की सहज जिज्ञासा से उसने पूछा ,” क्या तुम फ्रैंक को पसंद करती हो? ” 

 

” अरे माँ ! तुम भी क्या क्या सोंचती हो ? वह उम्र में मेरे पिता के समान है , शादीशुदा है और उसके दो बड़े बड़े बच्चे भी हैं।   उसकी शिक्षा और प्रोत्साहन मेरे भविष्य के लिए बहुत काम का है।  ——-  नहीं नहीं !! मैं  हरगिज़ भी उसे इस नज़र से नहीं देख पाऊँगी।  मैं किसी की दूसरी तीसरी पसंद के रूप में अपने को कभी स्वीकार नहीं कर पाऊँगी।  ”  

 

हालाँकि माँ को यह सुनकर तसल्ली हुई मगर जवान बेटी को यूं अकेला देखना उसको टीसता था।  वह बोलीं , ” एंजेला , जीवन  साथी विश्वासी होना चाहिए। जवान छोकरे विश्वासी नहीं होते।  घर बसाने के लिए तुम्हें ही उद्यम करना होगा।  ” 

 

” हाँ पर फ्रैंक के लिए मेरा मन नहीं मानता।  वह मुझे अपने मित्रों से मिलवाना चाहता है। शायद वहां कोई द्वार खुले।  ”  

 

तुम्हे ही उद्यम करना होगा . ”  

          

” हाँ , पर मेरा मन नहीं मानता . कोई तो और मिलेगा . फ्रैंक मुझे अपने लोगों से मिलवाना चाहता है . शायद वहाँ कोई द्वार खुलेगा . ” 

         

सोमवार को एंजेला वापिस अपनी मेज पर आ बैठी . लिओ ने उसके सामने कई छोटे बड़े काम ला पटके . एंजेला पूरे हफ्ते व्यस्त रही .  शुक्र वार को बहुत थोड़े से वक्त के लिए फ्रैंक ऑफिस में दिखा . शायद पेमेंट देने आया था . सिर्फ पांच मिनट    उसके पास रुका और पूछा ” कल शनिवार है . गोल्फ खेलने चलोगी ? ”

        

एंजेला ने दुबारा नहीं सोचा झट से हामी भरली . बाद में बैटी को बताया . बैटी को उससे ईर्ष्या हुई. मुंह बनाकर बोली कि उसे अपने बॉय फ्रेंड जस्टिन के साथ कहीं जाना है . दिन बहुत सुन्दर था . एंजेला अकेली ही जाने को तैयार हो गयी . शहर से  करीब चालीस मील दूर एक छोटा सा गाँव था  डाउन  विल . कोई साठ सत्तर मकान पास- पास सटे हुए . एक तंग सा बाज़ार ,उसमे छोटी- छोटी पुरानी चाल की दुकाने . उन सबके ऊपर रिहाइशी फ़्लैट बने हुए थे . सभी मकान फूलों व् बेलों से ढके हुए , बिलकुल परीलोक के घरौंदे से लगते थे . गाँव की हद से करीब दो मील और आगे जाकर फ्रैंक का फार्म हाउस था .उसका नाम भी  डाउन विल फार्म था .मेन  सड़क से अन्दर की ओर दायीं तरफ रास्ता बना था . मोडपर दोनों ओर सफ़ेद रंग से पुते हुए खम्भे थे जिनपर कोई गेट नहीं था . खम्भों के पास खासी घनी खर पतवार उगी हुई थी . फ्रैंक वीकेंड में यहीं ठहरनेवाला था अतः एंजेला अपनी खुद की गाड़ी में ड्राइव करके फ्रैंक के पीछे- पीछे गयी . आधा मील अन्दर जाकर गाड़ी फिर दायीं ओर मोड़नी पड़ी . यहाँ से  भी थोड़ा जिग- जैग करके आगे जाने पर एक लाल ईंटों की कॉटेज नज़र आई . कॉटेज के बाहर एक माली फूलों की क्यारियों की देख भाल कर रहा था . फ्रैंक को देखकर उसने अपनी हैट को छुआ . फ्रैंक ने उसे हेलो कहा . आगे की ओर फुलवाडी बेहद सुन्दर ढंग से सजाई गयी थी . क्यारिओं की मेड़ें पत्थरों से चिनी हुई थीं . सामने के पोर्च पर पीले गुलाब के फूलों की लतर खूब घनी  फूली हुई थी और घर की लाल ईंटों के विलोम में उसके रंग और भी चटक रहे थे .

        

उतरते ही  स्वीट पी के फूलों की खुशबू एंजेला के मनप्राण को सराबोर कर गयी . फ्रैंक की नज़रों  से उसका लम्बी लम्बी साँस लेना छुपा ना रहा . बड़े नखरे से उसने एंजेला की गाड़ी का दरवाज़ा खोला और उसे उतारा . फिर उसके हाथ को ओठों से  छूकर कहा ”बी माई गेस्ट ” .

         

एंजेला विभोर  हो गयी . अन्दर भी घर की सज्जा आलीशान थी . सजावट  के उपकरण कम मगर दामी थे . अत्याधुनिक सोफा  व् अन्य फर्नीचर महँगे कालीन और कहीं एक कण भी  धूल का नहीं .

 

” फ्रैंक तुम रोज तो यहाँ नहीं रहते फिर भी यह घर इतना साफ़ कैसे ? ” 

 

” एक कामवाली लगा रखी है . . हफ्ते में दो बार आकर सफाई आदि कर जाती है और जरूरत का सारा सामान खरीदकर रख जाती है . आज भी उसे बुलाया है ताकि तुम्हारी और मेरे अन्य मेहमानों की खातिरदारी में कोई कसर ना रहे .” 

 

एक- एक करके महफ़िल गरम होने लगी . चार जोड़े और आ गए . घर के पिछवाड़े कुछ दूर तक बजरी का फर्श था . उसके बाद घने पेड़ो का बगीचा . अधिकांश पेड़ फलों के लगे हुए थे . इस बगीचे में प्रवेश करने से पहले एक पक्की जगत वाला कुआं था  जिसपर छप्पड़ नहीं था . गराड़ी के खम्भे  अपने निशान छोड़कर धराशायी हो चुके थे . जगह की प्राचीनता पूरे वातावरण को गरिमा प्रदान कर रही थी . इसके बाद एक पुराने जमाने की गोल गोल पत्थरों से जड़ी  संकरी सड़क थी जिसके दोनों ओर सेब के वृक्ष इस प्रकार लगाए गए थे कि उनकी शाखों से पूरा रास्ता छवाया हुआ था .  एंजेला ने किसी पार्क में रोज़बावर देखा था जहां  गुलाब कि बेलों के बीच रास्ता बना था और जब वह फूलती थीं तो फूलों का चंदोवा सा बन जाता था .पर एप्पल बावर का आईडिया एकदम नया लगा .

 

फ्रैंक हंसा ” जब मार्च में इन पेड़ों में सफ़ेद गुलाबी  फूल छा जाते हैं तो ऐसा लगता है कि स्वर्ग के बादलों में चल रहे हों . ” कहते  कहते एंजेला का कोमल हाथ उसने थाम लिया . एंजेला शरमाकर सिमट सी गयी .  उसके गाल    गुलाबी हो गए पर उसने अपना हाथ नहीं छुडाया , यह सोंचकर कि कहीं  फ्रैंक बुरा न मान जाए .

 

पीछे- पीछे और लोग भी आ रहे थे . एप्पल बावर के दूसरे छोर पर मखमली घास की ढलाने पसरी थीं . 

 

” यह है मेरा खुद का गोल्फ कोर्स ! ”

 

एंजेला ठगी रह गयी . 

 

उस दिन उसने गोल्फ की स्टिक को पहली बार छुआ . बचपन से ही वह खेलकूद में अच्छी थी . कुछ देर बाद एक स्त्री ट्रे में ड्रिंक्स और स्नैक्स लेकर आई . फ्रैंक के मित्रों में उसे मार्टिन पियर्सन सबसे ज्यादा जीवंत प्रकृति का लगा . उम्र में फ्रैंक से कुछ  छोटा होगा और डाउन विल से सटे एक और कस्बे के चर्च का पादरी था . इस वक्त वह टीशर्ट और हाफपैंट में गोल्फ खेलने आया था .

ले दे कर एंजेला का समय बहुत सुन्दर निकला . सबके जाने के बाद वह भी अपनी कार से लन्दन की ओर चली . फ्रैंक ने उसे  गालों पर होंठों से छूकर बाई बाई कहा . दुबारा आने का निमंत्रण भी दिया . एंजेला  गदगद हो गयी .

 

फ्रैंक के फार्महाउस की हदें पार कर वह वापिस डाउन विल गाँव की ओर मुडी . शाम का आठ बज रहा था.   अगस्त महीने का  धूपीला दिन .  काफी गरम मौसम .सूरज अभी पीला सा ही था . उसकी किरणों की तीखी  कर्ण रेखाएँ आँखों पर पड़कर यदा कदा चौंधिया रही थीं . इंग्लिश गाँवों की एक खासियत उनकी घने वृक्षों से आच्छादित  संकरी सड़कें हैं जो गुफा की तरह लगती हैं . एंजेला की गाड़ी करीब एक मील बाद ऐसी ही एक सुनसान घुमावदार सड़क पर जा रही थी कि अचानक उसके सामने एक  स्त्री आ गयी . एंजेला ने उसे बचाने के लिए जोर से ब्रेक मारा तो उसने हाथ के इशारे से उसे रोकना चाहा . स्त्री कमजोर और बीमार लग रही थी . इस सुनसान जगह पर एंजेला शाम के समय उसके लिए रुकने को हरगिज़ भी तैयार नहीं थी . अतः फुर्ती से उसने गियर बदला . गाड़ी को दस कदम पीछे लिया और एंगिल बदलकर उसे बाईपास करती हुई आगे बढ़ गयी . उसके पूरे बदन  में झुरझुरी छा गयी . दब जाती गाड़ी के नीचे तो ! कहाँ से अचानक आ टपकी ? क्या कहना चाहती थी मुझे रोक कर ? क्या वह  कोई भूत थी ??

वहम की भी हद नहीं . थकी लगती थी . शायद लिफ्ट माँग रही थी . शायद मुझे रुक कर उसकी बात सुननी चाहिए थी .  सहायता से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए . मगर एंजेला को गाड़ी चलाते समय खास बात सिखाई गयी थी की कभी किसी  अनजान को लिफ्ट मत दो . ना ना ना ! न तो वह निर्दयी थी और ना कसूरवार अतः बेकार सिर खपाने से क्या फायदा ? भूल जाओ .

 

नौ बजे वह अपने फ़्लैट में थी और नहाने के लिए टब का नलका खुला छोड़कर टेलीफोन पर आये सन्देश सुनने लगी . तभी फ्रैंक  का फोन भी आया यह पूछने के लिए कि वह सही सलामत पहुँच गयी क्या . एंजेला ने उसे कई तरह से धन्यवाद दिया और फोन रख दिया . फोन रखने के बाद उसे ध्यान आया कि उसे बताना चाहिए था उस गंदी सी औरत के बारे में . पर कोई बात नहीं , फिर कभी सही .

 

अगले दिन खाने की छुट्टी में उसने बैटी को विस्तार से फ्रैंक के घर के बारे में बताया . बैटी बेहद प्र भावित हुई . फिर उसे उकसाती हुई बोली,  ”आसामी बुरा नहीं है . क्या ख्याल है ?”  

 

” पता  नहीं ! मुझसे  बीस साल बड़ा है कम से कम। . इसके अलावा हमें उसकी शादीशुदा बीवी के बारे में कुछ भी नहीं पता , . क्वेकर लोग बड़े सिद्धांतवादी होते हैं . मुझे नहीं लगता कि वह कभी पक्का डाईवोर्स ले पायेगा . अगर ऐसा होता तो वह कबका   दूसरी शादी कर चुका होता . उसके पैसे पर तो लडकियां मक्खियों की तरह चिपकेंगी ! हैं कि नहीं !! ”

 

” हूँ ! बात तो तुम्हारी ठीक ही लगती है . . पर अगर वह दुबारा बुलाये तो जाओगी ?” 

 

” शायद नहीं . कुछ है जो मुझे खटक रहा है . शायद उसका नज़रें न मिलाना या ऐसा ही कुछ . मै सहज नहीं महसूस करती .  रहने ही दो . ”

 

” पर क्यों  ?”

 

” मुझे लगता है मेरा नाईजल एक दिन वापिस आ जाएगा . वह बेहद साफ़ दिल इंसान था इसीलिये फटाक से किसी  फाँफाँ  के  झाँसे में आ गया . एक दिन उसका सम्मोहन टूट जायेगा और वह अपने पहले प्यार को ढूंढता आयेगा . ”

 

” बकवास ! कोरी कल्पना !! विशफुल थिकिंग !!! — ओह डिअर डिअर , पागल मन का कोई इलाज नहीं .!!!! ”

 

” बैटी सुनो . अगर मै फ्रैंक को अपनी मंजिल मान लूं तो यह एक तरह से नाईजल से बदला लेना होगा . क्योंकि यह स्थिति  एकदम वही होगी . एक कमउम्र , अनुभवशून्य ,उत्साही , महत्वाकांक्षी लड़की और एक बड़ी उम्र का परिपक्व अमीर ! कानूनी रिश्ता कुछ भी नहीं ,बस ऐश्वर्य का आकर्षण . !!  ना , शुक्रिया . ”

  

मौसम बदलने लगा था . सितम्बर में फलों का बगीचा अपने पूरे निखार पर था . फ्रैंक ने उसे फिर से निमंत्रित किया . उसने सोंचा जाने में क्या  हर्ज  है. एक दिन और तफरी ही सही . बैटी को बिना बताये वह निकल ली . 

 

इस बार जब उसकी गाड़ी फ्रैंक के फार्म के प्रवेशद्वार पर पहुंची तो घुसते ही झाड़ियों के पास उसे वही स्त्री दिखाई दी . इसबार भी उसने इशारे से उसे रोकना चाहा . वह ब्रेक मार कर थोड़ा पीछे आई तो वह स्त्री पीठ मोड़कर चलने लगी . एंजेला ने उसे  पुकारा ,  ” हे तुम क्या चाहती हो ? ”

वह स्त्री मुड़ी और उसे कुछ क्षण आग्नेय दृष्टि से घूरती रही . फिर उसकी आँखों में अवसाद छा गया . वह दुबारा पीठ मोड़कर बिना कुछ कहे चलती बनी . एंजेला ने समझ लिया कि कोई पागल भिखारिन होगी . वह वापिस अपनी कार में बैठकर बंगले  तक आ गयी . फ्रैंक उसे देखकर बेहद खुश हुआ . आगे बढ़कर दरवाजा खोला और हाथ पकड़कर गाड़ी से उतारा . शाम का चार बजा था . दिन जल्दी ढलने वाला लग रहा था . घर के अन्दर की सज्जा पहले से भी बेहतर की गयी थी . एंजेला अपने को बहुत महत्वपूर्ण समझने लगी .  

 

” आज मेरी कामवाली नहीं आयेगी . सुबह ही सब तैय्यारी करके चली गयी है . दो हफ्ते की छुट्टी कर गयी है ” 

 

” और आपके बाक़ी दोस्त ? ” 

 

” ओह मैंने सिर्फ मार्टिन से कहा था कि आना . पर उसका भी पहले कहीं और जाने का प्रोग्राम है . शायद सात या आठ बजे के बाद आ जाये . ”  

 

” तो फिर  गेम का क्या होगा ?”

 

” नहीं खेलेंगे . बैठकर बातें करेंगे . या ताश खेलेंगे . तुम्हारे जैसी इंटेलिजेंट कंपनी हो तो बहुत कुछ किया जा सकता है एक शाम  में . ”

एंजेला यह सुनकर खुश हो गयी पर फिर भी उसे लगा कि जैसे फ्रैंक की आँखें उसे आर पार देख रही हैं . वह सिमट सिकुड़ कर बैठी रही . फ्रैंक ने फिर उसके पास आकर कहा ,. ” आज तुम  बेहद  सुन्दर लग रही हो . पर इतना औपचारिक व्यवहार क्यों ?  यह कोई मेरा ऑफिस तो नहीं है ? ”

 

फिर वह अपनी जगह से उठा और एक खूबसूरत लाल काँच के गिलास में शरबत ढाला और पूछा, ” थोड़ी वोदका मिलाऊँ ? ”

 

फिर वह अपनी जगह से उठा और एक खूबसूरत से लाल गिलास में उसने शरबत ढाला और पूछा , ” थोड़ी वोदका मिलाऊँ ? ” 

 

” हाँ थोड़ी तो चल जायेगी  , बस हल्की सी . ”

  

 

फ्रैंक ने ड्रिंक बनाई . अपनी नई फिल्म की शूटिंग करने वह ऑस्ट्रेलिया जाने वाला था . जहाँ बैठा था वहीँ से उसने रिमोट कंट्रोल  से सब पर्दे बंद कर दिए . एक बटन ऐसा दबाया कि जिससे एक अत्याधुनिक सिनेमा स्क्रीन धीमी गति से उनके सामने सरक आई . फिर दूसरे रिमोट कंट्रोल से उसने ऑस्ट्रेलिया  की फिल्म दिखानी शुरू करी .ड्रिंक के सरूर में एंजेला बिलकुल बेफिक्र होकर हंसने बोलने लगी . फ्रैंक उसके एकदम करीब आ बैठा . उसका हाथ एंजेला के कन्धों पर सरक आया . एंजेला  कुनमुनाई . नशे में भी उसे भान हुआ कि वह अकेली है और यह उसका नाजायज़ फायदा उठा सकता है . परन्तु प्रतिवाद करने की क्षमता उसमे नहीं बची थी . उलटा वह उसपर लुढ़क गयी .

 

फ्रैंक ने उसे बाहुपाश में समेट लिया तो वह उसकी छाती पर सिर रखकर बच्चों की तरह रोने लगी . ऑस्ट्रेलिया से उसे नाईजल  की याद बुरी तरह सताने लगी थी . उसके अंतस की व्यथा पिघलकर अटपटे शब्दों में अपनी कहानी कहने लगी . फ्रैंक उसे पुचकारता सहलाता रहा . फिर अचानक उसकी गिरफ्त कसने लगी .

 

एंजेला ने कहा ” मुझे छोडो न . तुम मुझे हर्ट कर रहे हो . ” 

 

” अभी कहाँ , अभी तो समाँ रंगीन भी नहीं हुआ . मेरे साथ  एक जाम और , हमारे पहले चुम्बन के नाम ! ”

 

उसने उठकर दो जाम बनाए फिर उसे अपने हाथों से मनुहार करके धीरे- धीरे पिलाने लगा . एंजेला पूरी तरह सुध- बुध खो बैठी थी  . वह उसके हाथों में रबड़ की गुडिया की तरह थी और फ्रैंक उसे  जी भर के  मरोड़ता सहलाता जा रहा था . सहसा उसने अपने ऊपर के कपडे निकाल दिए और उसका आलिंगन करने लगा . एंजेला को स्थिति का कुछ- कुछ भान होने लगा . फ्रैंक अपने नाखून उसके कोमल मांस में निर्दयता से घोंप रहा था . एंजेला को दर्द हुआ तो वह झटके से अलग जा पड़ी . नो- नो कहती वह  दूर हटने लगी तो फ्रैंक ने लपककर उसे पकड़ा और दो चांटे उसके गालों पर जड़ दिए . एंजेला की कनपटी सन्ना गयी . अब वह छूटकर भागना चाहती थी मगर कोई दैत्य फ्रैंक की आत्मा में प्रवेश कर चुका था . वह उसे ताबड़तोड़ मार रहा था . खींच खींच कर उसे पास लाता और दांतों से उसके कोमल अंगों को काटता . एंजेला पूरी तरह होश में आ गयी थी . 

 

उसने पूरी  शक्ति  से फ्रैंक को धकेला मगर उसकी ताकत से  हार  गयी . फ्रैंक उसे घसीटकर अपने बेडरूम में ले जाने लगा . एंजेला ने एड़ी दार सैंडल पहन रखे थे .उसने वार किया तो सैंडल की पैनी एड़ी फ्रैंक की जांघ में लगी . एंजेला बराबर चीख रही थी  मगर वहाँ कोई भी उसकी सुनने वाला नहीं था . फ्रैंक ने उसे जमीन पर गिरा दिया और उसकी छाती पर चढ़ बैठा . और उसका मुंह बंद करना चाहा . एंजेला के हाथ उसकी टांगों से दबे हुए थे फिर भी पूरी ताकत से उसने अपने नाखूनों से फ्रैंक की पीठ में छील दिया . फ्रैंक तड़पकर चीखा तो वह अपने को छुड़ाकर बाहर भागी .   जल्दी में उसे जो दरवाज़ा दिखा उसी से वह  बाहर निकली . पर यह घर का पिछवाड़ा था . सामने वही कुआँ और फलों का बागीचा दीख पड़ा . फलों के बगीचे का रास्ता संकरा  था . उधर जाना खतरनाक हो सकता था  . उसे घर के सामने की ओर जाना होगा . पर जैसे ही वह मुड़ी फ्रैंक एक चाबुक लेकर  उस पर पिल पड़ा . वह चाबुक की मार से तड़प उठी . सिल्क का ब्लाउज पहले ही फट चुका था . चाबुक से मारते मारते  फ्रैंक उसे कुँए की ओर धकेलने लगा . एंजेला अधमरी सी उससे बचती बचाती एकदम कुँए की मेड्पर आगई . पीछे कुआँ सौ फुट  गहरा था . शाम के झुटपुटे में एकदम अंधा अन्धकार नज़र आया .

 

डर के मारे उसने आँखें बंद कर लीं . नहीं ! नहीं ! अगर वह यहाँ मर गयी तो किसी को पता भी नहीं चलेगा . वह किसी को बताकर तो आई नहीं थी . अगली बार जब फ्रैंक ने चाबुक चलाया तो वह बिजली की फुर्ती से मुड़ी और चाबुक को हाथ से पकड़  लिया . अब उसे हाथ में लपेटकर खींचने लगी . फ्रैंक अट्टहास करके कहने लगा , ” खींच खींच . ऐसे ही तेरे पास आऊँगा  ! ” और —-वह बहुत पास आ गया .सहसा एंजेला पूरी ताकत से उछली और उसके पार दूसरी तरफ जा  खड़ी हुई . पासा पलट गया तो फ्रैंक उसपर झपटा मगर उसने दाँत और आँखें भींचकर एक लात उसके निचले पेट में मारी . एक जोर की कराह निकली और  फ्रैंक आँखों के सामने से गायब हो गया . एंजेला ने दायें देखा बाएं देखा फिर सुना   छपाक !!!!

एक क्षण हक्की बक्की खड़ी रही फिर समझ में आया कि फ्रैंक कुँए में गिर पड़ा था .

 

ह्त्या !  उसने ह्त्या कर दी थी !! वह खुद बुरी तरह घायल थी . हाँफते हाँफते वह उसी पिछले दरवाज़े से अन्दर घुसी . लडखडाते  हुए वह बाथरूम में गयी . मुंह धोया . पानी पिया . अपनी धजा सुधारी . ब्लाउज और स्कर्ट दोनों फट गए थे . किसी तरह उन्हें समेटा और अपना पर्स लेने  सिटिंग  रूम में आई . तभी सन्नाटे को चीरता फोन बज उठा . एंजेला जमकर पत्थर हो गयी .  फोन बज बज कर आंसरिंग मशीन पर चला गया . एक पुरुष का स्वर था , ”मै मार्टिन बोल रहा हूँ . तुम्हारी तरफ आ रहा हूँ .  पंद्रह बीस मिनट में मिलते हैं .” एंजेला को पूरी होश आ चुकी थी . उसने समय नहीं गँवाया . अपना पर्स उठाया और घर का दरवाज़ा आदि यूं ही खुला छोड़कर सीधे अपनी कार उठाई और घर की राह ली .

 

एंजेला अपनी कार लेकर भागी ही थी कि  फादर  मार्टिन दस मिनट बाद ही वहाँ आ पहुंचा . घर का दरवाज़ा खुला पड़ा था इसका मतलब फ्रैंक घर के अन्दर ही होगा . वह आवाजें देता हुआ अन्दर घुसा तो कोई जवाब उसे नहीं मिला . सभी जगह झाँकने के  बाद बेडरूम में भी गया पर कोई नहीं था . अलबत्ता सारा कमरा अस्त व्यस्त पड़ा था . फादर मार्टिन घर के पीछे भी गया मगर फ्रैंक कहीं नहीं दिखाई दिया . अजीब आदमी है . यूं घर खुला छोड़कर कहाँ सटक गया . मार्टिन ने गैरेज में कार चेक करी तो वह बाहर ही नहीं निकाली गयी थी . गैरेज का दरवाज़ा तालाबंद मिला . मार्टिन वापिस सिटिंग रूम  में आया तो देखा दो खूबसूरत  काँच के गिलास गलीचे पर लुढ़के पड़े थे . यानी मार्टिन के आने से पहले वहाँ कोई और उसके साथ बैठा था . कौन हो सकता है ? मार्टिन ने दोनों गिलास सीधे करके रख दिए . टेलेफोन के रिप्ले  का बटन दबाया तो उसे अपना ही भेजा हुआ सन्देश सुनाई दिया . पास मेज पर कई रिमोट कंट्रोल पड़े थे . उसने सोंचा कि जरूर किसी को छोड़ने चला गया है टहलता टहलता . अतः वह  दरवाज़ा उढ़का कर वापिस अपने घर चला गया . घर जाकर भी उसने दो तीन बार फोन किया मगर हर बार घंटी बज बज कर मेसेज पर चली गयी . उसने सोचा चलो जब आयेगा खुद ही फोन कर लेगा .

 

इसके बाद कोई बात चीत नहीं हुई . अगले दिन इतवार था जो फादर मार्टिन के लिए सबसे व्यस्त दिन होता है . सुबह की पूजा  सर्विस . डाउन विल और उसके आस पास के सभी लोग आते थे . किसी बच्चे की क्रिसेनिंग , किसी की सगाई वगैरह . या फिर कोई शादी और दावत . सोमवार से नया हफ्ता शुरू हो जाता था . सब अपने- अपने काम में व्यस्त . लकीर के फ़कीर . रूटीन से बंधे- बंधे . 

 

पूरा हफ्ता बीत गया . शुक्रवार को फादर मार्टिन को   फ्रैंक के घर के माली का फोन आया .

 

” अजीब बात है फादर ! घर का दरवाज़ा क्यों खुला पड़ा है ? मिस्टर कार्टर कहाँ हैं ? सफाईवाली  तो छुट्टी लेकर गयी थी . ”

 

” मुझे खुद कुछ नहीं पता . क्या तुम्हारे मालिक कहीं जाने वाले थे ? ”

 

” हाँ वह ऑस्ट्रेलिया जानेवाले थे मगर घर में ताला नहीं लगा है . ” 

 

” तुम क्या समझते हो ऐसा भूलसे हो गया हो शायद ? ”

 

” कभी पहले तो नहीं हुआ . ” 

 

” तुम्हें पता है कि उनके साथ और कौन था पिछले शनिवार को ? ”

 

” क्लब तो था नहीं . हाँ अगर कोई ख़ास मेहमान रहा हो तो —” 

 

” ख़ास मने क्या ? ”

 

” फ्रैंक कार्टर अपनी महिला मित्रों का जिक्र किसी से नहीं करता . अपनी बीवी के डर से . हो सकता  है कोई लड़की रही हो उसके संग . ”

 

” फिर तो बेफिक्र रहो . वह जरूर उसी के संग कहीं पड़ा रंगरेलियां मना रहा होगा . ड्रिंक के गिलास पड़े थे उलटे सीधे जब मै वहाँ  गया था . हो

सकता है दोनों धुत्त हो गए हों और घर बंद करने का ख्याल नहीं आया . लगता है उसी की गाड़ी में कहीं अज्ञातवास  पर निकल गया . ”

 

” हो सकता है . ”  

 

” तुम ऐसा करो कि घर का ताला अपनी चाभी से बंद कर दो . सब कुछ वैसा ही छोड़ दो . मैंने फोन पर मेसेज रखा है जब आएगा तुम्हें बुला लेगा.”  

 

” जी अच्छा ”

 

एंजेला  थकी हारी  गाड़ी चलाकर लन्दन वापिस आई तो अपने फ़्लैट में   जाते उसे डर लगा . आज नहीं तो कल पुलिस उसे  पकड़ ही लेगी . अगर ढूंडने आई तो पहले उसके घर आयेगी . दूसरे , उसकी जो हालत इस समय थी ,अगर वह अपने को सँभाल ना पाई तो फ़्लैट में उसे कोई पूछने वाला भी न था . वह सीधी बैटी के घर चली गयी . उसे सहायता चाहिए थी और विश्वास .

 

वीकेंड , शनिवार को बैटी का बॉय फ्रेंड जस्टिन भी वहीं था , एंजेला ने बेल बजाई तो जस्टिन ने दरवाज़ा खोला . खुलते ही एंजे ला उसके ऊपर गिर पड़ी . जस्टिन उसे जकड़कर अन्दर खींचते हुए चिल्लाया ,”अरे ये क्या हुआ तुझे ? बैटी जल्दी आ ! ” 

 

बैटी ने देखा तो सन्न रह गयी . एंजेला के कपडे फटे हुए थे . आँखें नीली काली मलूदा हो गईं थीं . होंठ सूज गए थे और उनपर खून जमा हुआ था . कंधे पर दांतों से काटने के निशान थे . बाहों और टांगों पर लम्बी लम्बी खरोंचें लहू से भरी थीं . बैटी ने   बदहवास होकर पुकारा , ” क्या हुआ तुम्हें एंजेला बोलो ? ”

 

एंजेला की शक्ति बस यहीं तक थी . बैटी का चेहरा अपने ऊपर झुका हुआ देखकर वह कुछ कह पाती कि उसकी आँखें बंद हो गईं  और वह बेहोश हो गयी . जस्टिन ने बैटी को सलाह दी कि इसे बिस्तर पर  लिटा  दो . इसे किसी ने बुरी तरह मारा पीटा है .  शायद इसका बलात्कार हुआ है .

 

” हमें पुलिस को बुलाना चाहिए . ” 

 

” नहीं इसे होश आ जाने दो . जबतक यह खुद नहीं कहती हम ऐसा नहीं कर सकते . हमारी शरण आई है . हमारा फ़र्ज़ है इस के रहस्य की हिफाज़त करना .कोई बात संदेहास्पद जरूर  है नहीं तो यह खुद पहले पुलिस स्टेशन जाती . ” 

 

संवाददाता होने के नाते जस्टिन अकलमंद व्यक्ति था . उसने पहला काम यह किया कि लेटी हुई एंजेला के फोटो ले डाले . बै टी ने हौले से उसके जूते उतारे तो सैंडल की नुकीली एड़ी टूटकर उसके हाथ में आगई . उस पर खून लगा था . जस्टिन की सहायता  से उसने उसके कपडे बदलवाए तो दिल हिल गया . ” जस्टिन हमें इसे अस्पताल ले जाना होगा . ” 

 

” ज़रा ठहरो . सब्र से काम लो . दो तीन घंटे देखते हैं . ” जस्टिन बार बार उसके दिल की धड़कन चैक करता , उसकी नब्ज टटोलता . हर बार वह कुनमुनाती .  

 

” इसे सोने दो . नींद सबसे अच्छी है इस के लिए इस हालत में .”

   

जब एंजेला को होश आया तो उसने जस्टिन को अपने सिरहाने बैठा पाया . उसने घबराकर आँखें खोलीं, उठने का उपक्रम किया और डरी हुई चिड़िया की तरह आशंकित नजरों से उसे देखने लगी ,फिर अपने बाजुओं से अपना वक्ष छिपाती हुई पीछे को हटने   लगी . जस्टिन उसका डर समझ गया. बेहद मृदुल स्वर में बोला,” एंजेला ,इट्स ओनली मी ! जस्टिन, पहचानो !! तुम यहाँ हमारे घर में हो . बैटी भी यहाँ ही है. घबराओ नहीं . लो थोड़ा पानी पी लो . तुम पिछले बारह  घंटों से सो रही हो . शाम हो चुकी है . आज सन्डे है.”  

 

एंजेला भले ही नींद से जाग गयी थी पर उसका मानसिक संतुलन निल था . वह अभी भी किसी भयानक यथार्थ से जूझ रही थी .   

 

रोकर चीखी , ” डोंट टच मी .  डोंट हर्ट मी ऐनी मोर . आई विल डाई . ”

 

जस्टिन उसी तरह धीमे धीमे बोला ,” नो बड़ी विल हर्ट यूं एवर अगेन , टेक इट  ईजी. ”

 

जस्टिन ने पानी का गिलास उसकी तरफ बढ़ाया तो एंजेला ने हाथ मार कर उसे गिरा दिया . शाय द उसे फ्रैंक का शरबत पिला  कर उसे बेसुध करना याद आ गया . पानी छलक कर उसकी जाँघों पर गिरा . महीन सूती कपडे की  नाईटी  गीली हो गयी  साथ ही दर्द की तीखी लहर उसे विचलित कर गयी . चमड़े के कोड़े के निशान उभरकर सूज गए थे . पानी चिलाने से वह पूरी तरह होश में आ गयी . अब उसने घूरकर जस्टिन को देखा . पहचान उसकी आँखों में तैर गयी . जस्टिन नरम टिशु से पानी सोखने लगा .  संवेदना और मित्रता पाकर एंजेला  धाड़ मार कर रोने लगी . आवाज सुनकर बैटी  रसोईघर में से निकल आई . और उसे  सांत्वना देने लगी . ” शुश शुश . धीरज रखो . कोई सुन लेगा . शांत हो जाओ . ” 

 

घर में जो दवाइयां थीं उनमे न्यूरोफेन मिल गयी जो अक्सर सिर दर्द के लिए स्त्रियाँ रखती हैं .  जख्मो पर लगाने की  मरहम  भी मिल गयी . रोते रोते एंजेला जब थक गयी  , तब उसको  गरम सूप पिलाया बैटी ने . थोड़ा  चित्त स्थिर होने पर एंजेला ने  बताया कि कैसे उसे नशा कराके फ्रैंक ने उसको मारा पीटा . कैसे उसका प्रेमालाप अचानक हिंसा में बदल गया .

 

” वह तो मुझे मार ही डालता मगर मै उसे धक्का देकर भाग निकली . मेरे धक्का देने से वह सर के बल पीछे की ओर गिरा और  फिर नहीं उठा . मै जैसे तैसे कार उठाकर यहाँ भाग आई हूँ . वह जरूर मेरा पीछा करेगा और दाँव देखकर   बदला लेगा . क्योंकि  वह एक वहशी दरिंदा है . ”

 

एंजेला के दिमाग पर मार का इतना गहरा असर बैठ गया कि वह उसके बाहर सोंच ही नहीं पा रही थी . तय हुआ कि अगले दो  चार दिन तक उसके बारे में सब कुछ गुप्त रखा जाये और देखा जाये कि फ्रैंक आगे क्या चाल चलता है . एंजेला की देखभाल के  लिए जस्टिन ने उस हफ्ते सिक लीव ले ली . बैटी अगले दिन ऑफिस गयी और एंजेला की ओर से बता दिया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है . जिसके कारण वह चोटें खा गयी है . चोटों से ज्यादा दहशत उसके दिल में बैठ गयी है . उसे डर के फिट आ  रहे हैं जिस कारण वह काम पर नहीं आ सकती . उसके माँ बाप उसे अपने पास ले गए हैं , वगैरह वगैरह . 

 

पूरे हफ्ते जस्टिन एंजेला की तीमारदारी करता रहा . फ्रैंक का कोई नाम निशान नहीं था . चेहरे और होठों की सूजन बहुत कुछ  नॉर्मल आ गयी . जस्टिन ने उसके घावों के अनेक चित्र उतारे . वह हर हालत में फ्रैंक को पुलिस के हवाले करना चाहता था .  कैमरे की रील पर ही तारिख और समय भी  छप  कर आता जा रहा था . संवाददाता होने के नाते यह एक सनसनीखेज कहानी बनती . मगर बिना एंजेला कि पूरी रज़ामंदी और सुरक्षा के वह इसे छाप नहीं सकता था . 

 

धीरे धीरे एंजेला की यादाश्त वापिस आने लगी पर उसके साथही यह एहसास भी कि फ्रैंक मर गया है और उसी के धक्के से .  जस्टिन और बैटी को उसने आदि से अंत तक सारी कथा सुना दी मगर यह नहीं बताया कि फ्रैंक का खून हो गया है .  उसका  अपराधी कुँए में गिर पड़ा है .

 

” एंजेला , अगर फ्रैंक फिर दिखाई दे तो क्या तुम उसे बक्श सकोगी ? हमारे ख्याल से तुम्हें उसपर जी . बी . एच का दावा  कर देना चाहिए .” जस्टिन ने एंजेला की थाह ली .  

 

” अगर जरूरत पड़ी तो . अपनी तरफ से मै चुप ही रहना चाहती हूँ . क्योंकि मेरे माँ बाप बहुत परेशान हो जायेंगे .  उम्र के इस दौर में एक इज्ज़त लुटी हुई बेटी ? ना ना .बेचारे टूट जायेंगे . ”  

 

”तुम यह भी तो समझो कि फ्रैंक ऐसा किसी और के साथ भी कर सकता है . इसलिए यह तुम्हारी ड्यूटी है कि उसका असली चेहरा दुनिया को बताओ . ”  

 

” वह सब ठीक है. अच्छा सोचूंगी.”

   

मन ही मन वह अपने से खुश थी. क्योंकि उसने किस्सा ही ख़तम कर डाला था और यह स्वतः हुआ. किसी दैवी इच्छा से. उसका बदला तो ऊपरवाला ले चुका था .  

 

दो हफ्ते के बाद वह अपने फ़्लैट पर चली गयी . उसका डर उसे हिलाने लगा . क्या होगा अगर फ्रैंक की मौत का पता चलेगा ?उसपर इल्जाम आया तो वह  कैसे  अपने को बेक़सूर साबित करेगी ? क्या यह उसी के साथ हुआ  था  या और भी कोई फंस  चुका था  ? कौन थी वह ग्रे बालोंवाली औरत ?   फ्रैंक की बीवी बता सकती थी कि वह असल में    एक मनोरोगी था . मगर वह कहाँ मिलेगी ?  एंजेला अगर कहीं भी पूछने जाती है तो पकड़ ली जायेगी कि फ्रैंक को उसने मारा है . चुप ही रहना पडेगा . मगर  जस्टिन को खलबली लगी हुई थी . एक घातक अपराधी का राजफाश करने की . 

 

उधर दो हफ्ते की छुट्टी  ख़तम करके  फ्रैंक की  हाउज़ कीपर रूथ वापिस काम पर आई. घर पर ताला पड़ा देखकर उसने माली   को फोन किया और चाभी लाने के लिए बोला. माली फ़टाफ़ट आ पहुंचा . आते ही उसने फ्रैंक के घर खुला छोड़कर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ गायब हो जाने की चटपटी खबर सुनाई . उसने कहा फ्रैंक आजकल ऑस्ट्रेलिया में है. 

 

” यह नहीं हो सकता . फ्रैंक एक ठन्डे दिमाग का संयमी व्यक्ति है . वह ऐसी अल्हड़ हरक़त कर ही नही सकता . ” 

 

” मानो मेरी बात  . चाहो तो फादर पियर्सन  से पूछ लो .”  

 

” होगा . मुझे सही नहीं लगता . ” कहकर प्रौढ़ा रूथ ने कंधे उचका दिए .    

  

घर खोलकर वह सफाई आदि करने लगी . काँच के दोनों गिलास उठाकर रसोईघर में धोने के लिए ले गयी . उनमे से एक  गिलास के पेंदे में उसे नीला रंग जैसा कुछ जमा हुआ मिला . उसने सूंघा तो दोनों गिलासों में से उसे संतरे और शराब की गंध  आई . उसने उन्हें सहेजकर सिंक के किनारे टिका दिया कि जाते समय धो देगी .  इसके बाद उसने सिटिंग रूम को संवारा . अजीब तरह से चीज़ें इधर उधर मिलीं . हर वस्तु यथास्थान रखी . तदुपरांत वह बेडरूम में गयी . वहाँ भी सब  उखड़ा दुखड़ा    पड़ा मिला पर जब वह बात रूम  साफ़ करने लगी तब पहली बार उसे किसी दुर्घटना का आभास हुआ .  बाथरूम के आईने पर खून की बूँदें थीं . सिंक में भी खून के सूखे हुए निशान थे . तौलिये में खून पोंछा गया था . और ध्यान से देखने पर फर्श पर भी कई जगह सूखा हुआ खून दीख पड़ा .  

 

वह चीख मार कर बाहर दौड़ी . माली को पुकारने लगी .  ” क्या हुआ ?क्या हुआ ?   ” कहता हुआ माली दौड़ा आया तो वह  भय से कांपती हाथ में तौलिया लिए खड़ी मिली .  

 

” देखो , यह खून ही है ”!

 

” हाँ है तो ! फादर पियर्सन को बुलाऊँ ?”   

 

” हाँ फ़ौरन . ” 

 

मार्टिन पियर्सन के आने पर दोनों ने अपनी शंका का कारण बताया . मार्टिन को एक बार फिर से घटना क्रम की  सारी  तस्वीर याद आने लगी . उसे याद आया कि सोफे पर कार्टर की कमीज पड़ी थी . कमीज के बगैर वह बाहर थोड़े ही गया होगा . उसे याद आया कि वहाँ दो गिलास लुढ़के पड़े थे .

 

” यहाँ गिलास पड़े थे ड्रिंक के कहाँ गए .? ”  

 

” हैं .  मैंने सिंक पर रखे हैं धोने के लिए . ”      

 

” लाओ ”.  

 

मार्टिन ने भी देखा कि एक गिलास के पेंदे में कुछ जमा हुआ ग्रे सा पदार्थ था . दूसरा ठीक लगता था .  

 

” पुलिस को बताना होगा . मगर पहले हमें फ्रैंक को ढूंढना होगा . ”  

 

बिना समय गँवाए मार्टिन ने दो चार फोन किये .फ्रैंक के  ऑफिस वालों ने बताया कि वह   काम पर से नदारद है .  उसका मोबाइल बंद है . पिछले दो हफ़्तों से कोई खबर नहीं .  

 

” क्या वह बिना बताये ही ऑस्ट्रेलिया चला गया ?”

 

” नहीं वह वहाँ गया ही नहीं .  उसकी वर्क फ़ोर्स तो यहाँ ही बैठी है . पूरी टीम उसके साथ चलती है . ”  

 

” तो सुनो फ्रैंक गायब हो गया है .चारों तरफ पता करो और खबर दो .” 

 

इसके बाद मार्टिन ने पुलिस को फोन किया. पुलिस ने आकर सारे घर की फोरेंसिक जांच करी. गिलास में एक में किसी नशीली दवा के अंश मिले. फिंगर प्रिंट लेने पर उसपर फ्रैंक की उँगलियों के निशान मिले. दूसरे गिलास पर भी उसी के निशान पाए गए. पुलिस ने अनुमान लगाया कि किसी ने उसे दो बार ड्रिंक दी. दूसरी बार उसमे ड्रग मिला दी जिससे फ्रैंक बेहोश हो गया. हो सकता है उसे किसी ने दुश्मनी में मारा या लूटा है. जो भी वहाँ रहा होगा वह फ्रैंक का करीबी और विश्वासी रहा होगा. पूछने पर रूथ ने बताया कि वह अक्सर लड़कियों को लाता था और तब वह एकदम अकेला रहना पसंद करता था.  यह उसकी सहचरी लडकियां अच्छी तरह जानती थीं.   

 

” तुम ऐसी किसी लड़की को जानती हो क्या? ” 

 

रुथ बेहद सकुचाते हुए बोली, ” सोर्री ऑफिसर, मगर मैंने कभीभी किसी को दोबारा नहीं देखा . फ्रैंक किसी से रिश्ता नहीं   खींचता था शायद.”     

 

” तुम्हारा मतलब उस दिन भी कोई नई लड़की रही होगी  उसके साथ ?  ”    

 

” शायद ! मै वहाँ नहीं थी उस दिन . ”    

 

माली ने भी कहा उस दिन वह वहाँ नहीं था .   

 

बेडरूम का निरीक्षण करने पर खून के धब्बे मिले जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए उठा लिया गया . इसी के साथ फर्श पर  घसीटने के निशान मिले मगर वह कहाँ तक जाते थे कुछ पता नहीं चल पाया . हो सकता है उसे किसी ने मार कर घसीटा हो .  पर कहाँ ले गया ? किसी लड़की से तो यह काम होने से रहा . 

 

सारे घर की छानबीन  की गयी मगर कोई सुराग नहीं मिला . अंत में पुलिस कर्मचारियों ने छद्म कैमरे घर के अन्दर बाहर लगा  दिए . पिछवाड़े भी छानबीन की  गयी . मगर कुछ हासिल नहीं  हुआ . पिछ्ला दरवाज़ा एक ख़ास कोड से खुलता था जो  सिर्फ रुथ को पता था . छानबीन से साफ़ पता चला कि इस रास्ते का प्रयोग किया गया था . यह भी निश्चित हो गया कि फ्रैंक की किसी से मार पीट हुई होगी .    

 

इन्स्पेक्टर एंडी ने वहाँ पर उपस्थित सब लोगों से कहा कि वह निश्चिन्त होकर इस घर को अकेला छोड़ दें क्योंकि  हमेशा अपराधी अपने अपराध स्थल पर वापिस जरूर आता है. अगर माली . रुथ या फादर वहाँ रहेंगे तो वह नहीं आयेगा .  उसके आने पर सभी कैमरे काम कर रहे हैं और झट उसकी फोटो उतार लेंगे . उसके आधार पर पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी .

 

एंजेला वापिस काम पर जाना चाहती थी मगर मानसिक रूप से अभी वह अस्थिर ही महसूस कर रही थी . बैटी ने सलाह दी कि  काम पर जाने से उसका ध्यान बँटेगा . उसने मन में सोचा कि वह तो निर्दोष है .उसे क्या शर्म . वहाँ सच्चा किस्सा तो कोई जानता नहीं था . सब यही सोंच रहे थे कि एंजेला की कार की टक्कर हो गयी है . एंजेला मान गयी . हालाँकि अभी उसके कंधे पर पड़े दाँत काटने के निशान पूरी तरह ठीक नहीं हुए थे . वह ड्रेस या स्कर्ट भी नहीं पहन सकती थी . उसकी ऊपरी टांगों पर चाबुक के  निशान  अभी सूख रहे थे .

 

अगले  इतवार  को वह हमाम में   गरम पानी  भर कर नहाई . अगले दिन उसे ऑफिस जाना था . आज पहली बार अपने घर पर वह अकेली थी . समय से अच्छा डाक्टर कोई नही . उसके मन में अपराध भाव तो था ही नहीं . इसके पहले कि फ्रैंक उसकी  इज्ज़त खराब करता वह उसकी गिरफ्त से छूट निकली थी . उसका  आक्रमण कर्ता अपनी मौत मरा था . नहा धोकर वह बहुत हल्की महसूस कर रही थी .  शीशे के सामने बाल सँवारने बैठी तो सहसा ध्यान आया उसके गले का लौकेट गायब था . यह लौकेट एक दिल की शकल का , डिब्बीनुमा था . इसपर हीरे से जड़ा  A छपा था . यानि एंजेला . लौकेट के अन्दर उसके माँ बाप  की फोटो थी . यह उसके  इक्कीसवें जन्मदिन पर उसे उपहार में माँ बाप ने दिया था . जबसे आजतक वह उसके गले से जुदा नहीं हुआ था .

 

ओफ्फोह ! जरूर वह खींचातानी में गिर पड़ा . अगर किसी के हाथ पड़ गया तो ? जाने दो  कौन पहचानेगा ! नहीं उसे चांस नहीं  लेना . अपनी सबसेकीमती वस्तु तो हर हाल में उसे वापस चाहिए थी . बहुत दिमाग पर जोर डाला तो उसे लगा कि लौकेट उसके गले में ही था पर जब फ्रैंक उसे घसीट कर घर के पिछवाड़े जा रहा था तब अपने को छुडा कर वह खड़ी होना चाहती थी तभी हाथापाई में गिरा होगा . एंजेला ने पक्का निश्चय कर लिया कि वह उसे ढूंढ लाएगी . हो न हो वह कुँए के आस पास पड़ा  होगा .

 

अगले दिन जब वह ऑफिस आई सबने उसे चीयर अप कहा ,तबियत का हाल पूछा . लिओ ने उसकी मेज पर एक गुलदस्ता रखवा दिया . जीवन वापस सम पर आता लगा . उसी दिन तो वह जायेगी नहीं . फिजूल होगा क्योंकि ऑफिस पाँच बजे बंद  होगा और चार बजे से अँधेरा छा जाता है . दिन की रोशनी में ही देखा जा सकता है . अतः एंजेला ने लिओ को पटाया कि वह कुछ काम अगर घर से ही कर सके तो उसे कुछ दिन और आराम मिल जाएगा . लिओ मान गया . जब वह घर जाने लगी लिओ ने   बेतकल्लुफी से कहा ” तुम्हे पता है? फ्रैंक कहीं सटक गया है आजकल ! उसके बारे में कई लोग पूछ रहे हैं .  बाए द वे तुम्हे  तो नहीं पता ?”

 

एंजेला ने सहज उत्तर दिया ” नहीं ” !

 

अगले दिन उसने पहले ऑफिस से  फाईलें समेटीं फिर  डाउन विल  की ओर निकल गयी. जैसा उसने सोचा था ,कुँए के पास  उसे गिरी हुई चेन मिल गयी . वह उसे लेकर चलती बनी . अपनी कार डाउन विल के गेट के पास उसने मोड़ी और मुश्किल से एक मील जा पाई होगी कि पुलिस कार ने उसको ओवरटेक करके किनारे लगाने को कहा . एंजेला ने सोचा कि गाड़ी में कुछ हो गया होगा . मगर पुलिस वाले ने उसे उसी दम थाणे में चलकर अपना बयान देने के लिए कहा . 

एंजेला घबरा गयी मगर उसने धीरज से काम लिया।  पुलिस के पूछने पर उसने बताया कि करीब एक महीना पहले वह वहाँ गोल्फ  खेलने आई थी . तभी उसका लौकेट वहाँ गिर गया था .जो कि आज ढूँढने पर मिल गया . तारीख भी उसने बता दी जिसकी पुष्टी  फादर पियर्सन ने कर दी  फोन ही पर . पुलिस ने उसे चेतावनी दी और कहा कि जबतक उनकी तहक़ीकात पूरी नहीं हो  जाती वह देश छोड़कर नहीं जा सकती .उसको अपनी हाजिरी देनी होगी जितनी बार वे बुलाएं वगैरह . उसके काम के घर के , माँ बाप के सारे विवरण लिखकर उसे जाने को कहा . उनकी टोन सुनकर एंजेला रोने लगी . एक स्त्री अफसर ने उसे बताया कि फ्रैंक  लापता है . शायद उसका खून हो गया हो . जबतक लाश नहीं मिलती एंजेला   शुबह के दायरे में है . क्योंकि फ्रैंक के  गायब होने के बाद से वह पहली व्यक्ति थी जो वहाँ आई .उसे अपनी सफाई देनी है तो उसे वकील दिया जायेगा . मगर  तहकीकात  के सारे सवालों का जवाब देना होगा जब भी पूछे जाएँ  इसलिए वहाँ होना जरूरी होगा . 

  

घर आकर एंजेला ने जस्टिन और बैटी को सारा किस्सा बताया . बताया कि कैसे वह शक के घेरे में है क्योंकि फ्रैंक लापता हो  गया है . वह बेहद घबरा रही है . 

इस बार भी उसने नहीं कहा कि फ्रैंक डूब गया था .

 

जस्टिन और बैटी ने हर संभव सहायता देने का निश्चय किया क्योंकि जस्टिन का अपना विश्वास था कि फ्रैंक जरूर एंजेला को   जान से मारने की पूरी कोशिश करेगा . उसके अन्दर का वहशी अपने राज़ को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूर करेगा कि वह अपनी राजदार को ख़तम कर दे. शायद इसीलिए वह छुप गया है. जस्टिन ने ऊपरी तौर पर मुंह बंद रखा. सिर्फ वह और बैटी जानते थे कि एंजेला का शिकार हुआ है. कानूनी खेल शुरू हो इसके पहले उसे फ्रैंक के असल चेहरे को जानना जरूरी था.जस्टिन ने इसका बीड़ा उठाया.

 

एंजेला के ऑफिस में सब फ्रैंक को ऊपरी तौर पर जानते थे . लिओ मेकेंजी पहले ही काफी सवाल जवाब भुगत चुका था डोरीन  के  केस में . जब कोई बात पुलिस पूछती वह  खुलकर  बैटी को ,अपनी सेकेट्री को बता देता . बैटी ने घुमा फिराकर फ्रैंक के बारे में उसकी राय ली मगर कुछ हाथ नहीं लगा . एंजेला का किस्सा भी छुपाये रखा . पुलिस यह मानकर चल रही थी कि एक वयस्क आदमी अपनी मर्जी से जब तक चाहे अज्ञातवास कर सकता है जबतक कि उसका मरना साबित न हो जाए . केवल शुबह पर उसे  मृत घोषित नहीं किया जा सकता .

 

जस्टिन ने एंजेला से पूछा कि क्या वह किसी और को जानती है जो फ्रैंक को अच्छी तरह जनता हो . एंजेला ने ड्रेस बुटीक वाली  हैना का पता बताया .

 

जस्टिन एक आम ग्राहक बनकर हैना के बुटीक में गया और उससे अपनी तथाकथित गर्लफ्रेंड के लिए ड्रेस दिखाने के लिए कहा . कई पोशाकें उलटने पुलटने के बाद उसने एंजेला की पीली  फ़्रोक निकाली और कहा , ” कुछ ऐसी ड्रेस दिखाओ .” 

 

” अरे यह तो हमारी ही दूकान की है . इसे फ्रैंक नाम के आदमी ने अपनी फ्रेंड के लिए खरीदा था . तुम उसे जानते हो क्या ? ”

 

” हाँ वह मेरी गर्लफ्रेंड की बेस्ट फ्रेंड है . फ्रैंक उससे शादी करने वाला है . ” 

 

” झूठ ! ”

 

” क्यों भला ? ” 

 

” फ्रैंक किसी से भी शादी नहीं करता  . पिछले पंद्रह सालों से मै उसे देखती आ रही हूँ . कितनी ही आईं और गईं . तुम अपनी फ्रेंड को बता दो चाहे . ” 

 

” हो सकता है उसे कोई पसंद न आई हो . एक बार धोखा खाकर आदमी जरा ज्यादा नकचढ़े हो जाते हैं .आखिर तो  वह   डाईवोर्सी है।  . मेरी फ्रेंड पर तो जी जान से फ़िदा है  .” 

 

” किसने कहा कि वह डाईवोर्सी है ? ”

 

” खुद उसी ने . वह पत्नी से अलग रहता है . उसके दो बच्चे हैं . ” 

 

” क्य़ा !!!! हः — किसी को कुछ किसी को कुछ ! पूछो जाकर उससे कि क्या किसी ने उसकी पत्नी को कभी देखा है ? ”

 

” तुम्हे क्यों इतना ताव आ रहा है ? जब वह चाहता है शादी करना तो करने दो . ” 

” पर यह सब गलत है . जिस औरत से उसकी शादी हुई थी वह ब्रेस्ट कैंसर से मर चुकी है . पंद्रह साल पहले . ”

 

” ना आ आ ! यह नहीं हो सकता ! ” जस्टिन अचंभित रह गया . 

 

” यही सच है . वही इस दुकान की मालिक थी . मै उसी की सहायक थी . उसी ने मुझे यह  धंधा सिखाया . उसके मर जाने के बाद फ्रैंक ने यह बिजनस मेरे हाथ बेच दिया .दरअसल काफी सस्ते में क्योंकि मै इसे अन्दर बाहर से समझती थी . ” 

 

” फिर तुमने उसपर डोरे डाले . क्या इसीलिये तुम मेरी फ्रेंड से जल रही हो ?”

 

” नहीं बिलकुल नहीं ! डोरे इतनी करीब की दोस्ती में नहीं फंसते . वह मेरा सिर परस्त था मुझपर बहुत मेहरबान भी . मगर मेरा  आदर्श पुरुष नहीं था . उसे अपने से बहुत प्यार था . बहुत पॉश और स्टाईलिश ! मेरी पसंद तो कोई बिल्डर या ट्रक ड्राईवर ही हो सकता है , एकदम रफ टफ , क्योंकि मै तो नीचे से ऊपर आई हूँ . मै नखरे और चोंचलों में पैदा ही नहीं हुई थी . मुझे मिटटी का घरौंदा चाहिए और पाँव के नीचे कड़ी धरती .” 

 

” तुम उसकी बीवी को जानती थीं ? ”

 

” हाँ ! मेरी बड़ी बहन जैसी थी . अमीर बाप की एकलौती औलाद ! नाजों से पाली . सुकुमार और फरेब से दूर ! माँ बाप के मरने  पर अकेली रह गयी . इस बुटीक से अपना समय काटती थी . यहाँ सब अमीर औरतें आती हैं . बेचारी कम उम्र में चली गयी।  फ्रैंक बहुत रोया होगा उसे खोकर . बेहद चाहता था . ”

 

” उसे या उसकी दौलत को ? ” 

 

” हः ! अब तुम मुझे हंसाओ नहीं . दौलत मिले यह कौन नहीं चाहता . तुम्हे मिलती तो क्या दान कर देते ? जलन खाकर मत बोलो . ” 

 

” मै क्यों जलन खाऊँ ? मेरी फ्रेंड को तो मिल ही जायेगी . ”

 

” अगर फ्रैंक ने शादी करी तो ! ” 

” चलो देख लेंगे ! ”

 

कहकर जस्टिन ने उसे बाय बाय कहा और वहाँ से चला आया. 

 

घर आकर जस्टिन ने एंजेला और बैटी को सब सुनाया. एंजेला हैरान रह गयी. फ्रैंक ने एक बार नहीं कई बार अपनी पत्नी और बच्चों का जिक्र लोगों से किया था. घर का माली और कामवाली भी यही जानते थे.

 

” और कोई पहचानवाला है क्या तुम्हारी नज़रों में जो फ्रैंक को जानता हो ? ”

 

” नहीं. मगर एक अजीब किस्सा हुआ था. शायद उसका कोई रिश्ता हो इस आदमी से.” अब बहुत सोंचकर   एंजेला ने उस पगली का किस्सा सुना दिया .

 

” चलो उसे ढूंढते हैं . ”

  

जस्टिन बैटी और एंजेला के साथ डाउन विल फार्म के आस पास चक्कर काटने लगा . मगर  ऐसे ही क्या  कोई  मिल जाता है  ? गाँव में उसे कोई नहीं जानता था . कुछ ने उसे भूत कहकर हँसी में उड़ा दिया ,  कुछ उसे सचमुच भूत  ही मानते थे हालाँकि  उसे  देखा था . मगर अगर औरों ने उसे देखा था तो वह थी . जस्टिन अड़ा रहा. एंजेला से उसने पूछा कि किस टाइम उसे देखा था.

 

” शाम को सूरज डूबने के समय समझ लो ”. 

 

” ठीक है हम लोग उसी समय के हिसाब से वहाँ जायेंगे . ”

कई दिन चक्कर मारने पर भी वह स्त्री नहीं मिली . अब जस्टिन ने अनुमान लगाया कि शाम के समय पैदल चलने वाले लोगों  ने शायद उसे देखा हो कभी . गाँव का स्कूल काफी दूर पड़ता था . आस पास की बस्तियों से आने वाले बच्चों को काफी पैदल चलकर उसमे आना पड़ता होगा . हो सकता है उन्होंने ऐसी कोई स्त्री देखी हो . यह अनुमान काम कर गया . घर की छुट्टी के समय घर वापस जाते समय अक्सर वह बच्चों को दिख जाती थी  अपने आप बड़ बड़ करती रहती थी और छेड़ने पर डर जाती  थी . डर कर या भागने लगती थी या पेड़ों के पीछे छुप जाती थी . बच्चों को इसमें बहुत  मज़ा  आता था . पूछने पर उन्होंने बता दिया कि   किस तरफ वह भाग कर छुपती थी .

जस्टिन ने गाड़ी उधर ही मोड़ ली . काफी दूर तक दस मील की रफ़्तार से वह रेंगता रहा और एंजेला और बैटी दायें बाएं चील की  नज़रों से सड़क के दोनों ओर ताकती रहीं . दिशा निर्देश के  अनुसार  उन्हें एक कच्ची बजरी की सड़क दीख पड़ी . एक पुराने धुराने साइन बोर्ड पर लिखा था ‘ माउंट विल ‘ .वह उसी के दिशाबाण  की ओर मुड़ गए . संकरी सड़क पर दोनों ओर खर पतवार सिर के ऊपर तक उगे हुए थे जिससे छन कर बचे खुचे दिन की रोशनी कहीं कहीं छपके बना रही थी . ऊपर घने वृक्षों के लाल  पीले पत्तों का चंदोवा तना था . वातावरण में नवम्बर की सीलन और गीली पत्तियों के जलने की कडवी सी महक थी . आधा पौना मील अन्दर जाकर एक गौशाला दिखाई दी . उसके और आगे जाकर  मुर्गीखाना , सूअर का  बाड़ा  और एक खाली अस्तबल था . इनको पार करके  पक्का रास्ता और उसके छोर पर एक छोटा सा घर नज़र आया . इस घर में बत्ती जलती  देखकर जस्टिन ने कार पार्क की  . अकेला उतर कर दरवाज़े की घंटी बजाई . किसी ने गँदले से जाली के पर्दे में से झाँका और झट से बत्ती बुझा दी . पाँच दस बार घंटी बजाने पर भी उसने दरवाज़ा नहीं खोला .

 

अब उसने एंजेला को भेजा . शायद औरत को देखकर कोई दरवाज़ा खोल दे . इसके अलावा एंजेला ही पहचान सकती थी उसे  जिसे वह खोजने आये थे .

 

एंजेला ने दरवाज़ा थपथपाया फिर कान लगा कर सुना . अन्दर कोई मंद मंद बोल रहा था. मगर उसने दरवाज़ा नहीं खोला . एंजेला ने पिछवाड़े जाकर खिड़की में से झांका ,. कमरे में कोई मूरत कुर्सी में बैठी झूला झूल रही थी . एंजेला ने उसे आवाज़ दी . 

 

” ए. दरवाज़ा खोलो . हम लोग तुम्हारे मित्र हैं . हम तुमसे कुछ पूछना चाहते हैं . ”

पर उसे उत्तर नहीं मिला . तीनो जने काफी हैरान हुए . सोचा वापस जाना ही पड़ेगा . जस्टिन यह भी नहीं देख पा रहा था कि  अन्दर स्त्री थी या पुरुष . हारकर वह वापस जाने के लिए मुड़े ही थे कि पीछे से एक पुरुष स्वर ने कहा ,

 

” उसे अकेला छोड़ दो . लीव हर अलोन . ”

 

” देखो हमें एक पगली औरत की तलाश है . और किसी ने बताया कि वह यहाँ रहती है.” 

 

” पगली है तो तुम्हें क्यों उससे मिलना है ? तुम क्या पुलिस हो ?? ”

 

” नहीं . पर उसने खुद ही हमें सड़क पर रोका था . शायद वह कुछ कहना चाहती थी.” 

  

अब वह जरा पिघला और बोला , ”मेरे पीछे आओ .”

 

वह उन्हें अगले दरवाज़े से अन्दर ले गया .सामने वाले कमरे में बैठाया और केतली गरम करने के लिए चूल्हे पर रखी. ” मेरा नाम जौन  है . मै इस फार्म का मालिक हूँ. तुम्हें ठीकसे पता है कि यह वही है जो तुमसे कुछ कहना चाहती थी ?”  

 

” नहीं मै निश्चित नहीं कर पा रही . अभी तक अनुमान ही लगा रहे हैं हम लोगों के बताने पर . क्या मै अन्दर जाकर उसे मिल सकती हूँ ? ” एंजेला ने मिन्नत की . 

जौन बोला , ” केवल तुम मेरे साथ आओ क्योंकि वह अनजान मर्दों को देखकर पत्थर हो जाती है , डरती है सबसे . ” 

 

एंजेला जौन के साथ अन्दर गयी . कुर्सी में बैठी स्त्री वही पगली थी . एंजेला को देखकर वह गुस्से में बड़ बड़ करने लगी . जौन ने प्यार से उसके कन्धों को पकड़कर धीमे स्वर में समझाया ,” डरो मत . यह लोग मेरे मित्र हैं . तुमसे मिलने आये हैं . शान्ति से  बैठ जाओ . मै हूँ न यहाँ . ”

 

वह स्त्री बैठ गयी पर किसी से नज़र नही मिलाई .केवल खिड़की से बाहर ताकती रही . बात करने की  उसकी इच्छा न देखकर जौन वापस सामने के कमरे में आ गया . 

 

”तुम लोग क्यों इससे मिलने  आये हो मुझे समझा कर बताओ . ”

 

” एक दिन जब मै अपने मित्रों से मिल कर आ रही थी तो इसने मेरा रास्ता रोका . दुबारा फिर इसने मुझे वहाँ जाने से रोका . मेरे  मित्र का इससे क्या लेना देना है यह मेरे लिए जानना जरूरी हो गया है .  यह तुम्हारी कौन है ?”

 

जौन ने बताया , ” यह मेरी कोई नहीं है ,मगर मै इसे यहाँ ले आया . शायद इसका नाम सेरा है क्योंकि यह इस नाम से परिचित लगती है . मै कभी इसे बचपन में जानता था . मगर अब इसके साथ क्या हुआ और यह क्यों अपना संतुलन खो बैठी मुझे पक्की  तौर पर नहीं पता . अब तो कई सालों से मेरे फार्म पर है . यही इसका घर है . सफाई कर देती है . जानवरों के साथ इसका प्रेम अच्छा है यह उनकी देखभाल कर देती है . अपना काम भी अब कर लेती है मगर किसी बात का उत्तर नहीं देती . अजनबी लोगों से डर जाती है . कभी कभी लम्बी सैर पर निकल जाती है मगर अपने आप रास्ता ढूंढ कर वापस आ जाती है . मेरी पत्नी को  गठिया की बीमारी है . ऐसे में दो हाथ बहुत सहायक होते हैं .

 

” तुम इसे कहाँ से और क्यों लाये ?  ” जस्टिन ने पूछा .

 

” कई साल पहले मै एक नर्सिंग होम में अपने फार्म के अंडे सप्लाई करता था .वहाँ एक दिन मैंने इसे देखा . यह इसी गाँव में  स्कूल में मेरे साथ पढ़ती थी . शकल से मैंने इसे पहचान लिया . जब आवाज दी तो यह डर कर भाग गयी . मैंने सोचा यह यहाँ काम करती होगी मगर पूछने पर नर्सों ने बतलाया कि यह एक हादसे में अपनी यादाश्त खो बैठी है . यह एक पेशेंट की तरह वहाँ रह रही थी .  उलटे उन्होंने मुझे घेर लिया और सैकड़ों सवाल पूछ डाले . मै जितना जानता था बता दिया , अस्पताल वालों ने  पुलिस की सहायता से पता लगवाया मगर कोई इसे पचानाने नहीं आया।   . इसका फोटो भी लोकल अखबार में छापा गया . सब बेकार . मुझे हल्का हल्का याद था कि शायद यह डाउन विल फार्म पर रहती थी . पूछने पर पता चला कि उसका मालिक कई साल पहले गुजर गया था और फार्म किसी और ने खरीद लिया था जो ज्यादातर बाहर ही रहता है . यह भी पता चला कि नया  मालिक सिंगल व्यक्ति है . उसे फार्मिंग में कोई रूचि नहीं .

धीरे धीरे यह मुझसे परच गयी . मुझे देखकर हंसती . वहीं ठहर जाती . अंडे सँभाल कर रख देती . नर्सों के कहने पर मै इसे यहाँ ले आया . कोशिश के तौर पर कि शायद बोल पड़े या सामान्य हो जाए . ” 

 

”जौन क्या तुमने पता किया था कि इसके साथ क्या हुआ था ? ” जस्टिन ने  पूछा .

 

” हाँ . नर्सों ने बतलाया था कि होम में आने से पहले यह कई महीनो तक अस्पताल में पड़ी रही थी . इसे किसी ने बुरी तरह मार  पीट कर यहाँ से बहुत दूर एक गढ़े में फेंक दिया था . शायद मरी हुई समझ कर . मगर किसी राहगीर ने इसका कराहना सुन लिया और एम्बुलेंस मँगवा दी . जख्मो पर सूखा हुआ खून बता रहा था कि यह शायद तीन चार दिन से पड़ी थी . ठीक होने पर पुलिस ने इसकी शिनाख्त करने की कोशिश की मगर कोई सामने नहीं आया . इसलिए इसे गूंगी अपांग व् मानसिक रूप से  विक्षिप्त समझ कर उस नर्सिंग होम में रख दिया . मै न लाता तो यह वहीँ पड़ी होती  बेकार . अब कम से कम इसकी कोई जिन्दगी तो है . ” जौन अपनी सफाई सी देता हुआ बोला .

 

” क्या हम इससे कुछ पूछ सकते हैं ? ” 

 

” कोशिश करने में क्या हर्ज है . बस यह बिफर ना जाए यह ध्यान रखना . इसकी सेहत की जिम्मेदारी मेरी है . बराबर चेक होते  रहते हैं . ”

 

एंजेला के मन में भारी उथल पुथल चल रही थी . अभी तलक उसने किसी को नहीं बताया था कि फ्रैंक मर चुका है . उसके मरने  का उसे कोई गम नहीं था और न ही अपराध भाव. मगर अगर वह अपनी निर्दोषिता साबित ना कर सकी तो तथ्यों के आधार पर उसे हत्यारी मान लिया जाएगा . आज या कल फ्रैंक की लाश मिल भी सकती है . ठन्डे मन से उसे निश्चय लेना पडेगा . सच बोलने में ही भलाई है . उसे अच्छी तरह याद है कि फ्रैंक ने अपनी बीवी का नाम सेरा बताया था . हिना ने भी इसकी पुष्टि करी  थी जब उसने जस्टिन से बातें करी थीं . हैना के कहे के अनुसार सेरा मर चुकी थी . मगर क्या सबूत कि यह सच ही हो. फ्रैंक ने ही तो हैना को बताया था . मगर इस औरत की कहानी  हूबहू  एंजेला से मिलती है . पूछना ही होगा .

  

जौन सेरा के कंधे पर बाँह रखकर   प्यार से  ड्राइंग रूम में ले आया . वह जौन से चिपक कर बैठ गयी . जस्टिन ने सीधा प्रश्न किया” , सेरा क्या तुम फ्रैंक कार्टर को जानती हो. ?” 

 

यह सुनते ही सेरा थर थर कांपने लगी और डर से जौन के पीछे दुबक गयी . 

 

” अरे ! क्या यह नाम डाउन विल के नए मालिक का नहीं अगर मेरी यादाश्त धोखा नहीं दे रही तो ? ”

 

” हाँ ! और उसने डाउन विल के पुराने मालिक की लड़की से शादी कर ली थी . ” जस्टिन ने बताया  .

 

” माई  गौड ! क्या इसीलिये यह अक्सर उधर जाती है ? ”

 

” हाँ शायद ! ” 

 

अब एंजेला बोल पड़ी , ” सेरा तुम डरो मत ! अब फ्रैंक कभी तुम्हे नहीं पा सकता क्योंकि वह मर चुका है !! ”

 

” क्या ! ”  जस्टिन और बैटी के मुंह से एक साथ निकला . वे लगभग चीख पड़े . 

 

” हाँ वह इस लेदर के सोफे की तरह निर्जीव है . उस कुँए में से बाहर नहीं निकल सकता जहाँ वह डूब मरा !! ”

 

” क्या बक रही हो एंजेला ? तुम होश में तो हो ना ?” 

 

” हाँ मै पूरी होश में हूँ और इस कहानी की बिखरी कड़ियों को जोड़ सकती हूँ . अगर यह वाकई सेरा है तो याद करो फ्रैंक ने यही नाम बताया था अपनी पत्नी का . ”  

 

” एंजेला क्या तुमने उसे कुँए में धक्का दिया ?” 

 

जौन हक्का बक्का तक रहा था . एक सीधा सादा इंसान अनजाने में किसी अनहोनी से जुड़ गया था. एंजेला अपनी जगह से उठी और सेरा के पास गयी . उसका काँपता हाथ अपने हाथ में लेकर सहलाया और उसके सामने घुटने टेक कर बैठ गयी . 

 

” सेरा मेरी तरफ देखो . मै भी तुम्हारी तरह फ्रैंक के जाल में फंस गयी थी मगर भगवान् ने मेरी रक्षा करी .वह मुझे मार डालता इसके पहले वह खुद कुँए में गिर गया . अब उसे मरे भी  तीन हफ्ते से ऊपर हो चुके हैं . सिवा मेरे और कोई यह बात नहीं जानता कि वह कितना बड़ा दरिंदा था . अब उसको मारने का इल्जाम सीधा मुझपर लगाया जाएगा . तुम्हारी और मेरी एक जैसी कहानी है . केवल तुम मेरी  गवाही दे सकती हो . प्लीज़ मेरी मदद करो . डरो मत . ”

 

सेरा के होठ हिले . अस्फुट शब्दों में उसने एंजेला को कुछ कहा . उसकी आँखों में जो एक विक्षिप्त दूरी  का भाव था वह जाता रहा . वह गौर से एंजेला के चेहरे को देखने लगी . अपने आस पास नज़र दौडाई जैसे  स्वप्न से जाग रही हो . एंजेला ने फिर से उसे आश्वस्त किया , ”मै कसम खाती हूँ कि वह सच में मर चुका है . ” 

 

बहुत धीरे धीरे , बेहद अटक अटक कर सेरा संवाद स्थापित कर पाई . वर्षों बाद उसका दिमाग ठिकाने काम  कर रहा था . उसने सबको घूरा . जब जौन को देखा तो उसके वक्ष पर सिर रखकर बच्चों की तरह  रोने लगी . बैटी ने उठकर चाय बनाई .जस्टिन ने संक्षेप में जौन को एंजेला की आपबीती सुनाई . थोड़ा स्वस्थ होनेपर सेरा ने बताया .

 

” पिता के कैंसर से मरने के बाद मै बिलकुल अकेली हो गयी थी . कुछ मित्र लन्दन में रहते थे . उनके  सहारे मैंने एक हाई क्लास ड्रेसों की बुटीक खोल ली . मेरा  बिजनस  चल निकला . फ्रैंक फोटोग्राफर था . मै उसे एक ग्राहक के रूप में   जानने लगी . मैंने उससे एक  कैटेलौग बनवाने की बात की . फ्रैंक ने मुझे घेर लिया .  उसने मेरी बहुत सहायता की . वह देखने में सुन्दर और हमेशा फैशन से रहता था . बहुत  गंभीर स्वर में बोलता था ऐसे कि तुम उस पर जल्दी से विश्वास कर लो . मैंने उससे शादी कर ली . मन बदलने के लिए हमने देश विदेश की सैर की . फ्रैंक ने सुझाया क्यों न हम फार्म को एक स्पोर्ट्स सेंटर बना दें जहां सब लन्दन से दूर आकर अपना समय बिताएंगे . सो हम यहाँ रहने आ गए . कुछ  महीने ही बीते होंगे कि मुझे उसकी नीयत में खोट नज़र आने लगा . कानूनी गड़बड़ के अलावा उसने मुझे धमकाना भी शुरू कर दिया . पहले शब्दों से फिर हाथों से उसने मुझे घायल करना शुरू कर दिया . उसकी हिंसा बढ़ने लगी . आखिर मैंने एक दिन अपना फैसला सुना दिया कि मुझे तलाक़ चाहिए . वह  जहां जाना चाहे जाए . उसका अपना कोई घर नहीं था . बस यहीं मेरी गलती हो गयी .

 

उस रात उसने मुझे बिस्तर में ले जाकर पहले बहुत प्यार किया फिर ताबड़तोड़ मारने लगा . मै नशे में थी . उसने मुझे गहरा नशा पिला दिया होगा क्योंकि मै हल्की वाइन ही पीती थी . मारते मारते उसने  तकिये से मेरा मुँह दबा दिया . मुझे मरी हुई जानकार उसने दूर कहीं ले जाकर फेंक दिया . मगर मै मरी नहीं थी .  अब यहाँ हूँ . तुम कहती हो कि फ्रैंक मर गया है विश्वास नहीं आता . ”

 

” देखो मेरी चोटों के निशान ,” कहकर एंजेला ने अपनी टाँगों के कोड़े के निशान दिखाए.

 

” फ्रैंक की  लाश कुँए में पड़ी है . यह सिर्फ मुझे पता है . ”

 

जौन ने माफ़ी माँगते हुए कहा कि उसका नाम इस गंदे हादसे से ना जोड़ा जाए . सेरा बीमार ही भली थी . उसको और मानसिक संताप से बचाना होगा क्योंकि वह बेहद कमजोर बदन की है . जरूरत पड़ने पर  वह उसे कोर्ट ले आयेगा . तब तक चुप रहना पसंद करेगा.

 

फादर पियर्सन ने पुलिस को भेजकर एंजेला से पूछताछ करी . एंजेला को विश्वास था कि वह छूट  जायेगी . मगर उसकी एक भी बात नहीं मानी गयी. पियर्सन का कहना था कि एंजेला एक लफंगी लालची स्त्री थी . वह फ्रैंक से शादी करना चाहती थी . उसके मना करने पर इसने उसे शराब में ज़हर दिया. जब उसे ज़हर का असर महसूस हुआ तो उसने हाथापाई की . पर वह मर गया और एंजेला ने  उसकी लाश घसीटकर कहीं लेजाकर फेंक दी . एंजेला ने दलील दी कि फ्रैंक चाबुक से उसे मार रहा था तभी चाबुक का सिरा उसने पकड़ लिया और पूरी ताकत से खींचा मगर उसके हाथ से चाबुक छूटा नहीं बल्कि वह खुद खिंचा चला आया और उनका पासा पलट गया . वह कुँए की तरफ था और एंजेला उसके  सामने . वह उसे खींचकर कुँए में फेंकना चाहता था पर  एंजेला ने चाबुक एकदम से छोड़ दी और पूरे दम से एक लात उसके पेट में मारी . वह अपना संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर गिरा .सीधा कुँए में .

 

” यह नामुमकिन है . फ्रैंक बहुत मजबूत आदमी था . यह कहानी मनगढ़ंत है . ” पियर्सन ने कहा . 

 

इन्स्पेक्टर एंडी ने कहा ” ठीक है . हाथ कंगन को आरसी क्या . अगर फ्रैंक कुँए में है तो लाश वहीँ से  मिलेगी . हम गोताखोरों को भेजते हैं . ” एंजेला को हथकड़ी लगाकर वहाँ ले जाया गया . इन्स्पेक्टर एंडी का कहना था कि इतना भयानक सीन देखने  के बजाय एंजेला घबराकर सच बोल देगी . जस्टिन और बैटी भी वहाँ एंजेला के साथ थे . 

  

ख़ास तरह की क्रेन  लाई गयी जिसकी सहायता से गोताखोर कुँए में उतारे गए . नीचे लाश मिली. उसे जिप वाले बैग में बंद करके ऊपर लाया गया.  सब सुन्न खड़े तमाशा देख रहे थे . गोताखोर अभी  नीचे ही बिज़ी थे कि  एक कर्मचारी ने ने बैग की जिप खोलदी. खोलते ही वह चिल्लाया, ” इन्स्पेक्टर एंडी ,  ये तो एक औरत है !”

 

”एँ ”! 

 

बैटी दौड़कर पास गयी और चीखी , ” ड़ोरीन ! ” 

 

” हैं ! क्या तुम इसे जानती थी ?”

 

” हाँ यह हमारे ही ऑफिस में काम करती थी . कुछ दिन पहले गायब हो गयी थी . ” 

 

कुँए के अन्दर से गोताखोर चिल्लाए , ” झूला नीचे भेजो . यहाँ मामला संगीन है ”.

 

एक एक करके आठ लड़कियों कि सड़ी गली लाशें वहाँ से बरामद हुईं . फ्रैंक की भी मिली. जैसा एंजेला ने कहा था उसके हाथ में अभी भी चाबुक पकड़ा हुआ था . उसके निचले पेट में गहरा छेंक था जिसका  गवाह एंजेला की  सैंडल क़ी टूटी हुई एडी थी .

लाशों की पहचान और लापता  लड़कियों से उनका मिलान आदि पुलिस का काम था . फ्रैंक एक सीरियल किलर था यह साबित हो चुका था . एंजेला को बिना किसी सवाल के छोड़ दिया गया . 

 

सेरा की कहानी भी पब्लिक को पता चली . मगर उससे पहले कितनी और मारी थीं यह जाना नहीं जा सका . फ्रैंक की अकूत संपत्ति उन लड़कियों के अपनों को दे दी गयी . जस्टिन ने इस रिपोर्ट से खूब  नाम और पैसा कमाया .

 

एंजेला ने फ़िलहाल नौकरी छोड़ दी और वह कुछ दिन के लिए अपने माँ बाप के पास रहने चली गयी .  जब उसकी भयानक यादें माँ के प्यार से धुंधलाने लगीं तो एक दिन माँ ने उसे एक नंबर दिया और कहा क़ी किसी का संदेसा आया था . अगर वह फोन करना चाहे तो कर ले . एक सुबह उसने वह अजनबी नंबर मिलाया . उधर से नाईजल बोल पड़ा . 

 

” एंजेला ,क्या तुम्हे मेरी याद है ?”

 

”  हाँ ! कैसे भूल सकती हूँ ?” कहते हुए उसकी आवाज अटक गयी और वह सुबकने लगी. नाईजल ने  जाने से पहले उसे बाई बाई भी नहीं किया था . उसकी भावनाएं उसी बिंदु पर ठहरी हुई थीं  इन दो  सालों से .

 

” आओगी मेरे पास? घूमने के लिए ही सही . ”  नाईजल की आवाज़ भी थरथरा रही थी. 

 

” क्या तुम अभी तक अकेले हो ?”

 

” तुम्हारे बिना तो मै हमेशा अकेला ही रहा .” 

 

” तो फिर मै आ रही हूँ .”

 

 

 

- कादंबरी मेहरा

प्रकाशित कृतियाँ: कुछ जग की …. (कहानी संग्रह ) स्टार पब्लिकेशन दिल्ली

                          पथ के फूल ( कहानी संग्रह ) सामयिक पब्लिकेशन दिल्ली

                          रंगों के उस पार (कहानी संग्रह ) मनसा प्रकाशन लखनऊ

सम्मान: भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान २००९ हिंदी संस्थान लखनऊ

             पद्मानंद साहित्य सम्मान २०१० कथा यूं के

             एक्सेल्नेट सम्मान कानपूर २००५

             अखिल भारत वैचारिक क्रांति मंच २०११ लखनऊ

             ” पथ के फूल ” म० सायाजी युनिवेर्सिटी वड़ोदरा गुजरात द्वारा एम् ० ए० हिंदी के पाठ्यक्रम में निर्धारित

संपर्क: यु के

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