एक नई आशा

मैं गृहनिर्माण से सम्बन्धित कुछ सामान खरीदने फतेहाबाद गया था | सामान खरीदने के बाद, दुकान पर लॉडिंग वाहन के आने का इंतजार करने लगा | समय करीब आधा घंटा बीत गया तो टहलते-टहलते बाहर सड़क किनारे एक पेड़ के नीचे आ कर खड़ा हो गया | तभी एक जादूगर अपने छ: – सात वर्षीय मासूम के साथ वहाँ आ गया और मुझसे बोला ‘ ए बाबू ! हम इस पेड़ के नीचे छाया में बैठकर खेल दिखा सकता हूँ क्या…?’
‘हाँ-हाँ… क्यों नहीं जरूर दिखाओ’… मैंने उसे यह सोचकर बोल दिया कि कुछ टाइम पास हो जायेगा |
उसने अपने जादूगरी के खिलौने शेर, डायनासोर, नेवला, सांप आदि थैले से निकाले और अपनी दुकान जमाने लगा | मैं उसका डमरु बजाने लगा पर मुझसे सही तरीके से बजा नहीं तो जादूगर का छोटा बच्चा हंसने लगा, उसकी हंसी देख मुझे भी हंसी आ गई | वैसे मैं देख रहा था वो शुरू से ही कुछ निराश सा था |
तभी डमरु की आवाज़ सुनकर दुकानदार बाहर आ गया और बेचारे जादूगर पर लाल-पीला हो गया | तमाम उल्टी-सीधी गालियाँ  बक गया पर बेचारा जादूगर हाथ जोड़े बिनती करता रहा – ‘साब जी! गरीब हूँ, दिवाली का त्यौहार नजदीक है | दो पैसे यहाँ पेड़ की छॉव में आ जायेंगे | बस आधे घंटे की बात है |’
‘अबे! यहाँ से अपने टाट-कमंडल उठा रहा है कि अभी मैं ही उठाके फैंकू… निकल यहाँ से सुबह-सुबह आ जाते हैं मूड खराब करने |’
‘ठीक है – ठीक है माईबाप जाता हूँ’…
बेचारे जादूगर ने कुहनी तक हाथ जोड़े और अपना सामान समेटने लगा | मैंने उसकी सामान समेटने में मदद की और उसे समझाया ईश्वर पर भरोसा रखो हो सकता है यहाँ खेल देखने दर्शक न आते और तुम्हारी मेहनत बेकार चली जाती, इसीलिए शायद इस दुकानदार ने तुम्हारा खेल शुरू होने से पहले ही खत्म करा दिया | अभी शाम दूर है | कोई और जगह तुम्हारा इंतज़ार कर रही है | इतना सुनते ही उसका मायूस – दुःखी चेहरा एक नई आशा के साथ चमक उठा और वो मुस्कराता हुआ चला गया… |

 

- मुकेश कुमार ऋषि वर्मा


शिक्षा – एम. ए., आई. जी. डी. बॉम्बे व पांच प्रमाण पत्रीय कोर्स
सम्मान – सैकडों
प्रकाशन – आजादी को खोना ना, संघर्ष पथ (काव्य पुस्तिकाएं) साथ ही देश-विदेश की सैकडों पत्र – पत्रिकाओं में, इंटरनेट पर, सोशल मीडिया में हजारों रचनाएं प्रकाशित
रूचियाँ – पत्रकारिता, अभिनय, पेंटिंग, लेखन आदि
सदस्य – कई सामाजिक, साहित्यिक, राजनैतिक, धार्मिक, कलात्मिक संस्थाओं में
अध्यक्ष – बृजलोक साहित्य-कला-संस्कृति अकादमी
संचालक – ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय
मुख्य आजीविका – कृषि-मजदूरी (मूलत् बेरोजगार)
पता – ग्राम रिहावली, डाक तारौली गुर्जर, तहसील फतेहाबाद, आगरा

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