एक ऐसी बंदगी दे

 

या खुदा, तू मुझे चंद लम्हे दे
और पर हर लम्हे में जिंदगी दे |

ख्वाइश नहीं मुझे जगमगाते चाँद सितारों की
बस एक चिराग रौशनी दे |

नाही ख्वाइश मुझे महलों और आसमां की
बस मुझे तू चंद गज जमीं दे |

समा लूँ सारे दर्द इस जंहाँ के
ऐसी समंदर सी बानगी दे |

बिन तेरे नहीं है कोई जंहाँ
इस जंहा में सबको अपनी बंदगी दे |

तुही राम और तुही रहीम यंहा
बस जिसने तुझे बांटा उनकी आँखों में नमी दे |

जब तुंही शामिल है कतरे कतरे में तो फिर क्यों बहता खून यंहा
तेरे नाम पे तुझी को क़त्ल कर रहे लोग यंहा |
या खुदा तू इनको शर्मिंदगी दे
इस जंहा में सबको अपनी बंदगी दे |

 

 - अमित कुमार

मैं झारखण्ड के लातेहार जिले से हूँ , मैंने बिरसा प्रोद्योगिकी संस्थान सिंदरी झारखण्ड से स्नातक और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर उपाधि ली है, और अभी मै भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान खड़गपुर से रासायनिक अभियांत्रिकी में शोध कर रहा हूँ |

6 thoughts on “एक ऐसी बंदगी दे

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