इत्यादियों की शिनाख़्त

शामिल न होने वालों में शामिल है इत्यादियों की भीड़
आख़िर,ये इत्यादि क्यों बिखरे पड़े हैं इधर-उधर
और इतने तमाम ज़गहों पर,
क्या बनेगी इनकी कभी फ़ेहरिस्त भी
की जाएगी क़वायद–इनकी मर्दुमशुमारी की,
बनाया जाएगा इनके लिए भी कोई सरकारी मोहकमा
जहाँ रखे जाएंगे इनके रिकार्ड
तारीख़वार-तरतीबवार

भला, कौन होते हैं ये इत्यादिगण
क्या स्मृतिकारों ने किया है इनका वर्णन
या बाद में लिखा गया है इनका इतिहास भी;
पर, बेशक, चित्रगुप्त के बही-खातों में ज़रूर होगा इनका ज़िक्र
उल्लिखित होगा इनका वर्ण-वर्ग-संप्रदाय
और, और इनकी जाति भी–
हाँ, ऐसा ही कयास है अपना;
और यदि यही सच है
तो आइए, करें इनकी छानबीन पौराणिक गाथाओं में
इन पर भी करें शोध-संधान
लिखें मोटी-मोटी पोथियाँ

उफ़्फ़, कहीं ये उपेक्षित न हों :
लूले-लंगड़ोंऔर अपाहिजों की तरह
और ढंक रहे हों अपनी देह–फटे-पुराने चिथड़ों से
गली-कूचों में आवारा फ़िरते हुए
धूल और धूप फ़ाँकते हुए भर रहे हों अपना पेट
कभी-कभार

आख़िर, क्या है इनकी पहचान और अस्मिता
और इनकी लिंग-निर्धारण व्यवस्था भी;
ये जीव हैं या निर्जीव या उभयलिंगी
कहीं किन्नरों के मित्र तो नहीं;
क्यों ना ढूंढा जाए उन्हें शरणार्थी शिविरों या आश्रमों में
पर, यह तो तय है कि ये परग्रही नहीं हैं
आतंकवादी-उग्रवादी भी नहीं
क्योंकि ये चुपचाप शामिल हो जाते हैं
संकुचाते-लजाते हुए–
उन सभी के पीछे जो न तो वाचाल हैं
न उपद्रवी-हड़ताली ही;
पर, हम सशंकित हैं इनकी सर्वव्याप्तता से
सो, हमें चेत जाना चाहिए इनकी उपस्थिति से
कहीं ये एकजुट होकर कुछ अनाप-शनाप न कर डालें
हमारी संस्कृति, संसृति और इस सृजन
के ख़िलाफ़।

 

 

- डॉमनोज मोक्षेंद्र

लेखकीय नाम: डॉ. मनोज मोक्षेंद्र  {वर्ष २०१४ (अक्तूबर) से इस नाम से लिख रहा हूँ। इसके   पूर्व ‘डॉ. मनोज श्रीवास्तव’ के नाम से लिखता रहा हूँ।}

वास्तविक नाम (जो अभिलेखों में है) : डॉ. मनोज श्रीवास्तव

जन्म-स्थान: वाराणसी, (उ.प्र.)

शिक्षा: जौनपुर, बलिया और वाराणसी से (कतिपय अपरिहार्य कारणों से प्रारम्भिक शिक्षा से वंचित रहे) १) मिडिल हाई स्कूल–जौनपुर से २) हाई स्कूल, इंटर मीडिएट और स्नातक बलिया से ३) स्नातकोत्तर और पीएच.डी. (अंग्रेज़ी साहित्य में) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से; अनुवाद में डिप्लोमा केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो से

पीएच.डी. का विषय: यूजीन ओ’ नील्स प्लेज: अ स्टडी इन दि ओरिएंटल स्ट्रेन

लिखी गईं पुस्तकें: 1-पगडंडियां (काव्य संग्रह), वर्ष 2000, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, न.दि., (हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा चुनी गई श्रेष्ठ पाण्डुलिपि); 2-अक्ल का फलसफा (व्यंग्य संग्रह), वर्ष 2004, साहित्य प्रकाशन, दिल्ली; 3-अपूर्णा, श्री सुरेंद्र अरोड़ा के संपादन में कहानी का संकलन, 2005; 4- युगकथा, श्री कालीचरण प्रेमी द्वारा संपादित संग्रह में कहानी का संकलन, 2006; चाहता हूँ पागल भीड़ (काव्य संग्रह), विद्याश्री पब्लिकेशंस, वाराणसी, वर्ष 2010, न.दि., (हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा चुनी गई श्रेष्ठ पाण्डुलिपि); 4-धर्मचक्र राजचक्र, (कहानी संग्रह), वर्ष 2008, नमन प्रकाशन, न.दि. ; 5-पगली का इन्कलाब (कहानी संग्रह), वर्ष 2009, पाण्डुलिपि प्रकाशन, न.दि.; 6.एकांत में भीड़ से मुठभेड़ (काव्य संग्रह–प्रतिलिपि कॉम), 2014; 7-प्रेमदंश, (कहानी संग्रह), वर्ष 2016, नमन प्रकाशन, न.दि. ; 8. अदमहा (नाटकों का संग्रह–ऑनलाइन गाथा, 2014); 9–मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में राजभाषा (राजभाषा हिंदी पर केंद्रित), शीघ्र प्रकाश्य; 10.-दूसरे अंग्रेज़ (उपन्यास), शीघ्र प्रकाश्य

संपादनमहेंद्रभटनागर की कविता: अन्तर्वस्तु और अभिव्यक्ति

–अंग्रेज़ी नाटक The Ripples of Ganga, ऑनलाइन गाथा, लखनऊ द्वारा प्रकाशित

–Poetry Along the Footpath अंग्रेज़ी कविता संग्रह शीघ्र प्रकाश्य

–इन्टरनेट पर ‘कविता कोश’ में कविताओं और ‘गद्य कोश’ में कहानियों का प्रकाशन

–महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्याल, वर्धा, गुजरात की वेबसाइट ‘हिंदी समय’ में रचनाओं का संकलन

सम्मान: ‘भगवतप्रसाद कथा सम्मान–2002′ (प्रथम स्थान); ‘रंग-अभियान रजत जयंती सम्मान–2012′; ब्लिट्ज़ द्वारा कई बार ‘बेस्ट पोएट आफ़ दि वीक’ घोषित; ‘गगन स्वर’ संस्था द्वारा ‘ऋतुराज सम्मान-2014′ राजभाषा संस्थान सम्मान; कर्नाटक हिंदी संस्था, बेलगाम-कर्णाटक  द्वारा ‘साहित्य-भूषण सम्मान’; भारतीय वांग्मय पीठ, कोलकाता द्वारा साहित्यशिरोमणि सारस्वत सम्मान (मानद उपाधि)

“नूतन प्रतिबिंब”, राज्य सभा (भारतीय संसद) की पत्रिका के पूर्व संपादक

लोकप्रिय पत्रिका वी-विटनेस” (वाराणसी) के विशेष परामर्शक, समूह संपादक और दिग्दर्शक

‘मृगमरीचिका’ नामक लघुकथा पर केंद्रित पत्रिका के सहायक संपादक

हिंदी चेतना, वागर्थ, वर्तमान साहित्य, समकालीन भारतीय साहित्य, भाषा, व्यंग्य यात्रा, उत्तर प्रदेश, आजकल, साहित्य अमृत, हिमप्रस्थ, लमही, विपाशा, गगनांचल, शोध दिशा, दि इंडियन लिटरेचर, अभिव्यंजना, मुहिम, कथा संसार, कुरुक्षेत्र, नंदन, बाल हंस, समाज कल्याण, दि इंडियन होराइजन्स, साप्ताहिक पॉयनियर, सहित्य समीक्षा, सरिता, मुक्ता, रचना संवाद, डेमिक्रेटिक वर्ल्ड, वी-विटनेस, जाह्नवी, जागृति, रंग अभियान, सहकार संचय, मृग मरीचिका, प्राइमरी शिक्षक, साहित्य जनमंच, अनुभूति-अभिव्यक्ति, अपनी माटी, सृजनगाथा, शब्द व्यंजना, अम्स्टेल-गंगा, शब्दव्यंजना, अनहदकृति, ब्लिट्ज़, राष्ट्रीय सहारा, आज, जनसत्ता, अमर उजाला, हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, कुबेर टाइम्स आदि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं, वेब-पत्रिकाओं आदि में प्रचुरता से  प्रकाशित

आवासीय पता: विद्या विहार, नई पंचवटी, जी.टी. रोड, (पवन सिनेमा के सामने), जिला: गाज़ियाबाद, उ०प्र०, भारत.

सम्प्रति: भारतीय संसद में प्रथम श्रेणी के अधिकारी के पद पर कार्यरत

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