अवधी कविता – अबकी चुनाव हम लड़ि जाबै

तोहरै सपोर्ट चाही ददुआ,
अबकी चुनाव हम लड़ि जाबै।

कीन्हेंन बहुतेरे कै प्रचार,
जय बोलेन सबकी धुआँधार,
दुइ पूड़ी के अहसान तले,
सगरौ दिन कीन्हेंन हम बेगार;
जब तलक नाँहि परि गवा वोट,
नेकुना से घिसि डारिन दुआर,
अब जीति गए तो ई ससुरै,
चीन्हत नाँहीं चेहरा हमार ।

अबकी इनहिन सबके खिलाफ
हम टिकस की खातिर अड़ि जाबै।
तोहरै सपोर्ट चाही———

छपुवाउब बड़े-बड़े पर्चा,
करबै पुरहर खर्चा-बर्चा,
ददुआ, तनिकौ कमजोर परब,
तौ माँगब तुमहूँ से कर्जा;
चहुँ दिसि होई हमरी चर्चा,
पउबै हम नेता कै दर्जा,
लोगै हमका द्याखै खातिर,
करिहैं दस कारे का हर्जा।

अबकी दिल्ली दरबार म हम,
अपनिउ यक चौकी धरि द्याबै।
तोहरै सपोर्ट चाही———

मूँठा राखब आपन निसान,
पटकब बिपक्ष का पकरि कान,
करवाय लियब कप्चरिंग बूथ,
बंटवाय दियब सतुवा-पिसान;
अबहीं तक छोलेन घाँस बहुत,
अब राजनीति म भै रुझान,
तौ जीति के ददुआ दम लेबै,
मन ही मन मा हम लिहन ठान।

धोबी कै वोट मिलै खातिर,
गदहौ के पाँयन परि जाबै।
तोहरै सपोर्ट चाही——-

जब पहिर के निकरब संसद मा,
हम उज्जर कुर्ता खादी कै,
कोने म धरा रहि जाए ददुआ
सगरौ नकसा गाँधी कै;
अबकिन चुनाव मा नापि लियब,
जलवा इन सबकी आँधी कै,
यक दिन मा लइ लेबै हिसाब,
हम भारत की बरबादी कै।

मूड़े पै टोपी बदलि-बदलि
हम राजनीति मा जमि जाबै ।
तोहरै सपोर्ट चाही—–

है याक अर्ज तुम सब जन से,
अबकी बिजयी करिहौ मूँठा,
जैसन जीतब ददुआ तुमका,
दिलवौबै सक्कर कै कोटा;
भगवान भगौती सब जन का
चढ़वौबै पूड़ी का जोटा,
तुम सबका सेंक्सन करवौबे,
जहता कै थरिया औ लोटा।

विश्वास करौ हम संसद मा
यक टका दलाली न ल्याबै।
तुम्हरै सपोर्ट ——–
ओमप्रकाश तिवारी

संक्षिप्त परिचयः

अयोध्या के एक गांव बसावां में जन्मे ओमप्रकाश तिवारी भारत के सर्वाधिक पढ़े जानेवाले समाचार पत्र दैनिक जागरण के मुंबई ब्यूरो प्रमुख हैं। नवगीत, कुंडलिया छंद एवं हिंदी ग़ज़लों के अलावा अवधी व्यंग्य काव्य में भी हाथ आजमाते रहते हैं।

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