अभिमन्यु अनत को साहित्य अकादेमी द्वारा मानद महत्तर सदस्यता का सर्वोच्च सम्मान


मॉरीशस के विख्यात कथा-साहित्य सम्राट श्री अभिमन्यु अनत को भारतीय साहित्य में योगदान के लिए साहित्य अकादेमी द्वारा मानद महत्तर सदस्यता (Honorary Fellowship) प्रदान की गई है ।

 

एक राष्‍ट्रीय साहित्यिक संस्‍था के रूप में साहित्य अकादेमी की स्थापना भारत सरकार द्वारा 1952 में की गई थी। यह भारतीय साहित्य के सक्रिय विकास के लिए कार्य करनेवाली एक राष्ट्रीय संस्था है, जिसका उद्देश्य उच्च साहित्यिक मानदंड स्थापित करना, भारतीय भाषाओं में साहित्यिक गतिविधियों को समन्वित करना एवं उनका पोषण करना तथा उनके माध्‍यम से देश की सांस्कृतिक एकता का उन्नयन करना है।

अकादेमी द्वारा भारतीय साहित्यकारों को प्रदान किया जाने वाला ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ भारत में दिये जाने वाले सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में  से है। इसके अतिरिक्त साहित्य अकादेमी किसी लेखक का सर्वोच्च सम्मान उसे अपना महत्तर सदस्य चुनकर करती है । यह सम्मान विशिष्ट साहित्यकारों के लिए सुरक्षित है और एक समय में 21 महत्तर सदस्य हो सकते हैं। अकादेमी के संविधान में श्रेष्ठ विदेशी लेखकों में से अकादेमी के मानद महत्तर सदस्यों के निर्वाचन के प्रावधान के तहत अकादेमी ने 23 अगस्त 2013 को चेन्नै, भारत में अपने परिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया। अकादेमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव द्वारा प्रेषित पत्र में कहा गया है कि श्री अभिमन्यु अनत को सम्मानित करते हुए साहित्य अकादेमी स्वयं सम्मानित हो रही है।

यह सम्मान भारतीय हिंदी साहित्य को अपने योगदान के लिए दिया गया है और इसके माध्य्म से भारत से बाहर हिंदी साहित्य के उस महासागर को गौरवांवित किया गया है जिसके सर्वाधिक प्रकाशमान मोती निस्सन्देह अभिमन्यु अनत ही हैं। प्रवासी अथवा विदेशी हिंदी साहित्य नाम से सम्बोधित परंतु वास्तव में विश्व हिंदी साहित्य के इस रचनासंसार के लिए अभिमन्यु जी की लेखनी ने अत्यंत गौरवशाली प्रतिमान स्थापित किये हैं। उन्होंने हिंदी शिक्षण, रंगमंच, हिंदी प्रकाशन आदि अनेक क्षेत्रों में कार्य किए हैं और लाल पसीना, लहरों की बेटी, एक बीघा प्यार, गांधीजी बोले थे आदि उपन्यासों, कैक्टस के दाँत, गुलमोहर खौल उठा आदि कविता संग्रहों तथा अपने सम्पादकीय व अन्य लेखों के माध्यम से  गत 50 वर्षों से हिंदी साहित्य को एक वैश्विक पहचान देने के लिए प्रयासरत रहे हैं।

 

अभिमन्यु अनत को अपनी साहित्य सेवा के लिए इससे पूर्व भारत, मॉरीशस और विश्व स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, यशपाल पुरस्कार, जनसंस्कृति सम्मान तथा उ.प्र. हिंदी संस्थान पुरस्कार, अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. होनोरिस कौज़ा  के अतिरिक्त मॉरीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय ने मार्च 2013 में मॉरीशसीय हिंदी साहित्य शताब्दी समारोह के अंतर्गत अभिमन्यु जी को विशेष सम्मान प्रदान किया था। आज अभिमन्यु जी का साहित्य अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम की शोभा बढ़ा रहा है तथा उनपर अनेक शोधकार्य किये जा चुके हैं। उनकी रचनाओं का अनुवाद अंग्रेज़ी, फ्रेंच सहित अनेक भाषाओं में किया गया है।

साहित्य अकादेमी की मानद महत्तर सदस्यता अभिमन्यु अनत जी के लेखन को प्राप्त सर्वोच्च मान्यता के रूप में देखा जा सकता है। अकादेमी ने यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान करते हुए अभिमन्यु अनत जी को सुमित्रानंदन पंत, जैनेंद्र कुमार, महादेवी वर्मा, बाबा नागार्जुन, कृष्णा सोबती, भीष्म साहनी, रामविलास शर्मा, विष्णु प्रभाकर और निर्मल वर्मा आदि मूर्धन्य हिंदी साहित्यकारों तथा भरतीय भाषाओं के अनेक कालजयी रचनाकारों की श्रेणी में स्थान प्रदान किया है।

 

अभिमन्यु जी को औपचारिक रूप से मानद महत्तर सदस्यता प्रदान किए जाने का उपक्रम निकट भविष्य में किसी तिथी को विशेष समारोह आयोजित कर किया जाएगा। इसके अंतर्गत लेखक को ताम्रफलक युक्त मंजूषा प्रदान की जाएगी।

 

मॉरीशस व विश्व हिंदी समाज की ओर से श्री अभिमन्यु अनत को इस सम्मान के लिए कोटि-कोटि बधाई एवं शुभकामनाएँ।

 

विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस की रिपोर्ट  

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