पिता

उसे जन्म देते हुए सुधा चल बसी थी. शिशिर ने उस अबोध को ही इसका जिम्मेदार मानकर गोद में लेना तो दूर, कभी हाथ भी नहीं लगाया.

उसकी कोमल ऊँगलियाँ, रूई सा नाजुक शरीर, छोटी-छोटी मिचमिचाती आँखें भी कभी उसके मन में वात्सल्य न पनपा सकी.

दो-चार महीने तो दूर के रिश्तेदारों ने सँभाल लिया, मगर आज उसे उसके पास छोड़कर सब विदा हो गए.

चार महीने की नन्हीं जान मारे भूख के रो-रोकर हलकान हो रही थी. उसके रोने से वह तंग हो उठा. उसका मन किया कि एक थप्पड़ लगा कर उसे चुप करा दे.

मगर उसने बोतल में दूध भरकर उसके मुँह से लगाया. भूखी बच्ची चुसुर-चुसुर कर बोतल चूसने लगी. उसके बोतल पर लपकने और अजीब सी आवाज़ निकालते हुए दूध चूसने पर उसे हँसी आ गई.

तभी बच्ची ने नैपी गन्दी कर दी.

उसे फिर उस पर गुस्सा चढ़ आया.

विवशता में उसने उसे उठाया, कपड़े से पौंछा और नहलाने बाथरूम में ले गया.

पानी की पहली धार पड़ते ही बच्ची ने सहमकर उसकी ऊँगली पकड़ ली. उसकी नर्म छुअन से उसे सिहरन सी हुई.

टब में बैठाकर पानी डालते हुए कभी वह इधर लुढ़क जाती तो कभी उधर. उसे मज़ा आने लगा था.

छोटी बच्ची ने आँखें मिचकाकर उसकी ओर मुस्कान बिखेरी. आँखों को बचाकर साबुन मलते, नहलाते, नर्म तौलिये में दुबकाकर कमरे में लाते-लाते जाने कब उसे उसपर प्यार उमड़ आया.

अपनी गोद में दुबकाये उसने उसे सीने से लगाया. बच्ची ने मुस्कुराकर एक किलकारी सी भरी.

वह हुलसकर बोला- “कोई है?… देखो इसने मुझे ‘पा’ बोला…”

 

 

डॉ. कुमारसम्भव जोशी
जन्मतिथि  :- 25 नवम्बर            
जन्मस्थान  :- सीकर (राजस्थान)
शिक्षा  :-        बी ए एम एस
व्यवसाय  :-   आयुर्वेद चिकित्साधिकारी,
आयुर्वेद विभाग राजस्थान सरकार में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद पर सेवारत
लेखकीय प्रगति :- 
• अक्टूबर 2016 से लघुकथा विधा में सक्रिय.
• शताधिक लघुकथाओं का लेखन.
• दो चिकित्सा विषयक पुस्तकों “चिकित्सा संभव” एवं “निदान संभव” का लेखन (शीघ्र प्रकाश्य)
• साझा लघुकथा संकलन- नयी सदी की धमक, आस पास से गुजरते हुए, उद्गार, लघुकथा कलश,  आदि में लघुकथाऐं प्रकाशित.
• स्थानीय पत्र पत्रिकाओं में लघुकथाओं का प्रकाशन.
• विभिन्न फेसबुक समूहों में कई लघुकथाऐं पुरस्कृत.
साहित्यिक उपलब्धि-
• अमन साहित्यपीठ संस्था, लक्ष्मणगढ़ द्वारा वर्ष के साहित्यकार से सम्मानित.
•  मेरी लघुकथा ‘गुब्बारे’ पर आधारित शॉर्ट फिल्म इन्टरनेशनल शॉर्ट फिल्म फैस्टिवल हेतु चयनित.
• दिशा प्रकाशन की महत्वपूर्ण शृंखला ‘पड़ाव और पड़ताल’ खण्ड 29 में विमर्श व समीक्षार्थ चयनित.
पत्र व्यवहार हेतु पता  :-            
वार्ड नं- 36, बसन्त विहार,
सीकर (राजस्थान)